शिमला के संजौली में बाहरी राज्यों के मुस्लिमों को मस्जिद के भीतर जाने से रोकते हुए महिला और पुलिस।
हिमाचल की राजधानी शिमला में संजौली मस्जिद के बाहर शुक्रवार (14 नवंबर) को विवाद की स्थिति बन गई। यहां बाहरी मुस्लिम लोगों को जुमे की नमाज पढ़ने से रोक दिया गया। देवभूमि संघर्ष समिति और मुस्लिम समुदाय के लोगों के बीच बहस भी हुई, लेकिन किसी भी बाहरी व्य
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कुछ देर के लिए माहौल तनावपूर्ण रहा, लेकिन मौके पर मौजूद पुलिस ने स्थिति संभाल ली। मस्जिद और संजौली बाजार में बड़ी संख्या में पुलिस तैनात रही। शिमला के स्थानीय मुसलमानों को मस्जिद में जाने की अनुमति दी गई।
संजौली मस्जिद को नगर निगम आयुक्त और जिला अदालत ने पहले ही अवैध घोषित किया हुआ है। इसी कारण बाहरी लोगों को अंदर जाने से रोका गया। महिलाओं ने नमाज पढ़ने आए लोगों को बाहर से ही वापस भेज दिया, जबकि कुछ लोग अंदर जाने की जिद करते रहे।
पहले देखें मामले से जुड़े 3 PHOTOS..

संजौली मस्जिद के बाहर कुछ लोग मस्जिद में जाने की जिद्द करते हुए।।

शिमला के संजौली में मस्जिद।

संजौली मस्जिद जाने वाले लोगों को रोकते हुए महिलाएं।
अब सिलसिलेवार पढ़िए क्या है पूरा मामला..
- 2 गुटों में लड़ाई से सुर्खियों में मामला: संजौली मस्जिद मामला 2 गुटों में लड़ाई के बाद सुर्खियों में आया। इसके बाद, पूरे देश में बवाल मचा था। दरअसल, 31 अगस्त 2024 को शिमला के मेहली में 2 समुदायों में मारपीट हुई। मारपीट करने वाले एक समुदाय के लोग संजौली मस्जिद में छिप गए। इससे गुस्साए लोगों ने 1 सितंबर को मस्जिद के बाहर प्रदर्शन किया। इसके बाद शिमला के अन्य स्थानों पर भी हिंदू संगठनों ने प्रदर्शन किया। शिमला के बाद प्रदेश के अलग- अलग क्षेत्रों में भी लोग सड़कों पर उतरे।
- कमेटी की अवैध हिस्सा तोड़ने की: 11 सितंबर को शिमला के संजौली में फिर उग्र प्रदर्शन हुआ। जिससे माहौल तनावपूर्ण हो गया। पुलिस ने बल प्रयोग और पानी की बौछार की। इससे हिंदू संगठन भड़क गए। संजौली में मस्जिद तोड़ने की मांग उठने लगी। इस बीच 12 सितंबर को संजौली मस्जिद कमेटी खुद निगम कमिश्नर कोर्ट में पहुंची और अवैध हिस्सा तोड़ने की पेशकश की। इसके बाद मामला शांत हुआ।
- 16 साल तक निगम कोर्ट में चला केस: संजौली मस्जिद के अतिक्रमण मामला करीब 16 साल तक निगम आयुक्त कोर्ट में चलता रहा। इस दौरान इस केस में 50 से भी ज्यादा बार सुनवाई हुई। हिमाचल हाईकोर्ट के दखल के बाद इस केस में निगम कमिश्नर ने बीते 3 मई को फैसला सुनाया और पूरी मस्जिद को अवैध बताते हुए हटाने के आदेश दिए।
- हिंदू संगठनों बोले- बिना परमिशन निर्माण: हिंदू संगठनों और संजौली मस्जिद के आसपास रहने वाले लोकल रेजिडेंट ने आरोप लगाया कि मस्जिद का निर्माण बिना परमिशन के किया गया था। मस्जिद की जमीन वक्फ बोर्ड की नहीं है। मस्जिद को बनाने के लिए नगर निगम से परमिशन भी नहीं ली गई।

संजौली मस्जिद के बाहर खड़ी महिलाएं बाहरी राज्यों के मुस्लिमों को मस्जिद में जाने से रोकते हुए।
महिलाएं बोलीं- पहले भी बाहरी लोगों ने माहौल खराब किया स्थानीय महिलाओं ने कहा- पहले भी बाहरी राज्यों के लोगों ने माहौल खराब किया और मस्जिद आने वाले स्थानीय लोगों के घरों में ताक-झांक करते थे। इससे कॉलोनी के लोग असुरक्षित महसूस कर रहे थे। इसी वजह से बीते साल संजौली मस्जिद को लेकर विवाद हुआ और देशभर में इसकी चर्चाएं रही।
निगम आयुक्त ने दिए पूरी मस्जिद तोड़ने के आदेश शिमला नगर निगम आयुक्त संजौली मस्जिद को अवैध करार दे चुके हैं। उन्होंने इसे तोड़ने के आदेश दे रखे है। उनके आदेशों पर ऊपर की दो मंजिल तोड़ी जा चुकी है। इस बीच वक्फ बोर्ड और मस्जिद कमेटी ने जिला अदालत में चुनौती दी। इससे निचली तीन मंजिल तोड़ने का काम रुक गया। बीते 30 अक्टूबर को जिला अदालत ने भी नगर निगम आयुक्त कोर्ट के फैसले को सही ठहराते हुए हटाने के आदेश दिए है।
