वॉशिंगटन डीसी22 मिनट पहले
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अमेरिकी राष्ट्रपति ने जिनपिंग से मुलाकात से 1 घंटे पहले न्यूक्लियर मिसाइल टेस्टिंग का आदेश दिया।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने रक्षा मंत्रालय (पेंटागन) को परमाणु हथियारों की तुरंत टेस्टिंग शुरू करने का आदेश दिया है। उन्होंने कहा कि यह टेस्टिंग चीन और रूस के बराबर स्तर पर होनी चाहिए। अमेरिका ने आखिरी बार 1992 में परमाणु हथियार परीक्षण किया था।
ट्रम्प ने बुधवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘ट्रुथ सोशल’ पर पोस्ट कर लिखा कि दूसरे देशों की टेस्टिंग को देखते हुए उन्होंने डिपार्टमेंट ऑफ वॉर से बराबरी के आधार पर परमाणु हथियारों की टेस्टिंग तुरंत शुरू करने का आदेश दिया है।
ट्रम्प ने खासतौर रूस और चीन का नाम लेते हुए कहा कि रूस दूसरे नंबर पर है और चीन तीसरे नंबर पर। लेकिन अगले 5 साल में ये बराबरी पर आ सकते हैं। ट्रम्प की यह पोस्ट साउथ कोरिया में चीनी राष्ट्रपति जिनपिंग से मुलाकात से एक घंटे से भी कम समय पहले आई।
गौरतलब है कि 1996 में हुए ‘कम्प्रिहेंसिव न्यूक्लियर टेस्ट बैन ट्रीटी’ (CTBT) के तहत भूमिगत परमाणु परीक्षणों पर रोक लगा दी गई थी। चीन और अमेरिका दोनों ने इस संधि पर हस्ताक्षर तो किए हैं, लेकिन अभी तक इसे औपचारिक रूप से मंजूरी नहीं दी है।

33 साल पहले अमेरिका ने किया था परमाणु परीक्षण
पूर्ण परमाणु हथियार परीक्षण (फुल न्यूक्लियर वीपन टेस्ट) में असली वास्तविक परमाणु बम का विस्फोट किया जाता है ताकि उसकी विनाशक क्षमता, रेडिएशन प्रभाव, और तकनीकी दक्षता मापी जा सके। इस परीक्षण में परमाणु प्रतिक्रिया होती है।
ऐसे परीक्षण आमतौर पर जमीन के अंदर या आकाश में किए जाते थे। यह बहुत बड़ा पर्यावरणीय और राजनीतिक मुद्दा होता है, क्योंकि इससे रेडेएशन फैलने का खतरा होता है।
अमेरिका ने आखिरी बार 23 सितंबर 1992 को नेवादा में परमाणु परीक्षण किया था। इसी साल तत्कालीन राष्ट्रपति जॉर्ज एच. डब्ल्यू. बुश ने भूमिगत परमाणु परीक्षणों पर रोक लगाने की घोषणा की थी।
रूस और चीन ने भी 1990 के दशक के बाद से ऐसे परीक्षण रोक दिए थे। अब ट्रम्प इसी परीक्षण को फिर से शुरू करने की बात कह रहे हैं।
- रूस ने हाल ही में 2 परमाणु मिसाइल टेस्ट किए हैं। यह पूर्ण परमाणु हथियार परीक्षण से अलग है। इसमें किसी मिसाइल सिस्टम का टेस्ट होता है। इसमें असल में कोई परमाणु विस्फोट नहीं किया जाता है।
- परमाणु मिसाइल सिस्टम टेस्ट में मिसाइल के इंजन, रेंज, दिशा-सटीकता और डिलीवरी क्षमता की जांच की जाती है। इसमें डमी या नकली वॉरहेड लगाया जाता है।
- अमेरिकी रक्षा मंत्रालय ने अब तक यह स्पष्ट नहीं किया है कि ट्रम्प का आदेश वास्तविक विस्फोटक परीक्षण का होगा या बिना विस्फोट के परमाणु प्रक्रिया के परीक्षण से जुड़ा है।
- एक्सपर्ट्स का मानना है कि अभी तक यह पूर्ण विस्फोटक परीक्षण नहीं बल्कि तैयार या इसका संकेत भर है। क्योंकि अमेरिका ने कॉम्प्रीहेंसिव न्यूक्लियर टेस्ट बैन ट्रीटी (CTBT) पर हस्ताक्षर किए हैं (भले उसने इसे पूरी तरह लागू नहीं किया हो)।
रूस न्यूक्लियर पावर्ड मिसाइल का टेस्ट कर चुका
रूस ने 21 अक्टूबर को न्यूक्लियर पावर्ड मिसाइल का टेस्ट किया था। ट्रम्प ने गलत कदम बताया था। उन्होंने कहा था कि पुतिन मिसाइल परीक्षण करने की बजाय जंग रोके।
ट्रम्प ने कहा कि एक हफ्ते में खत्म होने वाली जंग के 4 साल होने वाले हैं। उन्हें इस पर ध्यान देना चाहिए।
ट्रम्प ने अपनी पोस्ट में यह दावा भी किया कि अमेरिका के पास दुनिया में सबसे ज्यादा परमाणु हथियार हैं। हालांकि अंतरराष्ट्रीय आंकड़ों के अनुसार यह दावा गलत है। ‘इंटरनेशनल कैंपेन टू एबॉलिश न्यूक्लियर वेपंस’ के मुताबिक रूस के पास सबसे ज्यादा यानी 5,500 से ज्यादा परमाणु वॉरहेड हैं, जबकि अमेरिका के पास लगभग 5,044 हैं।
परमाणु हथियारों के दावे पर गलत बोल गए ट्रम्प
ट्रम्प ने अपने ट्रुथ सोशल पोस्ट में यह गलत दावा भी किया कि अमेरिका के पास किसी भी अन्य देश से अधिक परमाणु हथियार हैं। इंटरनेशनल कैंपेन टू एबोलिश न्यूक्लियर वेपन्स के अनुसार, रूस के पास वर्तमान में 5,500 से अधिक परमाणु वारहेड के साथ सबसे अधिक पुष्टि किए गए परमाणु हथियार हैं, जबकि अमेरिका के पास 5,044 परमाणु हथियार हैं।
चीनी सोशल मीडिया पर उड़ा ट्रम्प के फैसले का मजाक
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के परमाणु परीक्षण फिर से शुरू करने के ऐलान पर चीन के सोशल मीडिया यूजर्स ने हैरानी जताई तो कुछ ने खुशी भी दिखाई है।
चीनी प्लेटफॉर्म वीबो पर एक यूजर ने लिखा, “ठीक है, ठीक है, वे (अमेरिका) परमाणु परीक्षण फिर से शुरू करेंगे, तो हम भी करेंगे!”
एक और वीबो यूजर ने लिखा, “हम तो बस उनके पहले कदम उठाने का इंतजार कर रहे थे; अब जो होगा, वो उनके कंट्रोल से बाहर होगा।”
वहीं, एक यूजर ने अमेरिका का मजाक उड़ाते हुए लिखा, “अमेरिका की मौजूदा हालत देखकर तो डर लगता है कि कहीं वो टेस्ट करते वक्त खुद को ही उड़ा न लें।”

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