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ऑनलाइन दवाओं की बिक्री के विरोध में बुधवार को हरियाणा समेत सोनीपत में भी करीब 1 हजार हजार मेडिकल स्टोर 24 घंटे के लिए बंद रहेंगे। यह बंद रात 12 बजे से शुरू होकर बुधवार रात 12 बजे तक जारी रहेगा। हालांकि, गंभीर मरीजों को दवा उपलब्ध कराने की व्यवस्था बनी रहेगी और अस्पतालों के अंदर संचालित केमिस्ट शॉप, जनऔषधि केंद्र तथा मेडिकल चेन स्टोर खुले रहेंगे।
जिला सोनीपत केमिस्ट एंड ड्रगिस्ट एसोसिएशन ने इस बंद को समर्थन देते हुए प्रशासन को पहले ही सूचना दे दी थी। एसोसिएशन का कहना है कि लंबे समय से लंबित मांगों और लगातार बढ़ रही समस्याओं के कारण यह एक दिवसीय राष्ट्रव्यापी बंद किया जा रहा है। संगठन के अनुसार देशभर में 12.40 लाख से अधिक केमिस्ट और डिस्ट्रीब्यूटर इससे जुड़े हैं, जबकि करीब 4 से 5 करोड़ लोगों की आजीविका इस व्यापार पर निर्भर है। FDA सोनीपत को भेजा गया पत्र जिला सोनीपत केमिस्ट एंड ड्रगिस्ट एसोसिएशन के प्रधान प्रधान सुरेश कादियान का कहना है कि एसोसिएशन की ओर से 11 मई 2026 को फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन (FDA) सोनीपत के ड्रग कंट्रोल ऑफिसर को पत्र भेजा गया। संगठन ने राज्य और केंद्र सरकार से जुड़े कई मुद्दों पर हस्तक्षेप और समर्थन की मांग की है। ई-फार्मेसी संचालन का विरोध एसोसिएशन ने कहा कि अवैध ई-फार्मेसी संचालन तेजी से बढ़ रहा है, जिससे पारंपरिक दवा वितरण व्यवस्था प्रभावित हो रही है। संगठन ने 28 अगस्त 2018 की अधिसूचना GSR 817(E) को वापस लेने की मांग उठाई है। उनका कहना है कि ऑनलाइन माध्यम से बिना वैध डॉक्टर पर्ची के दवाइयों की बिक्री हो रही है, जिससे मरीजों की सुरक्षा पर खतरा बढ़ रहा है।
बड़े कॉर्पोरेट्स की प्रिडेटरी प्राइसिंग पर नाराजगी संगठन ने बड़े कॉर्पोरेट घरानों द्वारा भारी डिस्काउंट और प्रिडेटरी प्राइसिंग को भी मेडिकल व्यापार के लिए बड़ा खतरा बताया है। केमिस्ट एसोसिएशन का कहना है कि बड़ी कंपनियां भारी छूट देकर छोटे और मध्यम मेडिकल स्टोर संचालकों के कारोबार को प्रभावित कर रही हैं, जिससे निष्पक्ष व्यापार व्यवस्था बिगड़ रही है। कोविड काल की अधिसूचना वापस लेने की मांग एसोसिएशन ने 26 मार्च 2020 को जारी अधिसूचना GSR 220(E) को भी वापस लेने की मांग की है। संगठन का कहना है कि यह अधिसूचना कोविड-19 महामारी के दौरान आपातकालीन परिस्थितियों में लागू की गई थी, लेकिन महामारी समाप्त होने के बाद भी इसके प्रावधानों का दुरुपयोग किया जा रहा है और ड्रग्स एंड कॉस्मेटिक्स रूल्स के जरूरी सुरक्षा प्रावधानों को नजरअंदाज किया जा रहा है। मरीजों की सुरक्षा से जुड़े खतरे गिनाए
एसोसिएशन ने कहा कि दवाइयां सामान्य वस्तु नहीं हैं, बल्कि सीधे मरीजों की जिंदगी और स्वास्थ्य से जुड़ी होती हैं। संगठन ने कई गंभीर चिंताएं भी उठाईं, जिनमें बिना प्रिस्क्रिप्शन दवाइयों की बिक्री, प्रिस्क्रिप्शन का बार-बार दुरुपयोग होने की संभावना रहती है।
एंटीबायोटिक और आदत बनाने वाली दवाइयों तक आसान पहुंच, फर्जी पर्चियों का इस्तेमाल, फार्मासिस्ट और मरीज के बीच संपर्क का अभाव, कमजोर रेगुलेटरी कंट्रोल, नकली और गलत तरीके से स्टोर की गई दवाइयों का खतरा तथा एंटी-माइक्रोबियल रेजिस्टेंस बढ़ने जैसी समस्याएं शामिल हैं। निष्पक्ष व्यापार व्यवस्था सुनिश्चित की जाए
केमिस्टों की आजीविका और सार्वजनिक स्वास्थ्य की सुरक्षा के लिए ठोस कदम उठाए जाएं एसोसिएशन ने अपने पत्र में कहा कि लगातार ज्ञापन और मांगें उठाने के बावजूद अभी तक कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई है, जिससे मेडिकल व्यापारियों में भारी नाराजगी है। संगठन ने राज्य स्तर पर तत्काल हस्तक्षेप कर समाधान निकालने की मांग की है।