डिप्टी कमिश्नर साक्षी साहनी नाव से अधिकारियों को साथ लेकर प्रभावित इलाकों में पहुंची।
अमृतसर में भारत-पाकिस्तान सीमा क्षेत्र स्थित रावी नदी के टूटे हिस्सों की मरम्मत का काम तेजी से चल रहा है। यह वही इलाका है जहां से अमृतसर में बाढ़ आई और उसने तबाही मचाई। घुसी बांध टूटने से आई बाढ़ ने सैकड़ों गांवों को प्रभावित किया था। अब प्रशासन और स
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पंजाब सरकार के कैबिनेट मंत्री कुलदीप सिंह धालीवाल और डिप्टी कमिश्नर साक्षी साहनी ने गुरुवार को मौके का दौरा किया। इस दौरान अतिरिक्त डिप्टी कमिश्नर रोहित गुप्ता, एसडीएम अजनाला रविंदर सिंह और जल संसाधन विभाग के वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद रहे। अधिकारियों ने बाढ़ नियंत्रण कार्यों का निरीक्षण कर आवश्यक निर्देश दिए।
विधायक धालीवाल ने कहा कि कार सेवा से जुड़े महापुरुषों और स्थानीय ग्रामीणों का सहयोग मिल रहा है। इससे बांध को मजबूत बनाने का काम तेजी से हो रहा है। उन्होंने बताया कि कुछ दिनों में काम पूरा हो जाएगा। इससे प्रभावित इलाकों में स्थिति सामान्य हो सकेगी।

घोनेवाल में गांव डूब चुके है।

विधायक कुलदीप सिंह धालीवाल अपनी टीम के साथ धूसी बांध के चल रहे रिपेयर के काम का जायजा लेने पहुंचे। उन्होंने खुद भी लोगों की बांध के काम में मदद की।
अमृतसर में 1 लाख 35 हजार लोग प्रभावित डिप्टी कमिश्नर साक्षी साहनी ने कहा कि यह प्रयास लाखों प्रभावित लोगों की घर वापसी का साधन बनेगा। उन्होंने कहा कि यह काम प्रशासनिक जिम्मेदारी के साथ मानवीय दृष्टिकोण से भी जरूरी है। तकनीकी मजबूती से काम होने पर भविष्य में इस क्षेत्र के लोगों को ऐसी समस्या नहीं होगी।
इस अवसर पर एक्सईएन गुरबीर सिंह ने जानकारी दी कि दरिया में पानी का स्तर लगातार घट रहा है और अब खेतों से भी पानी वापस दरिया की ओर लौटने लगा है। उन्होंने बताया कि घोनेवाल, माछीवाल और कोट रजादा में धुस्सी भरने का कार्य शुरू कर दिया गया है। हालांकि अन्य पांच जगहों पर अभी तक मशीनों और वाहनों की पहुंच संभव नहीं हो पाई है। इसके लिए रास्ते बनाए जा रहे हैं, ताकि जल्द ही वहां भी काम शुरू किया जा सके।
अतिरिक्त डिप्टी कमिश्नर रोहित गुप्ता ने बताया कि प्राप्त रिपोर्ट के अनुसार, अब तक 190 गांव बाढ़ से प्रभावित हुए हैं। इन गांवों में लगभग 1 लाख 35 हजार की आबादी बुरी तरह प्रभावित हुई है। बाढ़ की वजह से जिले में पांच लोगों की मौत हुई है जबकि दो लोग गंभीर रूप से घायल हुए हैं, जिनका इलाज जारी है। इसके अलावा अब तक 134 मकानों के क्षतिग्रस्त होने और 18 पशुओं की मौत की भी रिपोर्ट सामने आई है।
पुनर्वास कार्यों की योजना बनाई जा रही-अतिरिक्त डिप्टी कमिश्नर रोहित गुप्ता ने कहा कि जैसे-जैसे पानी घट रहा है, वैसे-वैसे नुकसान का सही आकलन भी हो रहा है। प्रभावित परिवारों को राहत पहुंचाने और पुनर्वास कार्यों की योजना प्रशासनिक स्तर पर बनाई जा रही है। अधिकारियों का मानना है कि यदि पाड़ों की मरम्मत कार्य समय रहते पूरी हो जाती है तो भविष्य में इस क्षेत्र को फिर से ऐसी प्राकृतिक आपदा से सुरक्षित रखा जा सकेगा।
कुल मिलाकर, रावी दरिया के टूटे पाड़ों को भरने का यह प्रयास न केवल एक आपदा प्रबंधन कार्य है, बल्कि हजारों परिवारों के लिए आशा और राहत का संदेश भी है। प्रशासन और जनता के सामूहिक प्रयास से यह कार्य जल्दी ही पूरा होगा और प्रभावित लोगों के जीवन में सामान्य स्थिति लौटेगी।