Dadasaheb Phalke Film Festival CEO faces rape case | दादासाहेब फाल्के फिल्म फेस्टिवल के CEO पर रेप केस: अभिषेक मिश्रा पर महिला ने शादी का झांसा देकर यौन शोषण का आरोप लगाया

Actionpunjab
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15 मिनट पहले

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दादासाहेब फाल्के इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल (DPIFF) के सीईओ अभिषेक मिश्रा के खिलाफ गुरुवार को मुंबई (मालाड) के मालवणी पुलिस स्टेशन में एक गंभीर आपराधिक मामला दर्ज किया गया है।

अभिषेक मिश्रा के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 69 और 351(2) के तहत गैर-जमानती अपराध बलात्कार और यौन शोषण के आरोप लगाए गए हैं।

शिकायत के अनुसार, 2017 में महिला और अभिषेक मिश्रा की पहचान फेसबुक के माध्यम से हुई। शुरू में दोनों के बीच दोस्ती हुई। बाद में फोन और इंस्टाग्राम पर बातचीत बढ़ी और दोस्ती धीरे-धीरे प्रेम में बदल गई।

शिकायत के अनुसार, पीड़िता ने आरोप लगाया है कि जून 2021 में अभिषेक मिश्रा ने भोजन के बहाने उसे एक होटल में ले जाकर उसके साथ जबरदस्ती शारीरिक संबंध बनाए। मैंने कहा कि मैं अपनी शादी के लिए ऐसा केवल अपने पति के साथ करूंगी, लेकिन उसने मुझे विश्वास दिलाया कि वह जल्द ही मुझसे शादी करेगा और हम पति-पत्नी के रूप में रहेंगे। इसके बाद उसने लॉज में जबरदस्ती शारीरिक संबंध स्थापित किए।

2022 में मई में भी उन्होंने कार में बैठाकर और अलग-अलग लॉज में उसे जबरदस्ती संबंध बनाने के लिए मजबूर किया।

शिकायत में यह भी कहा गया कि जब पीड़िता ने शादी के बारे में पूछा, तो उसने झूठे कारण बताए और शादी करने से मना कर दिया। 2025 में पता चला कि वह किसी अन्य लड़की से शादी करने की योजना बना रहा है। सितंबर 2025 में अभिषेक ने महिला के कार्यस्थल पर आकर धमकी दी और फोटो वायरल करने की धमकी दी।

FIR की कॉपी

अमर उजाला की रिपोर्ट के अनुसार, इससे पहले अप्रैल 2025 में मुंबई के अंबोली पुलिस स्टेशन में अभिषेक मिश्रा और उनके पिता अनिल मिश्रा के खिलाफ गंभीर अपराधों की एफआईआर दर्ज की गई थी। आरोपों में रेप, यौन उत्पीड़न और करीब 6 करोड़ रुपये की जबरन वसूली शामिल थी।

इसके अलावा, वहीं, न्यूज18 के अनुसार, फरवरी 2025 में बांद्रा पुलिस स्टेशन में अभिषेक मिश्रा और उनके पिता अनिल मिश्रा के खिलाफ एक और एफआईआर दर्ज की गई थी। इसमें आरोप लगाया गया था कि उन्होंने प्रायोजकों (sponsors), फिल्मी हस्तियों और जनता को गुमराह कर यह झूठा दावा किया कि उनका कार्यक्रम सरकारी स्तर पर मान्यता प्राप्त “राष्ट्रीय पुरस्कार” है।

शिकायत में कहा गया था कि उन्होंने दादासाहेब फाल्के के नाम का व्यावसायिक लाभ और प्रतिष्ठा बढ़ाने के लिए धोखाधड़ीपूर्वक उपयोग किया, जिससे फिल्म उद्योग और कॉर्पोरेट जगत के लोगों को ठगा गया।

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