Pakistani scientist Qadeer Khan ran a nuclear smuggling network | पाकिस्तानी परमाणु हथियारों की तस्करी कर रहे थे अब्दुल कादिर: मुशर्रफ को पता चला तो बोले- मार डालूंगा; अमेरिकी खुफिया एजेंसी के अफसर का खुलासा

Actionpunjab
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वॉशिंगटन डीसी2 घंटे पहले

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पाकिस्तानी साइंटिस्ट डॉ. अब्दुल कादिर खान को पाकिस्तान के न्यूक्लियर प्रोग्राम का जनक माना जाता है। - Dainik Bhaskar

पाकिस्तानी साइंटिस्ट डॉ. अब्दुल कादिर खान को पाकिस्तान के न्यूक्लियर प्रोग्राम का जनक माना जाता है।

अमेरिका की खुफिया एजेंसी CIA के पूर्व वरिष्ठ अधिकारी जेम्स लॉलर ने पाकिस्तानी साइंटिस्ट डॉ. अब्दुल कादिर खान के न्यूक्लियर स्मगलिंग नेटवर्क को लेकर कई खुलासे किए हैं।

ANI से बात करते हुए लॉलर ने बताया कि शुरू में अमेरिका को लगा था कि कादिर खान सिर्फ पाकिस्तान के लिए परमाणु ब्लूप्रिंट बना रहा है। लेकिन बाद में पता चला कि वह लीबिया, ईरान जैसे कई देशों को परमाणु तकनीक और हथियार बनाने का सामान अवैध तरीके से बेच रहा था।

लॉलर ने कहा, ‘हम बहुत देर से जागे। हमें अंदाजा ही नहीं था कि वह इतना बड़ा तस्कर बन जाएगा।’ सरकार के मिलीभगत पर लॉलर ने कहा कि खान कुछ पाकिस्तानी जनरलों और नेताओं को रिश्वत देते थे।

लॉलर ने बताया कि CIA चीफ जॉर्ज टेनेट ने पाकिस्तान के पूर्व राष्ट्रपति परवेज मुशर्रफ को तस्करी की जानकारी दी। मुशर्रफ ये बात सुनते ही गुस्सा हो गए और खान को गाली देते हुए जान से मार डालने की बात कही।

CIA अधिकारी जेम्स लॉलर कादिर खान को ‘मौत का सौदागर’ बुलाते थे।

CIA अधिकारी जेम्स लॉलर कादिर खान को ‘मौत का सौदागर’ बुलाते थे।

कादिर खान को पाकिस्तान में न्यूक्लियर प्रोग्राम का जनक माना जाता है। वहीं, जेम्स लॉलर को कादिर खान के परमाणु तस्करी नेटवर्क को खत्म करने का श्रेय दिया जाता है। लॉलर ने बताया कि उन्होंने कादिर खान को ‘मौत का सौदागर’ नाम दिया था।

दुनियाभर में फैला था कादिर खान का स्मगलिंग नेटवर्क

कादिर खान का नेटवर्क इतना बड़ा था कि पूरी दुनिया में परमाणु बम बनाने की मशीनें, ब्लू-प्रिंट, सेंट्रीफ्यूज और यूरेनियम समृद्ध करने की तकनीक अवैध तरीके से सप्लाई कर रहा था।

अमेरिकी खुफिया एजेंसी CIA के पूर्व अधिकारी जेम्स लॉलर ने बताया कि कादिर खान ने अकेले अपने दम पर दुनिया का सबसे खतरनाक परमाणु ब्लैक मार्केट चलाया।

शुरू में CIA को लगा कि खान सिर्फ पाकिस्तान के लिए सामान चुरा रहा है, लेकिन 1990 के दशक में पता चला कि अब परमाणु हथियार बेच भी रहा है।

लॉलर बोले- नकली कंपनी बना, स्मगलिंग नेटवर्क की जानकारी जुटाई

जेम्स लॉलर की टीम को खान के नेटवर्क में घुसने का काम सौंपा गया। टीम ने स्विट्जरलैंड, जर्मनी, दुबई और मलेशिया में फर्जी कंपनियां बनाईं जो बाहर से बिल्कुल असली लगती थीं। ये कंपनियां परमाणु डिवाइस बेचने का काम करने लगी।

खान के लोग इस कंपनी को असली समझकर ऑर्डर करने आने लगे। इस तरह CIA ने खान के पूरे नेटवर्क के बारे में जानकारी जुटाना शुरू कर दिया।

लॉलर ने कहा, “अगर हमें तस्करों को हराना था, तो हमें खुद तस्कर बनना पड़ा। इन फर्जी कंपनियों से खराब वाले पार्ट्स भेजे जाते थे। ईरान और लीबिया जैसे देशों के सेंट्रिफ्यूज बार-बार खराब होते रहे।

लॉलर ने हंसते हुए कहा, “डॉक्टर शपथ लेते हैं कि मरीज को कभी नुकसान नहीं पहुंचाएंगे, हमने उल्टी शपथ ली – हमेशा नुकसान ही पहुंचाओ।”

पूर्व पाकिस्तानी प्रधानमंत्री इमरान खान (दाएं) और कादिर खान (फाइल फोटो)।

पूर्व पाकिस्तानी प्रधानमंत्री इमरान खान (दाएं) और कादिर खान (फाइल फोटो)।

2003 में पकड़े जाने पर लीबिया ने न्यूक्लियर प्रोग्राम बंद कर दिया था

अक्टूबर 2003 में CIA को खबर मिली कि मलेशिया से एक जर्मन जहाज BBC China लीबिया जा रहा है। उसमें लाखों की संख्या में सेंट्रिफ्यूज के पुर्जे लोड थे, जो खान के नेटवर्क ने भेजे थे।

अमेरिका ने इटली के पास समंदर में जहाज को रोक लिया, सारे कंटेनर खोलकर चेक किए और फिर उन्हें ट्रकों में भरकर सीधे लीबिया के तानाशाह मुअम्मर गद्दाफी के सामने रख दिया।

लॉलर ने बताया कि उस वक्त कमरे में इतना सन्नाटा था कि सुई गिरने की आवाज सुनाई दे सकती थी। इसके कुछ ही महीनों बाद लीबिया ने अपना पूरा परमाणु कार्यक्रम हमेशा के लिए बंद कर दिया और सारे सेंट्रिफ्यूज, डिजाइन, सब कुछ अमेरिका के हवाले कर दिया।

लॉलर ने कहा, “उस दिन मैं उन कंटेनरों के खाली होने के बाद खुशी से नाच रहा था।”

लॉलर बोले- पाकिस्तानी जनरलों को रिश्वत देता था कादिर खान

लॉलर ने यह भी साफ किया कि कादिर खान ने कुछ पाकिस्तानी जनरलों और नेताओं को मोटी रिश्वत दी थी, इसलिए उन्हें संरक्षण मिलता रहा।

साथ ही उन्होंने बताया कि 1980 के दशक में अफगानिस्तान में सोवियत संघ से लड़ने के लिए अमेरिका को पाकिस्तान की बहुत जरूरत थी, इसलिए उसने जान-बूझकर खान के काम को नजरअंदाज किया।

लॉलर बोले- यह एक बहुत बड़ी गलती थी, जिसके नतीजे आज तक भुगते जा रहे हैं।

अमेरिका की खुफिया एजेंसी CIA के पूर्व वरिष्ठ अधिकारी जेम्स लॉलर न्यूज एजेंसी ANI से बात करते हुए।

अमेरिका की खुफिया एजेंसी CIA के पूर्व वरिष्ठ अधिकारी जेम्स लॉलर न्यूज एजेंसी ANI से बात करते हुए।

ईरान को परमाणु बम तकनीक दी थी, आज भी वहीं मॉडल इस्तेमाल करता

लॉलर ने आगे बताया कि कादिर खान ने ईरान को जो सेंट्रिफ्यूज डिजाइन दी थी, आज भी ईरान उसी P-1 और P-2 मॉडल का इस्तेमाल करता है।

लॉलर ने चेतावनी दी, “खान ने ईरान को परमाणु बम की A से Z तक सारी तकनीक दे दी थी। अगर ईरान परमाणु बम बना लेता है, तो सऊदी अरब, तुर्किये, मिस्र सब अपने बम बनाएंगे। पूरा मध्य पूर्व परमाणु बमों से भर जाएगा। यह परमाणु महामारी की तरह फैलेगा।”

उन्होंने भारत-अमेरिका के बीच गहरे सहयोग की जरूरत पर जोर दिया और कहा कि दक्षिण एशिया में अगर परमाणु जंग हुई तो सिर्फ हारने वाले होंगे, कोई जीतने वाला नहीं।

लॉलर बोले- भारत-अमेरिका को परमाणु तस्करी के खिलाफ लड़ना चाहिए

लॉलर ने कहा, ‘पहले भारत और अमेरिका के हित एक हैं। भारत और अमेरिका को परमाणु तस्करी और आतंकवाद के खिलाफ मिलकर बहुत मजबूती से लड़ना चाहिए।’

जेम्स लॉलर 1980 से 2005 तक CIA में रहे। अब वे अपनी कहानियों पर जासूसी उपन्यास लिखते हैं। सारे उपन्यास CIA की सेंसरशिप से पास होकर ही छपते हैं।

उन्होंने अंत में कहा कि परमाणु हथियारों को पूरी तरह खत्म नहीं किया जा सकता, लेकिन तस्करी रोकना और नए देशों को बम बनने से रोकना – यह आज भी सबसे जरूरी काम है।

मैड डॉग निकनेम से जाने जाते लॉलर

लॉलर को “मैड डॉग” (पागल कुत्ता) के निकनेम से जाना जाता है। उन्होंने बताया कि इसके पीछे भी एक मजेदार किस्सा था। फ्रांस में पोस्टिंग के दौरान एक रेबीज वाला जर्मन शेफर्ड कुत्ता उन पर टूट पड़ा था।

लॉलर ने मजाक में कहा था, “अगर मुझे रेबीज हुआ तो मैंने लिस्ट तैयार कर ली है कि किन-किन लोगों को काटूंगा!” तभी से सारे साथी उन्हें “मैड डॉग” बुलाने लगे, और आज भी बुलाते हैं।

मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में जन्मे थे

कादिर खान का जन्म 1 अप्रैल 1936 को मध्य प्रदेश के भोपाल में हुआ था। बंटवारे के समय उनका परिवार पाकिस्तान चला गया।

डॉ कादिर खान पाकिस्तान के पहले नागरिक थे, जिन्हें तीन प्रेसिडेंशियल अवॉर्ड दिए गए। उन्हें दो बार निशान-ए-इम्तियाज और एक बार हिलाल-ए-इम्तियाज से सम्मानित किया गया था।

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