6 घंटे पहले
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भगवान राम अपने 14 साल के वनवास के दौरान जिस मार्ग से गए, उस पथ पर ट्रेन से निकली रामयात्रा बुधवार को किष्किंधा पहुंची है। देश में पहली बार एक स्पेशल भारत गौरव ट्रेन चित्रकूट से शुरू हुई है, जो राम वन गमन के रास्तों से होते हुई रामेश्वरम तक जाएगी। वहां से ट्रेन में सवार यात्री विशेष विमान से श्रीलंका जाएंगे। फिर वहां से पुष्पक विमान की तर्ज पर एक विशेष विमान में सीधे अयोध्या लौटेंगे।
इस राम यात्रा में 9 स्थानों पर मोरारी बापू एक-एक दिन रामकथा भी कर रहे हैं। गुरुवार (30 अक्टूबर) को प्रवर्षण पर्वत पर रामकथा होने वाली है। इसके बाद अगले तीन पड़ाव रामेश्वरम, श्रीलंका और अयोध्या होंगे। 4 नवंबर को यात्रा अयोध्या पहुंचेगी।
बुधवार (29 अक्टूबर) को रामायण में वर्णित किष्किंधा के ऋष्यमूक पर्वत के करीब पंपा सरोवर पर रामकथा का पांचवां पड़ाव था। रामायण काल का किष्किंधा नगर विश्व विरासत स्थल हंपी से करीब 20 किमी दूर अनेगुंडी नाम से जाना जाता है।
किष्किंधा वही स्थान है, जहां पंपा सरोवर के पास राम-लक्ष्मण की नारद से मुलाकात हुई थी, ऋष्यमूक पर्वत पर हनुमान की राम से मुलाकात हुई थी, तुंगभद्रा के तट पर राम-सुग्रीम की मैत्री हुई, बाली-सुग्रीव का युद्ध हुआ। यहीं एक आंजनेद्री पहाड़ी भी है, जिसे हनुमान जी का जन्मस्थान माना जाता है।
बापू न केवल इन स्थानों पर कथा सुना रहे हैं, बल्कि साथ-साथ महत्वपूर्ण स्थानों के दर्शन भी करा रहे हैं। बापू ने 9 दिवसीय अपनी कथा को नाम दिया है- ‘मानस-रामयात्रा’।
चित्रकूट से हुई राम यात्रा की शुरुआत
यात्रा की शुरुआत शनिवार को चित्रकूट में मंदाकिनी के तट पर सती अनुसुइया और अत्रि आश्रम में पहली कथा से शुरू हुई। इसके बाद अगले पड़ाव में अगस्त्यमुनि आश्रम (पन्ना के सलेहा गांव), नासिक के पंचवटी (महाराष्ट्र) और कर्नाटक के शबरी आश्रम (बेलागावी के सूरेबन गांव) से गुजर चुकी है। बापू इनमें से अधिकांश स्थानों पर पहले भी कथा कर चुके हैं। अगस्त्यमुनि आश्रम और शबरी आश्रम दोनों कथा स्थल मुख्य शहरों से करीब 40-50 किमी दूर थे।
ट्रेन में देश-विदेश के 411 यात्री बापू के साथ कर रहे सफर
इस ट्रेन में देश-विदेश के 411 यात्री बापू के साथ-साथ चल रहे हैं। ट्रेन के जरिए बापू की यह दूसरी यात्रा है। जुलाई-अगस्त-2023 में बापू ने द्वादश ज्योतिर्लिंग की यात्रा की थी और 18 दिन की यात्रा के दौरान ज्योतिर्लिंग पर कथा हुई थी।
राम वन गमन के स्थलों के नाम पर हैं ट्रेन के कोच के नाम
यात्रा के लिए भारत गौरव ट्रेन को राम कथा यात्रा ट्रेन का रूप दिया गया है। इस ट्रेन में दो थ्री टीयर, दो सैंकेंड क्लास, दो सैलून, दो रेस्टोरेंट और बाकी फर्स्ट क्लास के कोच हैं। हर कोच को राम वनगमन स्थलों के अलग-अलग नाम दिए गए हैं- कोच पर वाल्मीकि आश्रम, ऋष्यमूक पर्वत, प्रवर्षण पर्वत, अयोध्या, लंका जैसे नामों के साथ उस स्थान का कोई चित्र, रामकथा प्रसंग की तस्वीर आदि के बड़े फ्लैक्स लगे हैं, ताकि पूरी ट्रेन ही राम मय नजर आए।