![]()
माध्यमिक शिक्षा निदेशालय की ओर से शुरू किए गए विद्यालय स्वास्थ्य परीक्षण कार्यक्रम (स्कूल हैल्थ एक्जामिनेशन ड्राइव) में चौंकाने वाला मामला सामने आया है। उदयपुर जिले में हुए सर्वे में पहली से 12वीं कक्षा तक के 592 विद्यार्थियों में मोतियाबिंद के लक्षण
.
निदेशालय ने गत 3 नवंबर को आदेश जारी कर स्पष्ट किया था कि प्रदेश के करीब 75 लाख विद्यार्थियों की 70 मानकों पर स्वास्थ्य जांच की गई। जांच के दौरान पाई गई गंभीर स्थितियों जैसे दृष्टि दोष, पोषण की कमी, त्वचा व दंत समस्याओं की रिपोर्ट शाला दर्पण पोर्टल पर अपलोड की गई। इसमें उदयपुर में मोतियाबिंद को छोड़कर अन्य बीमारियों की स्थिति सामान्य रही।
जांच रिपोर्ट शाला दर्पण पर अपलोड प्रदेश में 47,000 विद्यार्थियों में विभिन्न स्वास्थ्य समस्याएं पाई गईं। सभी स्कूलों को जांच रिपोर्ट निर्धारित प्रारूप में पोर्टल पर अपलोड की गई। मोतियाबिंद प्रभावित विद्यार्थियों की प्राथमिक स्क्रीनिंग के बाद उन्हें निशुल्क उपचार के लिए रैफर किया जाएगा। निदेशक (माध्यमिक शिक्षा) सीताराम जाट ने निर्देश दिए हैं कि जिन विद्यार्थियों को चिकित्सीय जांच या उपचार की आवश्यकता है। उन्हें स्थानीय स्वास्थ्य विभाग, चिकित्सकों, एनजीओ तथा सामाजिक संस्थाओं के सहयोग से उपचार उपलब्ध कराया जाए।
75 लाख विद्यार्थियों की 70 मानकों पर की जांचें, 47 हजार में समस्या
उदयपुर जिले में जिन 592 बच्चों में मोतियाबिंद सामने आया है, इनमें से 12 बच्चों में जल्द सर्जरी की जरूरत बताई गई है। अन्य बच्चों की स्क्रीनिंग हो चुकी है, लेकिन फिलहाल उनकी सर्जरी जैसी गंभीर स्थिति नहीं है। जिन 12 बच्चों में सर्जरी की जरूरत बताई गई है, उनमें भींडर 1, गिर्वा 2, गोगुंदा 3, झाड़ोल 2, खेरवाड़ा 1, मावली 2, ऋषभदेव से 1 बच्चा शामिल है। इनमें से भींडर के एक बच्चे की सर्जरी हो भी चुकी है।
सीडीओ ने कहा- बच्चों का उपचार कराएंगे मुख्य जिला शिक्षा अधिकारी प्रतिभा गुप्ता का कहना है कि जिन बच्चों में स्वास्थ्य समस्याएं सामने आई हैं, उनका उपचार करवाया जाएगा। इतनी बड़ी संख्या में बच्चों में मोतियाबिंद होना असंभव सा लगता है। आंखें कमजोर तो हो सकती है। कुछ बच्चों में सुनने की समस्या भी सामने आई है, इसका भी हम उपचार करवाएंगे।
मेटाबोलिज्म डिसऑर्डर से भी हो सकती है समस्या
इतनी बड़ी संख्या में बच्चों में मोतियाबिंद है तो यह रिपोर्ट चिंताजनक है। यह सामान्य बात नहीं है। इन बच्चों की सर्जरी समय रहते करवानी चाहिए। कई बार मां की ओर से संक्रमण होने, लगातार डायरिया होने व मेटाबोलिज्म डिसऑर्डर होने से बच्चों में मोतियाबिंद की समस्या हो सकती है। इससे दृष्टि धुंधली या धूमिल हो सकती है। पढ़ने, रात में गाड़ी चलाने या चेहरे व अन्य विवरण स्पष्ट रूप से देखने में परेशानी हो सकती है। चीजें विकृत दिखाई देती हैं। वस्तुओं का रंग भी भूरा या पीला दिखाई दे सकता है। गंभीर स्थिति में आंख की पुतली का रंग भी बदल जाता है।