नई दिल्ली23 मिनट पहले
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2024 में भारत ने इस पोर्ट को 10 साल के लिए लीज पर लिया।
अमेरिकी सरकार ने भारत को ईरान के चाबहार बंदरगाह पर प्रतिबंधों से छह महीने के लिए रियायत दी है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने साप्ताहिक प्रेस कॉन्फ्रेंस में इसकी जानकारी दी।
इससे पहले अमेरिका ने कहा था कि वो 29 सितंबर से इस बंदरगाह को चलाने, पैसे देने या उससे जुड़े किसी काम में शामिल कंपनियों पर जुर्माना लगाएगा। हालांकि बाद में इस छूट को बढ़ाकर 27 अक्टूबर कर दिया गया था, जिसकी मियाद 3 दिन पहले खत्म हुई थी। अब इसे 6 महीने के लिए बढ़ा दिया गया है।
भारत ने 2024 में चाबहार को 10 साल के लिए लीज पर लिया है। इसके तहत भारत यहां 120 मिलियन डॉलर निवेश करेगा और 250 मिलियन डॉलर का क्रेडिट लाइन (सस्ता कर्ज) देगा।
चाबहार बंदरगाह भारत को अफगानिस्तान, मध्य एशिया, रूस और यूरोप से सीधे व्यापार करने में मदद करता है।

चाबहार पोर्ट को छूट से भारत को 4 बड़े फायदे
1. बिना पाकिस्तान के रास्ते मध्य एशिया तक पहुंच
- अब भारत को अफगानिस्तान या दूसरे एशियाई देशों तक सामान भेजने के लिए पाकिस्तान के रास्ते से नहीं जाना पड़ेगा।
- भारत ईरान के चाबहार पोर्ट से सीधा अपना माल अफगानिस्तान और मध्य एशिया भेज सकता है। इससे समय और पैसा दोनों बचेंगे।
2. व्यापार बढ़ेगा
- भारत अब चाबहार के जरिए अपने सामान, दवाएं, फूड और इंडस्ट्रीयल प्रोडक्ट आसानी से दूसरे देशों तक भेज सकेगा।
- इससे भारत का एक्सपोर्ट बढ़ेगा और लॉजिस्टिक खर्च (ढुलाई खर्च) कम होगा।
- भारत को ईरान से तेल खरीदने में आसानी होगी। दोनों देश मिलकर चाबहार को एक ट्रेड हब बना सकते हैं।
3. भारत का निवेश सुरक्षित रहेगा
- भारत ने चाबहार पोर्ट के विकास में काफी पैसा और संसाधन लगाए हैं।
- अमेरिका की छूट से अब भारत अपने प्रोजेक्ट को बिना रुकावट के आगे बढ़ा सकेगा।
4. चीन-पाकिस्तान का काउंटर
- चाबहार बंदरगाह, पाकिस्तान के ग्वादर पोर्ट (जहां चीन निवेश कर रहा है) के नजदीक है।
- इसलिए यह पोर्ट भारत को रणनीतिक रूप से मजबूत बनाता है और चीन-पाकिस्तान गठजोड़ को काउंटर करने में मदद करता है।
भारत चाबहार से अफगानिस्तान को जरूरी सामन भेजता है
पहले भारत को अफगानिस्तान माल भेजने के लिए पाकिस्तान से गुजरना पड़ता था, लेकिन सीमा विवाद के कारण यह मुश्किल था। चाबहार ने यह रास्ता आसान बनाया। भारत इस बंदरगाह से अफगानिस्तान को गेहूं भेजता है और मध्य एशिया से गैस-तेल ला सकता है।
2018 में भारत और ईरान ने चाबहार विकसित करने का समझौता किया था। अमेरिका ने इस प्रोजेक्ट के लिए भारत को कुछ प्रतिबंधों में छूट दी थी। यह बंदरगाह पाकिस्तान के ग्वादर पोर्ट, जिसे चीन बना रहा है, के मुकाबले भारत के लिए रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण है।

भारत और ईरान के बीच 2018 में इस पोर्ट को लेकर 18 महीने का छोटा समझौता हुआ था, जो बार-बार बढ़ाया जाता रहा।
पोर्ट के लिए भारत ने अब तक क्या-क्या किया
भारत ने चाबहार बंदरगाह के लिए 2003 में अटल बिहारी वाजपेयी सरकार के समय ईरान से बात शुरू की थी। अमेरिका-ईरान तनाव के कारण यह रुक गया। 2013 में मनमोहन सिंह ने 800 करोड़ रुपए निवेश की बात कही थी।
2016 में पीएम नरेंद्र मोदी ने ईरान और अफगानिस्तान के नेताओं के साथ समझौता किया, जिसमें भारत ने एक टर्मिनल के लिए 700 करोड़ रुपए और बंदरगाह के विकास के लिए 1250 करोड़ रुपए का कर्ज देने की घोषणा की।
2024 में विदेश सचिव विनय क्वात्रा ने ईरान के विदेश मंत्री से कनेक्टिविटी पर चर्चा की। भारतीय कंपनी IPGL के मुताबिक, बंदरगाह पूरा होने पर इसकी क्षमता 82 मिलियन टन होगी।