सिखों के छठे गुरु गुरु हरगोबिंद साहिब जी के बंदी छोड़ दिवस के अवसर पर आज अमृतसर के गुरुद्वारा साहिब की ग्राउंड में निहंग जत्थेबंदियों द्वारा पारंपरिक मोहल्ला मनाया गया। पुरातन मर्यादा के अनुसार बंदीछोड़ दिवस के संबंध में निहंग सिखों द्वारा घुड़सवारी
.
इस मौके पर बड़ी संख्या में निहंग सिखों ने इस घुड़सवारी में भाग लिया और अपने करतबों का प्रदर्शन किया। यह मोहल्ला हर साल दिवाली के अगले दिन, रहित मर्यादा के अनुसार निहंग सिखों द्वारा मनाया जाता है।

घोड़ों और ऊंटों पर सवार होकर निहंग जत्थेबंदियों
क्या होता है ‘मोहल्ला’ जानिए इसकी खासियत
मोहल्ला असल में नगर कीर्तन का वो रूप होता है जिसमें निहंग सिख – जिन्हें ‘गुरु की लाडली फौज कहा जाता है – अपने शस्त्र कौशल और वीर परंपरा का प्रदर्शन करते हैं। यह सिर्फ धार्मिक यात्रा नहीं, बल्कि सिख वीरता और गौरव की झलक भी होती है।
निहंगों का मानना है कि गुरु गोबिंद सिंह जी ने शस्त्र विद्या को सिख धर्म का अभिन्न हिस्सा बनाया और उसी परंपरा को मोहल्ला के जरिए आज भी जिंदा रखा गया है। इस मौके पर बुड्ढा दल के मुखी ने नगर कीर्तन में शामिल सभी जत्थेबंदियों का धन्यवाद किया और संगत को बंदी छोड़ दिवस की शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि यह आयोजन ना केवल धर्म की सेवा है, बल्कि सिख परंपरा को आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाने का माध्यम भी है।
नगर कीर्तन मार्ग में जगह-जगह पर लंगर सेवा का आयोजन किया गया। श्रद्धालुओं ने पूरी श्रद्धा और उत्साह के साथ इसमें भाग लिया। वातावरण ‘बोले सो निहाल सत श्री अकाल’ के जयकारों से गूंजता रहा।