uttar pradesh saharanpur jammu kashmeer Dr. Adil terrorist police mujjamil | सहारनपुर में आतंकी ट्रेनिंग सेंटर खोलना चाहता था डा. अदील: MBBS स्टूडेंट्स का ब्रेनवॉश किया, 200 कश्मीरी छात्र कर रहे पढ़ाई, मुस्लिम बस्ती में घर लिया – Saharanpur News

Actionpunjab
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आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद से जुड़ा डॉ. अदील का वेस्ट यूपी आना एक प्लान का हिस्सा था। वह सहारनपुर को जैश-ए-मोहम्मद के नए ठिकाने के रूप में विकसित कर रहा था। यहां रिक्रूट कमांड सेंटर बनाने की योजना थी।

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लोगों का ब्रेनवॉश कर कैसे आतंकी संगठन से जोड़ें, इसके लिए उसने कई युवाओं से संपर्क बनाए थे। दीनी तालीम और एमबीबीएस की पढ़ाई करने वाले छात्र उसके संपर्क में थे। सुरक्षा एजेंसियों को डॉ. अदील के मोबाइल से कई अहम जानकारियां मिली हैं।

इसी आधार पर सुरक्षा एजेंसियां जिले में दीनी संस्थानों और हॉस्टलों में ठहरे बाहरी छात्रों की गहन जांच कर रही हैं। डा. अदील ने 2 मकान बदले थे। वह डा. मुजम्मिल को भी सहारनपुर लाना चाहता था। इसके लिए उसने अस्पताल प्रबंधन से उसकी बात कराई थी। मगर तब अस्पताल ने आश्वासन दिया था।

जांच में पता चला कि उसके घर पर देर रात 5 गाड़ियों से करीब आठ लोग हर रोज आते थे। ये लोग कई बार सुबह तक रुकते थे। वह ऑनलाइन खाना मंगवाता था। डॉ. अदील से संपर्क रखने वाले करीब 15 लोग एजेंसियों के रडार पर हैं।

इनमें अदील से रोजाना मिलने आने वाले 8 लोग भी शामिल हैं। एनआईए, एटीएस, एसटीएफ, आईबी और जम्मू-कश्मीर पुलिस की टीमें सहारनपुर में लगातार डेरा डाले हुए हैं। डा. अदील ने सहारनपुर को क्यों चुना? वह यहां किन लोगों को निशाना बना रहा था? कितने लोगों से उसने संपर्क किया? उसने किराए पर मकान कहां-कहां लिए थे? फिर उन्हें क्यों छोड़ा? पढ़िए रिपोर्ट…

पहले जानिए डॉ. अदील वेस्ट यूपी कैसे पहुंचा?

डा. अदील सहारनपुर में आतंकी ट्रेनिंग सेंटर खोलना चाह रहा था, ताकि यहां के लोगों का ब्रेनवॉश कर उन्हें आतंकी गतिविधियों शामिल किया जा सके।

डा. अदील सहारनपुर में आतंकी ट्रेनिंग सेंटर खोलना चाह रहा था, ताकि यहां के लोगों का ब्रेनवॉश कर उन्हें आतंकी गतिविधियों शामिल किया जा सके।

ऑस्कर ग्रुप ऑफ हॉस्पिटल की वेबसाइट पर जॉब के लिए अप्लाई किया जैश-ए-मोहम्मद से जुड़ने के बाद डॉ. अदील वेस्ट यूपी में ठिकाना तलाश रहा था। मुजम्मिल के बताने पर उसने ऑस्कर ग्रुप ऑफ हॉस्पिटल की वेबसाइट पर जॉब के लिए अप्लाई किया। यह हरियाणा का बहुत बड़ा ग्रुप है। इस ग्रुप के अंदर में देश भर के हॉस्पिटल हैं। रोहतक में इसका ऑफिस है। उसने लोकेशन सहारनपुर भरी थी।

यहां अप्लाई होने के बाद उसका इंटरव्यू हुआ। इसके बाद उसका सेलेक्शन हो गया। इसके बाद उसने जम्मू-कश्मीर के अनंतनाग में डॉक्टर की नौकरी छोड़ दी। सेलेक्ट होने के बाद डॉ. अदील को सहारनपुर के वी-ब्रॉस हॉस्पिटल भेजा गया। 24 नवंबर 2024 में यहां उसकी पहली ज्वाइनिंग थी। तब उसकी सैलरी चार लाख रुपए थी। इसके बाद मार्च 2025 में उसने यहां जॉब छोड़ दी।

फिर उसने पांच लाख की सैलरी में फेमस मेडीकेयर हॉस्पिटल में नौकरी ज्वाइन कर ली। तब उसे उसी में काम कर रहा था।

सहारनपुर को ही क्यों चुना, वो पढ़िए-

डॉ. अदील ने जिस अस्पताल में नौकरी करता था, वहां से शैक्षिक संस्थानों की दूरी महज 500 से 1 किमी. के दायरे में थी।

डॉ. अदील ने जिस अस्पताल में नौकरी करता था, वहां से शैक्षिक संस्थानों की दूरी महज 500 से 1 किमी. के दायरे में थी।

युवाओं को ब्रेनवॉश कर आतंकी बनाना मकसद था सहारनपुर तीन राज्यों से जुड़ा है। हरियाणा, उत्तराखंड ओर हिमाचल प्रदेश। यहां एयरफोर्स स्टेशन, एयरपोर्ट, रिमाउंट डिपो और दारुल उलूम जैसी महत्वपूर्ण इस्लामिक संस्था है। यहां पर दीनी तालीम लेने देश के कोने-कोने से लाखों की संख्या में छात्र आते हैं।

देवबंद क्षेत्र में मेडिकल कॉलेज और दारुल उलूम में 200 से अधिक कश्मीरी बच्चे पढ़ाई करते हैं। यही छात्र इन टेररिस्ट के निशाने पर थे। युवा दिमागों को कट्टरता की ओर मोड़ना इन टेररिस्टों का उद्देश्य था। साथ ही इनका ब्रेनवॉश कर उन्हें आतंकी गतिविधियों में शामिल करना था। डॉ. अदील और उसके साथी देश के अंदर ही आतंकी तंत्र खड़ा करना चाह रहे थे।

सुरक्षा एजेंसियों को डा. अदील के मोबाइल से कई महत्वपूर्ण इनपुट मिले हैं। सूत्र बताते हैं कि डा. अदील के संपर्क में कई युवा थे। इसमें सबसे अधिक दीनी तालीम और एमबीबीएस की पढ़ाई करने वाले छात्र शामिल हैं।

जांच एजेंसियां अब सहारनपुर और इसके आसपास के शिक्षण संस्थानों और हॉस्टल में रहने वाले लोगों के बारे में डिटेल जुटा रही हैं। पता किया जा रहा है कि कौन-कौन और कितने लोग डा. अदील के संपर्क में थे।

इसी मकान को किराए पर डॉ. अदील ने ले रखा था। अब इसमें ताला लगा हुआ है।

इसी मकान को किराए पर डॉ. अदील ने ले रखा था। अब इसमें ताला लगा हुआ है।

ऐसी मुस्लिम बस्ती में घर लिया, जहां CCTV नहीं लगे डॉ. अदील ने इस एक साल में दो घर और दो हॉस्पिटल बदले। इसके पीछे भी उसका एक खास मकसद बताया जा रहा है। डॉ. अदील ने दिल्ली रोड पर एक पॉश कॉलोनी पैरामाउंट ट्यूलिप में किराए का मकान लिया था। वह मकान हिंदू आबादी के बीच में था। सेपरेट और सूनसान जगह पर था। उसके आसपास मकान कम थे।

यहां से वी-ब्रॉस हॉस्पिटल की दूरी 1 किमी. थी। वह थ्री व्हीलर में अस्पताल आता जाता था। यहां से स्कूल-कॉलेजों की दूरी 2 किमी. से अधिक थी।

इसके बाद उसने मार्च में अंबाला रोड के केयर हॉस्पिटल में ज्वाइन कर लिया। अस्पताल से करीब तीन किमी. दूर उसने मानकमऊ की बाबू विहार कॉलोनी में मस्जिद वाली गली में जाकिर का मकान किराए पर लिया। ये मकान मुस्लिम बस्ती में था।

ये मकान भी सेपरेट था। इस बस्ती में कोई सीसीटीवी कैमरा नहीं था। इसी मकान में रात में उसकी आठ-दस लोगों के साथ मीटिंग होती थी। अस्पताल आने-जाने के लिए उसने एक स्कूटी ले ली।

जहां पर हॉस्पिटल पर था, उससे करीब 500 मीटर की दूरी में एक गर्ल्स इंटर कॉलेज, एक बॉयज इंटर कॉलेज, एक इस्लामिया इंटर कॉलेज और डिग्री कॉलेज है। आशंका है कि यहां पढ़ने वाले छात्रों से डॉ. अदील ने संपर्क किया था।

डॉ. अदील मुजम्मिल को भी सहारनपुर लाना चाहता था, इसके लिए उसने अस्पताल प्रशासन से बात की थी।

डॉ. अदील मुजम्मिल को भी सहारनपुर लाना चाहता था, इसके लिए उसने अस्पताल प्रशासन से बात की थी।

2 दरवाजों वाले सेपरेट मकान में रहता था डा. अदील डॉ. अदील ने जो दो मकान किराए पर लिए। उनमें एक बात कॉमन थी। अदील ऐसे मकान खोजता था, जिनके दो दरवाजे हों। अगर एक दरवाजे से कोई इंट्री करे तो दूसरे दरवाजे से निकला जा सके। वह मकान के दूसर दरवाजे को अंदर से बंद कर रखता था। उसने मकान ऐसी जगह खोजे जो एकांत में और सेपरेट हों। आसपास सीसीटीवी न हों।

वहां जहां-जहां रहा, वहां के पड़ोसी बताते हैं कि डॉ. अदील न किसी से मिलता था और न ही किसी से बात करता था। दोनों ही अस्पतालों में उसकी ड्यूटी सुबह 10:00 से शाम 6:00 तक रहती थी। शाम को छह बजे घर आने के बाद वह कैद हो जाता था। खाना भी उसका ऑनलाइन आता था। रात में उसके घर के बाहर गाड़ियां आती थीं।

डॉ.मुजम्मिल को सहारनपुर लाने की कोशिश की थी वी ब्रॉस हॉस्पिटल ज्वाइन करने के 2 महीने बाद डॉ. अदील ने डॉ.मुजम्मिल को यहां पर ज्वाइन कराने की कोशिश की थी। अस्पताल प्रबंधन से उसने फोन पर मुजम्मिल की बात कराई थी। तब अस्पताल प्रबंधन ने अपने बोर्ड से बात करने की बात कही थी। हालांकि इसी बीच में डॉक्टर अदील ने नौकरी छोड़ दी।

कौन है डॉ. अदील

  • डॉ. अदील कश्मीर के कुलगाम जिले के वानपुरा का रहने वाला है। श्रीनगर मेडिकल कॉलेज से MBBS की पढ़ाई की। इसके बाद अनंतनाग के सरकारी मेडिकल कॉलेज (GMC) में रेजिडेंट डॉक्टर के तौर पर नौकरी करने लगा। हालांकि, उसने 2024 में अनंतनाग सरकारी अस्पताल से इस्तीफा दे दिया और सहारनपुर आ गया। तब से वह सहारनपुर के अलग-अलग अस्पतालों में लोगों का इलाज करता रहा।
  • 2024 में उसने दिल्ली रोड स्थित आस्कर अस्पताल (वी-ब्रास) में एक साल तक काम किया। वहीं उसकी मुलाकात आस्कर अस्पताल में काम करने वाले डॉ. अंकुर चौधरी से हुई। बाद में डॉ. अंकुर ने डॉ. अदील की मुलाकात फेमस मेडिकेयर अस्पताल के डायरेक्टर डॉ. मनोज मिश्रा से कराई। वहां उसकी सैलरी 5 लाख रुपए हर महीने तय हुई।
  • अदील सुबह से शाम 7 बजे तक अस्पताल में रहता था। 4 अक्टूबर को अदील की शादी जम्मू-कश्मीर में हुई। उसने डॉ. बाबर, डॉ. असलम सैफी समेत चार मुस्लिम डॉक्टरों को शादी का कार्ड दिया, लेकिन अस्पताल के डायरेक्टर डॉ. मनोज मिश्रा को नहीं बुलाया।
  • शादी के 27 दिन बाद, यानी 1 नवंबर को वह सहारनपुर लौटा। हनीमून पर जाने की तैयारी कर रहा था। 6 नवंबर को पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर लिया। पुलिस के अनुसार, डॉ. अदील का भाई भी डॉक्टर है। उसकी पत्नी रुकैया सर्जन है।

डॉ. अदील जैश से कैसे जुड़ा, जानिए—

डॉ. अदील की श्रीनगर मेडिकल कॉलेज में पढ़ाई के दौरान मुलाकात शोपियां निवासी मौलवी इरफान अहमद से हुई। इरफान श्रीनगर के बाहरी इलाके छनपुरा स्थित मस्जिद अली नक्कीबाग का इमाम है। वह कश्मीर में आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद का ग्राउंड-लेवल पर सक्रिय सदस्य है, जो लोगों को संगठन से जोड़ने का काम करता है।

इरफान आतंकवादियों को हथियारों की सप्लाई करता है और कश्मीरी युवाओं को आतंकी प्रशिक्षण के लिए पाकिस्तान भेजने में मदद करता है। इसके अलावा वह पत्थरबाजी की घटनाओं को भी अंजाम दिलवाता है। इसी दौरान इरफान ने डॉ. अदील की मुलाकात गांदरबल निवासी जमीर अहमद अहंगर नाम के युवक से कराई।

जमीर का काम नए युवाओं को ट्रेनिंग देना और उनका ब्रेनवॉश करना था। उसने डॉ. अदील का भी ब्रेनवॉश किया और उसे जैश-ए-मोहम्मद से जोड़ दिया।

कैसे अदील तक पहुंची पुलिस जानिए 17 अक्टूबर को मौलवी इरफान ने नौगाम इलाके में जैश-ए-मोहम्मद से जुड़े पोस्टर लगवाए। पोस्टर लगाने वालों में नौगाम के रहने वाले आरिफ निसार डार उर्फ साहिल, यासिर-उल-अशरफ और मकसूद अहमद डार शामिल थे। ये सभी CCTV कैमरे में कैद हो गए। 19 अक्टूबर को श्रीनगर पुलिस ने अज्ञात लोगों के खिलाफ केस दर्ज किया।

श्रीनगर के एसएसपी संदीप चक्रवर्ती की अगुआई में जम्मू-कश्मीर पुलिस ने आरोपियों को गिरफ्तार किया। पूछताछ में खुलासा हुआ कि पोस्टर मौलवी इरफान और डॉ. अदील के कहने पर लगाए गए थे। पुलिस ने मौलवी इरफान को पकड़ा। उससे मिले इनपुट के आधार पर जमीर अहमद अहंगर को भी गिरफ्तार किया गया। फिर पुलिस ने डॉ. अदील की तलाश शुरू की।

पुलिस जब जमीर को लेकर डॉ. अदील के घर पहुंची, तो पता चला कि 1 नवंबर को वह सहारनपुर आया है और यहां एक अस्पताल में नौकरी कर रहा है। 6 नवंबर को यूपी एटीएस की मदद से जम्मू-कश्मीर पुलिस ने डॉ. अदील को सहारनपुर से गिरफ्तार कर लिया।

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