सहारनपुर से अरेस्ट डॉ. अदील के पास एक डायरी मिली है। इसमें करीब 25 लोगों के नंबर लिखे हुए हैं। बताया जा रहा है कि ये नंबर सहारनपुर और आसपास पढ़ने वाले कश्मीरी छात्रों के हैं। इन नंबरों की सुरक्षा एजेंसियां जांच कर रही हैं।
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डायरी में कुछ नंबरों के साथ कोडवर्ड और लोकेशन का भी जिक्र है। जांच अधिकारी मान रहे हैं कि लोकल में यह नेटवर्क डॉ. अदील ही हैंडल कर रहा था।
अदील के मदरसों, मेडिकल कॉलेज और दारुल उलूम में भी कश्मीरी छात्रों से संपर्क करने के इनपुट मिले हैं। डॉ. उमर, डॉ. मुजम्मिल, लेडी डाॅ. शाहीन ने सिग्नल ऐप पर एक ग्रुप बना रखा था। इस ग्रुप में ही पूरी जानकारी शेयर की जाती थी। ग्रुप पर ही विस्फोट के खरीदने, 20 लाख रुपए से कितने रुपए की कौन सी चीज आई है? कैसे प्लान को आगे बढ़ाना है? ये सब बातें होती थीं।
जांच में ये भी पता चला है कि डॉ. शाहीन 2 साल तक संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) में रह चुकी है। एजेंसियों को शक है कि वहां पर डॉ. शाहीन को जैश की महिला विंग विंग-जमात उल मोमिनात को तैयार करने की ट्रेनिंग दी गई। शाहीन ने साल 2016 से 2018 के बीच यूएई में रहकर नौकरी की थी।
दिल्ली ब्लास्ट से 2 महीने पहले लखनऊ आई थी। अयोध्या भी गई थी? डॉ. शाहीन पिछले 10 सालों कौन-कौन से शहरों में गई और किससे मिली, इसकी जांच की जा रही है।

ये तस्वीर उस समय की है जब जम्मू-कश्मीर की पुलिस ने सहारनपुर में उस अस्पताल में पड़ताल की, जहां डॉ. अदील नौकरी करता था। स्टाफ से पूछताछ की गई।
स्टूडेंट्स को स्लीपर सेल बना रहा था अदील, छात्राएं भी संपर्क में थीं सहारनपुर मंडल में पिछले 48 घंटों में एटीएस, IB और स्थानीय पुलिस ने कई जगह दबिश दी। मेडिकल कॉलेज, मदरसों और किराए के मकानों में रह रहे बाहरी छात्रों की जानकारी जुटाई जा रही है। उनकी कॉल डिटेल और सोशल मीडिया गतिविधियों की जांच भी की जा रही है।
डाॅ. अदील ने सहारनपुर के मेडिकल कॉलेज और दारुल उलूम में पढ़ने वाली कश्मीरी लड़कियों से भी संपर्क करने की कोशिश की थी। वह उन्हें हनीट्रैप, स्लीपर सेल के लिए तैयार कर रहा था। ऐसा सुरक्षा एजेंसियों को संदेह है। इसको लेकर जांच की जा रही है।
अस्पताल आने वाले मरीजों का भी अदील ब्रेनवॉश करता था। वह उन्हें फिदायनी हमले के लिए तैयार कर रहा था। ऐसे कौन-कौन से लोग हैं, इनके बारे में जांच की जा रही है।
देवबंद में पुलिस ने किराएदारों के सत्यापन के लिए सोमवार को अभियान चलाया। पुलिस ने 100 से अधिक मकानों में जाकर किराएदारों से पूछताछ की। उनके डॉक्यूमेंट्स देखे। उनसे पूछताछ की। उनके मोबाइल नंबर नोट किए। कौन कब आया, कितने दिन से रह रहा है? इस तरह के सवाल पूछे।

जम्मू-कश्मीर की पुलिस अपने साथ जरूरी दस्तावेज ले गई है।
कौन है डॉ. आदिल?
- डॉ. आदिल कश्मीर के कुलगाम जिले के वानपुरा का रहने वाला है। श्रीनगर मेडिकल कॉलेज से MBBS की पढ़ाई की। इसके बाद अनंतनाग के सरकारी मेडिकल कॉलेज (GMC) में रेजिडेंट डॉक्टर के तौर पर नौकरी करने लगा। हालांकि, उसने 2024 में अनंतनाग सरकारी अस्पताल से इस्तीफा दे दिया और सहारनपुर आ गया। तब से वह सहारनपुर के अलग-अलग अस्पतालों में लोगों का इलाज करता रहा।
- 2024 में उसने दिल्ली रोड स्थित आस्कर अस्पताल (वी-ब्रास) में एक साल तक काम किया। वहीं उसकी मुलाकात आस्कर अस्पताल में काम करने वाले डॉ. अंकुर चौधरी से हुई। बाद में डॉ. अंकुर ने डॉ. आदिल की मुलाकात फेमस मेडिकेयर अस्पताल के डायरेक्टर डॉ. मनोज मिश्रा से कराई। वहां उसकी सैलरी 5 लाख रुपए हर महीने तय हुई।
- आदिल सुबह से शाम 7 बजे तक अस्पताल में रहता था। 4 अक्टूबर को आदिल की शादी जम्मू-कश्मीर में हुई। उसने डॉ. बाबर, डॉ. असलम सैफी समेत चार मुस्लिम डॉक्टरों को शादी का कार्ड दिया, लेकिन अस्पताल के डायरेक्टर डॉ. मनोज मिश्रा को नहीं बुलाया।
- शादी के 27 दिन बाद, यानी 1 नवंबर को वह सहारनपुर लौटा। हनीमून पर जाने की तैयारी कर रहा था। 6 नवंबर को पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर लिया। पुलिस के अनुसार, डॉ. आदिल का भाई भी डॉक्टर है। उसकी पत्नी रुकैया सर्जन है।

यह डॉ. अदील की शादी की तस्वीर है। वह अपने साथियों और रिश्तेदारों के साथ दिख रहा है।
डॉ. आदिल जैश से कैसे जुड़ा, जानिए
डॉ. आदिल की श्रीनगर मेडिकल कॉलेज में पढ़ाई के दौरान मुलाकात शोपियां निवासी मौलवी इरफान अहमद से हुई। इरफान श्रीनगर के बाहरी इलाके छनपुरा स्थित मस्जिद अली नक्कीबाग का इमाम है। वह कश्मीर में आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद का ग्राउंड-लेवल पर सक्रिय सदस्य है, जो लोगों को संगठन से जोड़ने का काम करता है।
इरफान आतंकवादियों को हथियारों की सप्लाई करता है और कश्मीरी युवाओं को आतंकी प्रशिक्षण के लिए पाकिस्तान भेजने में मदद करता है। इसके अलावा वह पत्थरबाजी की घटनाओं को भी अंजाम दिलवाता है। इसी दौरान इरफान ने डॉ. आदिल की मुलाकात गांदरबल निवासी जमीर अहमद अहंगर नाम के युवक से कराई।
जमीर का काम नए युवाओं को ट्रेनिंग देना और उनका ब्रेनवॉश करना था। उसने डॉ. आदिल का भी ब्रेनवॉश किया और उसे जैश-ए-मोहम्मद से जोड़ दिया।

सहारनुपर में महिला मरीजों के बीच यह डॉ. अदील की तस्वीर है।
कैसे आदिल तक पहुंची पुलिस जानिए 17 अक्टूबर को मौलवी इरफान ने नौगाम इलाके में जैश-ए-मोहम्मद से जुड़े पोस्टर लगवाए। पोस्टर लगाने वालों में नौगाम के रहने वाले आरिफ निसार डार उर्फ साहिल, यासिर-उल-अशरफ और मकसूद अहमद डार शामिल थे। ये सभी CCTV कैमरे में कैद हो गए। 19 अक्टूबर को श्रीनगर पुलिस ने अज्ञात लोगों के खिलाफ केस दर्ज किया।
श्रीनगर के एसएसपी संदीप चक्रवर्ती की अगुआई में जम्मू-कश्मीर पुलिस ने आरोपियों को गिरफ्तार किया। पूछताछ में खुलासा हुआ कि पोस्टर मौलवी इरफान और डॉ. अदील के कहने पर लगाए गए थे। पुलिस ने मौलवी इरफान को पकड़ा। उससे मिले इनपुट के आधार पर जमीर अहमद अहंगर को भी गिरफ्तार किया गया। फिर पुलिस ने डॉ. आदिल की तलाश शुरू की।
पुलिस जब जमीर को लेकर डॉ. आदिल के घर पहुंची, तो पता चला कि 1 नवंबर को वह सहारनपुर आया है और यहां एक अस्पताल में नौकरी कर रहा है। 6 नवंबर को यूपी एटीएस की मदद से जम्मू-कश्मीर पुलिस ने डॉ. अदील को सहारनपुर से गिरफ्तार कर लिया।


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