GenZ protests against the government in Pakistan | पाकिस्तान में सरकार के खिलाफ GenZ का प्रदर्शन: फीस बढ़ोतरी, सेना के अत्याचार को लेकर सड़कों पर उतरे; ‘कातिलों जवाब दो’ नारा लगाया

Actionpunjab
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इस्लामाबाद2 मिनट पहले

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पाकिस्तान में GenZ सरकार से  शिक्षा में सुधार और बुनियादी सुविधा देने की मांग कर रही है। - Dainik Bhaskar

पाकिस्तान में GenZ सरकार से शिक्षा में सुधार और बुनियादी सुविधा देने की मांग कर रही है।

नेपाल, बांग्लादेश के बाद अब पाकिस्तान में GenZ सरकार के खिलाफ सड़कों पर उतर आए हैं। पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (PoK) में यह प्रदर्शन शिक्षा में सुधारों, परीक्षा में ई-मार्किंग सिस्टम की खामियां और बुनियादी सुविधाओं की कमी के कारण किया जा रहा है।

यह आंदोलन 4 नवंबर को मुजफ्फराबाद के यूनिवर्सिटी ऑफ आजाद जम्मू एंड कश्मीर से शुरू हुआ, जहां छात्र सेमेस्टर फीस में लाखों रुपए के बढ़ोतरी का विरोध कर रहे थे। हालांकि इसमें एक छात्र गोली लगने से घायल हुआ था, जिसके बाद यह प्रदर्शन हिंसक हो गए।

प्रदर्शन मुजफ्फराबाद से निकलकर मीरपुर, कोटली, रावलाकोट और नीलम वैली तक फैल चुके हैं। लाहौर में भी इंटरमीडिएट छात्रों ने धरना दिया। छात्रों ने आजादी और ‘कातिलों जवाब दो, खून का हिसाब दो’ जैसे नारे लगाते हुए पाकिस्तानी सेना पर अत्याचार के आरोप लगाए।

यूनिवर्सिटी के सेमेस्टर फीस लाखों रुपए बढ़ाने से नाराज छात्र

मुजफ्फराबाद के यूनिवर्सिटी ऑफ कश्मीर में सेमेस्टर फीस में 3-4 महीने में लाखों रुपए बढ़ने के कारण छात्र गुस्साए हुए थे। इस प्रदर्शन में इंटरमीडिएट (11वीं-12वीं) के छात्र भी शामिल हो गए, जो मैट्रिक और इंटरमीडिएट स्तर पर लागू ई-मार्किंग (डिजिटल मूल्यांकन) सिस्टम से नाराज हैं।

इससे पहले 30 अक्टूबर को ग्यारहवी के रिजल्ट 6 महीने की देरी से जारी किए गए थे, जिसके कारण स्टूडेंट्स ने विरोध किया था। छात्रों ने आरोप लगाया कि ई-मार्किंग के कारण उन्हें बहुत कम नंबर मिले।

वहीं, कुछ मामलों में तो ऐसी परीक्षाओं में भी पास दिखाया गया जिनकी परीक्षा उन्होंने दी ही नहीं थी। एजुकेशन बोर्ड ने ई-मार्किंग प्रक्रिया की जांच के लिए एक कमेटी गठित की, लेकिन सरकार की ओर से कोई आधिकारिक बयान नहीं आया।

GenZ की सरकार से 7 अहम मांगे

  • ई-मार्किंग सिस्टम को तुरंत बंद करना।
  • री चेकिंग फीस (प्रति सब्जेक्ट 1,500 रुपए) माफ करना।
  • सात सब्जेक्ट्स के लिए 10,500 रुपए की कीमत गरीब छात्रों के लिए मुश्किल बन रही है।
  • खराब स्कूल-कॉलेज इमारतों, लाइब्रेरी और लैब का निर्माण।
  • अस्पतालों में दवाओं और डॉक्टरों की कमी दूर करना।
  • पब्लिक ट्रासंपोर्ट बढ़ाना।
  • भ्रष्टाचार और सेना के अत्याचारों पर रोक।

महंगाई को लेकर 5 दिनों तक चला था प्रदर्शन

PoK में अक्टूबर में बिजली बिलों में वृद्धि, आटे की सब्सिडी और विकास कार्यों की मांग को लेकर प्रदर्शन हुआ था। यह आंदोलन पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (PoK) में 5 दिनों तक चला।

यह प्रदर्शन जम्मू-कश्मीर जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी (JKJAAC) के नेतृत्व में हुआ था। प्रदर्शनकारी सरकार पर मौलिक अधिकारों की अनदेखी और महंगाई कंट्रोल न कर पाने का आरोप लगा रहे थे।

JKJAAC ने सरकार के सामने 38 मांगें रखी थी, जिनमें PoK विधानसभा की 12 रिजर्व सीटें खत्म करने की मांग की गई। सरकार ने प्रदर्शनकारियों की 38 में से 21 मांगे मान ली थी, जिसके बाद विरोध-प्रदर्शन बंद किया गया । इन प्रदर्शनों में 12 लोग मारे गए, जबकि 100 से ज्यादा घायल हुए।

अक्टूबर में प्रदर्शनकारियों ने PoK में पुलों पर रखे कंटेनर नदी में फेंक दिए थे।

अक्टूबर में प्रदर्शनकारियों ने PoK में पुलों पर रखे कंटेनर नदी में फेंक दिए थे।

इस प्रदर्शन में 100 से ज्यादा लोग घायल हुए थे।

इस प्रदर्शन में 100 से ज्यादा लोग घायल हुए थे।

समझौते की मुख्य बातें-

  • कैबिनेट छोटी होगी: PoK की सरकार में अब 20 से ज्यादा मंत्री नहीं होंगे।
  • विभागों का विलय: कुछ सरकारी विभागों को मिलाकर कम किया जाएगा।
  • नीलम वैली में सुरंगें: दो नई सुरंगों के लिए अध्ययन शुरू होगा।
  • मीरपुर में हवाई अड्डा: इंटरनेशनल एयरपोर्ट बनाने की योजना।
  • शिक्षा बोर्ड बढ़ाएंगे: स्कूल बोर्ड बनाए जाएंगे ताकि शिक्षा बेहतर हो।
  • MRI-CT मशीनें: हर जिले के अस्पताल में MRI और CT स्कैन मशीनें लगेंगी।
  • हेल्थ कार्ड: 15 दिनों में सभी को हेल्थ कार्ड मिलेगा।
  • बिजली के लिए पैसा: बिजली सिस्टम सुधारने के लिए 10 अरब पाकिस्तानी रुपए दिए जाएंगे।

PoK में पहले भी कई बार प्रदर्शन हुए

PoK में पहले भी कई बार सेना और सरकार के खिलाफ विरोध प्रदर्शन हुए हैं। पिछले साल मई में सस्ते आटे और बिजली के लिए लोगों ने हड़ताल की थी। लोग कहना है कि PoK में मौजूद मंगला डैम से बिजली बनती है, फिर भी उन्हें सस्ती बिजली नहीं मिलती।

इसी तरह 2023 में भी बिजली की कीमतें बढ़ाने और गेहूं की सब्सिडी हटाने के खिलाफ लोग सड़कों पर उतर आए थे। 2022 में भी सरकार के एक कानून के खिलाफ लोगों ने सड़कें जाम की थीं और आजादी के नारे लगाए थे।

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