आशीष कुमार श्रीवास्तव | रायबरेली2 मिनट पहले
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रायबरेली में आचार्य महावीर प्रसाद द्विवेदी पुस्तक मेले के पांचवें दिन लोकनृत्य संध्या का आयोजन किया गया। इस अवसर पर माता कौशल्या के कोसल प्रदेश (पश्चिम ओडिशा) से आए कलाकारों ने भावपूर्ण लोकनृत्य प्रस्तुत किए, जिसने दर्शकों को भावुक कर दिया।
यह टीम पदमपुर-संबलपुर स्थित एकटंकिया म्यूजिक स्कूल से आई थी, जो पश्चिम ओडिशा में लुप्त हो रही लोककला, लोकनृत्य और लोकगीतों को संरक्षित करने का कार्य कर रहा है। स्कूल संचालक, शोधकर्ता और संगीतज्ञ सुरेंद्र साहू तथा श्रीमती मंजुला बिस्वाल के नेतृत्व में यह दल 1200 किलोमीटर की यात्रा कर यहां पहुंचा था। टीम में शीतल साहू, उत्पला साहू, शिवानी मेहर, लिपि शिखा, अलीशा पावर, मीना बाग, रसूल कुंभार, आशीष कुमार कंधेर, नबिन बांचोर, हराधान कुंभर और सभ्य सिंह बरिहा जैसे कलाकार शामिल थे।

लोकरनृत्य संध्या की शुरुआत पश्चिम ओडिशा में पूज्य समलेश्वरी माता की वंदना के साथ हुई। इसके बाद मीना बाग ने भजन प्रस्तुत किया, जिसमें अन्य कलाकारों ने वाद्ययंत्रों पर संगत दी। कलाकारों ने बेटी के जन्म से लेकर उसकी विदाई तक के सफर को लोकनृत्य के माध्यम से दर्शाया। इस प्रस्तुति के दौरान कलाकार और दर्शक दोनों ही भावुक हो गए।

कुछ देर बाद, कलाकारों ने नोवाखाई (नई फसल घर आने की खुशी) पर आधारित लोकनृत्य प्रस्तुत कर माहौल को खुशनुमा बनाया। इसके बाद एक और भजन पर लोकनृत्य की प्रस्तुति दी गई। लगभग तीन घंटे तक चली इस लोकनृत्य संध्या का समापन सामूहिक नृत्य के साथ हुआ, जिसमें मीना बाग के गीत पर श्रोता और कलाकार सभी ने मिलकर नृत्य किया।