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श्रीगंगानगर विधायक जयदीप बिहाणी ने कलेक्टर से विवाद के बाद इसे मान-सम्मान की लड़ाई बना दिया है। सोशल मीडिया पर एक यूजर ने लिखा कि वे जनता को भड़का रहे हैं। पोकरण में सीएनजी पंप पर टूरिस्ट और कर्मचारी के बीच तीखी बहस हो गई। बाड़मेर में डॉक्टर और अटेंडेंट के बीच पर्ची को लेकर हॉट-टॉक हो गई। बूंदी में इजराइली टूरिस्ट पेट्रोल पंप पर ही नाचने लगे। राजस्थान की राजनीति और ब्यूरोक्रेसी की ऐसी ही खरी-खरी बातें पढ़िए, आज के इस एपिसोड में…
1. ‘दिमाग में खुमारी का नशा सबसे बुरा ..’
‘घोड़े पालने से दिमाग ठंडा रहता है।’ यह महान संबोधन विधायक महोदय ने उस वक्त दिया था जब शहर में हॉर्स फेयर लगा था।
इसके कुछ दिन बाद शहर में यूनिटी मार्च का आयोजन हुआ। इस आयोजन में कलेक्टर साहिबा और एडीएम ने साहब का दिमाग गर्म कर दिया।
इतना गर्म कर दिया कि अब घोड़े भी दिमाग को ठंडा नहीं कर पा रहे हैं। महोदय ने कलेक्टर को प्रोटोकॉल की याद दिलाई। साथ ही याद दिलाया कि विधायक क्या होता है।
लेकिन इतने पर भी जब अधिकारियों को याद नहीं आया तो विधायकजी ने जनसभा बुला ली। सभा में उन्होंने संबोधित किया-
‘सबसे बुरा नशा दिमाग में खुमारी का नशा होता है। अगर यह नशा सिर चढ़ जाए तो लोग अपनी हैसियत भूल जाते हैं। अगर बात मान-सम्मान की आ जाए तो सारा शहर एक होकर मुट्ठी बन जाता है।’
महोदय ने हॉर्स फेयर में नशामुक्ति का उपाय भी घोड़ा-पालन बताया था। लगता है घोड़े फ्रेम से ही बाहर हो गए हैं। अब सिर्फ मान-सम्मान रह गया है।
विधायकजी का भाषण सोशल मीडिया पर पहुंचा तो एक यूजर ने लिखा- विधायकजी जनता को भड़का रहे हैं।

श्रीगंगानगर विधायक जयदीप बिहाणी ने कलेक्टर से विवाद के बाद बिहाणी ऑडिटोरियम में लोगों को संबोधित किया। उन्होंने प्रशासनिक अधिकारियों पर निशाना साधा।
2. पोकरण में ‘एक अनार सौ बीमार’
‘सफर में मुश्किलें तो होंगी..।’ गुजरात से जैसलमेर जाने वाले पर्यटकों को पोकरण पहुंचकर इस ‘उक्ति’ पर विश्वास होने लगा है।
जोधपुर से जैसलमेर की दूरी 273 किलोमीटर है। इस दूरी पर CNG फिलिंग स्टेशन सिर्फ एक है- पोकरण में।
दीपावली के बाद गुजराती नए साल से टूरिस्ट सीजन में बड़ी तादाद में पर्यटक जैसलमेर आते हैं।
ऐसे में CNG पंप पर गाड़ियों की कतारें लग जाती हैं। CNG की किल्लत हो जाती है। दो-दो घंटे में नंबर आता है।
बहस का मुद्दा यहीं से शुरू होता है। इसी CNG स्टेशन के कई वीडियो सोशल मीडिया पर घूम रहे हैं। ताजा वीडियो गुजराती टूरिस्ट और कर्मचारी की बहस का है।
यह बहस गाड़ियों की लंबी कतार, फिलिंग में देरी और घंटों इंतजार के बाद शुरू हुई थी।
बहस का पीक ‘एक दूसरे से पूछा गया सवाल’ है। टूरिस्ट पूछता है- तू कौन है? जवाब में कर्मचारी दोगुने उत्साह से पूछता है- तू कौन है?
इस स्टेशन पर कुछ ही दिन पहले इसी तरह की बहस के दौरान पंप संचालक ने बंदूक निकाल ली थी।
एक समझदार टूरिस्ट का भी वीडियो उपलब्ध है जो यह बता रहा है कि पोकरण में ‘एक अनार सौ बीमार’ हैं। आने से पहले ध्यान रखना कि जोधपुर-जैसलमेर के बीच CNG पंप एक ही है।

जैसलमेर के पोकरण में सीएनजी पंप पर गुजरात के टूरिस्ट (चश्मे वाला) और कर्मचारी के बीच तीखी बहस का वीडियो सामने आया।
3. ‘आदमी मर जाएगा तो पर्ची का क्या करोगे..’
एक यक्ष प्रश्न है- सेवा ज्यादा जरूरी है या प्रक्रिया?
सरकारी सिस्टम में शामिल लोग जानते हैं कि सेवा के लिए प्रक्रिया को ओवरलैप नहीं किया जा सकता।
यही कारण है कि तमाम सरकारी कार्यालयों में आम आदमी ‘प्रक्रियाधीन’ रह जाता है और सेवा कोसों दूर।
मामला बाड़मेर के जिला हॉस्पिटल का है। सरकारी अस्पतालों में सेवा ‘पर्ची कटाओ-बाद में आओ’ के उसूल के बाद हासिल होती है।
एक सज्जन अपनी श्रीमती को हॉस्पिटल लेकर गए। डॉक्टर को चेक करने के लिए कहा तो अभ्यास के कारण डॉक्टर ने कहा- पर्ची लाओ।
सज्जन अचानक इस तरह भड़क उठे जैसे पर्ची नहीं आबे जम-जम लाने को कह दिया हो। वे डॉक्टर पर झपट पड़े।
डायलॉग मार डाला- आदमी मर जाएगा तो क्या करोगे पर्ची का।
डॉक्टर साहब चाहते तो कह सकते थे कि तब पर्ची को पोस्टमॉर्टम की फाइल के साथ अटैच कर दिया जाएगा। लेकिन वे चुप रहे।
हालांकि मुन्नाभाई ने भी डीन से पूछा था- मामू, कोई मरने की हालत में रहे, तो फॉर्म भरना जरूरी है क्या? जवाब मुन्नाभाई को भी नहीं मिला था।

बाड़मेर के जिला अस्पताल में राम खत्री नाम का अटेंडेंड रेजिडेंड डॉक्टर रजत पर झपट पड़ा।
4. चलते-चलते…
यूं तो यातायात नियमों के अनुसार ट्रैक्टर आदि वाहन पर तेज आवाज में साउंड या गीत बजाता गलत है। साउंड सिस्टम या फिर वाहन को जब्त भी किया जा सकता है।
लेकिन इजराइल वालों को इस नियम के बारे में जानकारी नहीं है। इजराइल के पर्यटकों का दल बूंदी शहर घूमने निकला। उनकी गाड़ी एक पेट्रोल पंप पर रुकी।
इसी पेट्रोल पंप पर एक किसान ट्रैक्टर लेकर पेट्रोल भराने पहुंचा। ट्रैक्टर से जुड़े संगीत सिस्टम में बॉलीवुड का गीत ‘चुनरी-चुनरी’ बज रहा था।
हालांकि इजराइल में चुनरी का कोई सांस्कृतिक, सामरिक या राजनीतिक महत्व नहीं है। फिर भी उन्हें यह संगीत इतना भाया कि दल की महिलाओं ने पेट्रोल पंप को ही डांस फ्लोर बना दिया।
झूम-झूम कर खूब नाची। देर तक नाचती रही। बाकी साथी वीडियो बनाकर आनंद लेते रहे। वे अपनी जगह खड़े-खड़े नाचते रहे।
खेती किसानी की आधुनिक तकनीक सिखाने वाले इजराइल के लोगों ने किसी भी अवसर पर खुशी ढूंढ लेना भी सिखा दिया।

बूंदी में एक पेट्रोल पंप पर डांस करते इजराइली पर्यटक दल की महिलाएं।
वीडियो देखने के लिए ऊपर फोटो पर क्लिक करें। अब कल मुलाकात होगी…