Belief: Ekadashi fasting ,Know the method of vishnu puja, rituals ekadashi, worship tips in hindi, papakunsha ekadashi | आज पापाकुंशा एकादशी: मान्यता- एकादशी व्रत से जाने-अनजाने में किए गए पाप कर्मों के फल नष्ट होते हैं, जानिए पूजा विधि

Actionpunjab
4 Min Read


  • Hindi News
  • Jeevan mantra
  • Dharm
  • Belief: Ekadashi Fasting ,Know The Method Of Vishnu Puja, Rituals Ekadashi, Worship Tips In Hindi, Papakunsha Ekadashi

20 मिनट पहले

  • कॉपी लिंक

आश्विन मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी यानी पापाकुंशा एकादशी आज (3 अक्टूबर) है। इस दिन भगवान विष्णु के पद्मनाभ स्वरूप की पूजा करने की परंपरा है। इस एकादशी से जाने-अनजाने में किए गए पाप कर्मों के फल नष्ट होते हैं, ऐसी मान्यता है।

पापाकुंशा एकादशी की पौराणिक कथा

उज्जैन के ज्योतिषाचार्य पं. मनीष शर्मा के मुताबिक, विंध्याचल पर्वत पर एक पापी शिकारी रहता था। उसने अपने जीवन में कभी पुण्य कर्म नहीं किया। जब उसका अंत समय आया, तो नारद मुनि ने उसे पापाकुंशा एकादशी का व्रत करने की सलाह दी।

शिकारी ने श्रद्धा और नियमपूर्वक एकादशी व्रत किया, जिससे उसे सारे पापों से मुक्ति मिल गई और मृत्यु के बाद उसकी आत्मा को विष्णुलोक की प्राप्ति हुई। इस कथा से ये संदेश मिलता है कि जीवन में हम कभी भी पुण्य का मार्ग अपना सकते हैं, हम जब भी पुण्य कर्म करेंगे, उसका शुभ फल अवश्य मिलेगा।

पापाकुंशा एकादशी की पूजा विधि

  • स्नान और संकल्प – प्रातः काल ब्रह्म मुहूर्त में स्नान कर स्वच्छ वस्त्र पहनें और घर के मंदिर में पूजा-पाठ और व्रत करने का संकल्प लें।
  • भगवान विष्णु की पूजा – घर या मंदिर में भगवान विष्णु की मूर्ति या चित्र पर गंगाजल छिड़कें। उन्हें पीले पुष्प, तुलसीदल, धूप, दीप, चंदन, और नैवेद्य अर्पित करें।
  • विष्णु सहस्त्रनाम पाठ – इस दिन विष्णु सहस्त्रनाम, भगवद्गीता या विष्णु पुराण का पाठ करना अत्यंत शुभ होता है।
  • भजन-कीर्तन – दिनभर व्रत रखते हुए भगवान के भजन, कीर्तन करें और सत्संग में भाग लें।
  • रात्रि जागरण – रात्रि को जागरण कर प्रभु का ध्यान करें और अगले दिन पारण करें।

व्रत विधि

  • एकादशी व्रत दो प्रकार के होते हैं: निराहार व्रत (पूर्ण उपवास) और फलाहार व्रत।
  • यदि स्वास्थ्य अनुमति न दे, तो फल, दूध, और सूखे मेवे ले सकते हैं। अन्न, चावल, दाल, गेहूं आदि का सेवन नहीं करना चाहिए।
  • व्रती को ब्रह्मचर्य का पालन करते हुए दिनभर सात्विक जीवन जीना चाहिए।
  • द्वादशी के दिन (4 अक्टूबर) सूर्योदय के बाद व्रत का पारण करना चाहिए।

क्या करें?

  • तुलसी और विष्णु जी की पूजा करें – तुलसीदल के बिना पूजा अधूरी मानी जाती है।
  • गरीबों को अन्न-वस्त्र दान दें – इस दिन दान-पुण्य का विशेष महत्व है।
  • भगवद्गीता और पुराणों का पाठ करें – धर्मग्रंथों के अध्ययन से आत्मिक लाभ होता है।
  • रात्रि जागरण करें – रात्रि में भजन-कीर्तन से सकारात्मक ऊर्जा मिलती है।

क्या न करें?

  • लहसुन-प्याज और तामसिक भोजन से परहेज करें।
  • क्रोध, कलह और झूठ से दूर रहें।
  • अन्न और अनाज का सेवन न करें।
  • किसी की निंदा न करें।
  • पापों से मुक्ति और मोक्ष का मार्ग

पापाकुंशा एकादशी का व्रत आत्मा की शुद्धि और मोक्ष की प्राप्ति का साधन माना जाता है। खासकर जिन लोगों ने जीवन में अनजाने में पाप किए हों या मानसिक क्लेश में हों, उनके लिए यह एकादशी अत्यंत लाभकारी मानी जाती है। धर्म शास्त्रों में उल्लेख है कि ये नरक से भी मुक्ति दिलाने में सक्षम है।

खबरें और भी हैं…
Share This Article
Leave a comment

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *