जयपुर की शादी समारोह में शामिल हुए थे धर्मेंद्र।
दिग्गज एक्टर धर्मेंद्र का निधन हो गया है। राजस्थान से भी उनकी यादों के कई किस्से जुड़ें हैं। उन्होंने राजस्थान के बीकानेर से चुनाव लड़ा था। उनका क्रेज इतना था कि वे लोगों की समस्याएं दूर करने निकलते थे, लेकिन लोग फोटो खिंचवाने और ऑटोग्राफ लेने में बि
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जयपुर में फिल्मों के बड़े वितरक राज बंसल, प्रोड्यूसर कमल मुकुट और समाजसेवी विजय पूनिया ने दैनिक भास्कर से बात की। धर्मेंद्र के साथ बिताए दशकों पुराने रिश्तों और जनसेवा के अनुभवों को साझा किया। आगे पढ़िए धर्मेंद्र से जुड़े किस्से…

रामबाग में सुनी थी घायल की कहानी
फिल्म डिस्ट्रीब्यूटर राज बंसल ने बताया कि धर्मेंद्र से मेरी पहली मुलाकात जोधपुर में हुई थी। 1985 में वे उस वक्त मैं बलवान की शूटिंग कर रहे थे। उस वक्त फिल्म के प्रोड्यूसर प्राण लाल मेहता से मिलने गए थे। वहीं, धर्मेन्द्र से मुलाकात हुई। उस वक्त मैं उनके साथ पांच-छह दिन रहा। वही मुलाकात हमारे दोनों का जुड़ाव बनीं। उसके बाद जब भी वे जयपुर आते तो होटल में बुलाकर मिलते थे। मैं मुम्बई जाता था तो उनके बंगले और ऑफिस में मुलाकात होती थी।
राज बंसल ने बताया- वे हमेशा कहते थे कि तुम दुनिया की फिल्में रिलीज करते हो, मेरी फिल्में रिलीज नहीं करते हो। तब मैंने कहा था कि आप जब अपनी फिल्म बनाओगे तब रिलीज करेंगे। उसी वक्त उन्होंने अपनी एक पुरानी फिल्म प्रतिज्ञान के राजस्थान राइट्स दिए। फिर एक बार वे जेपी दत्ता की फिल्म बंटवारा की शूटिंग के लिए जयपुर के रामबाग पैलेस में रुके हुए थे। तब उन्होंने मुझे भी बुलाया था। मेरे सामने राजकुमार संतोषी को भी बुलाया। राजकुमार संतोषी ने उन्हें घायल की स्टोरी सुनाई थी। तब यह फिल्म सनी देओल के लिए फाइनल हुई थी। राजकुमार के सामने ही धर्मेंद्र ने मुझे कहा था कि घायल के ऑफिशियल डिस्ट्रीब्यूटर तुम हो। राजस्थान में मेरी फिल्म तुम ही रिलीज करोगे।
राजकुमार संतोषी ने जब मेरी और धर्मेंद्र के रिश्ते को सामने से देखा तो उन्होंने भी अपनी फिल्मों का डिस्ट्रीब्यूशन मुझसे ही करवाया। धर्मेंद्र के विजेता फिल्म की अधिकांश फिल्मों को राजस्थान में मैंने ही रिलीज किया है।

राज बंसल के परिवार के साथ धर्मेंद्र।
राजनीति में काम करने आए थे, लोग फोटो और ऑटोग्राफ में बिजी कर देते थे
फिल्म प्रोड्यूसर और डिस्ट्रीब्यूटर कमल मुकुट ने बताया- मेरी धर्मेंद्र से 54 साल पुरानी दोस्ती रही है। पहली बार में फिल्म राजा जानी के सेट पर मिला था। इससे पहले मैं गोरा काला का लाइन प्रोड्यूसर रह चुका था। हमारा पारिवारिक रिश्ता रहा है, वे मेरे कई बिजनेस में पार्टनर भी रहे हैं। जयपुर से उनका अपना अलग रिश्ता रहा है। जयपुर के अंबर सिनेमा में पार्टनर भी रहे हैं। कई साल तक वे इसमें पार्टनर रहे। बाद में अलग हो गए थे। वे मुझे छोटे भाई की तरह प्यार देते थे।
कमल मुकुट ने बताया- जब उन्होंने बीकानेर का इलेक्शन लड़ा तो मैं उनके साथ रहा। वे जीतने के बाद जब भी आते थे, लोगों से स्नेह पूर्ण तरीके से मिलते थे। वे सेवा करने के मकसद से राजनीति में आए थे। वे लोगों की समस्याओं को दूर करने निकलते और लोग फोटो खिंचवाने, ऑटोग्राफ लेने में ही बिजी कर देते। आज भी बीकानेर के हजारों लोगों के घरों में उनके साथ फोटो मिल जाएगी। वे हमेशा कहते थे कि मैं सेवा करने आया हूं, लेकिन लोग मुझे फोटो और ऑटोग्राफ में ही बिजी कर देते हैं। ऐसे में वे धीरे-धीरे राजनीति से ही दूर हो गए।

फिल्म प्रोड्यूसर और डिस्ट्रीब्यूटर कमल मुकुट के साथ धर्मेंद्र।
राजस्थान यूनिवर्सिटी की फीस कम करवा दी थी
कमल मुकुट ने बताया- एक किस्सा मैं कभी नहीं भूल सकता हूं। वे एक बार जयपुर में आए थे, तब राजस्थान यूनिवर्सिटी में फीस बढ़ा दी गई थी। तब बच्चों ने अपनी समस्या धर्मेंद्र को बताई और बच्चे आंदोलन करने पर आतुर थे। धर्मेंद्र ने बच्चोंं को आंदोलन करने रोका और तत्कालीन राज्यपाल प्रतिभा पाटिल से बात कर फीस कम करने का आग्रह किया। इसके बाद बच्चों की फीस कम हो गई थी।

समाजसेवी विजय पूनिया के साथ धर्मेंद्र।
पांच हजार खून की बोतल डोनेट हुई
समाजसेवी विजय पूनिया ने बताया कि एक बार मुझे थैलेसिमिया बच्चों को खून की कमी होने की बात बताई गई। मैंने धर्मेंद्र से बात कर राजस्थान में एक दिन में ब्लड डोनेशन कैम्प लगवाने की बात की। उनकी सहमति के बाद पूरे प्रदेश से पांच हजार बोतल खून एकत्रित किया गया। यह कैम्प हमने धर्मेंद्र देओल और भगवान सिंहजी को समर्पित किया था। उनके नाम पर ही यह पुण्य काम हो सका।
विजय पूनिया ने कहा- धर्मेंद्र मेरे कहने पर बहुत बार जयपुर आए। वे स्टूडेंट इलेक्शन जीतने वाले महेन्द्र चौधरी के फंक्शन में आए। मेरे बुलावे पर सभी जाट छात्रावास के कार्यक्रमों में शिरकत की। मेरी बेटियों की शादी में आए। हमारा पारिवारिक रिश्ता था। धर्मेंद्र अब हमारे साथ नहीं है, लेकिन सनी के साथ हम खड़े हुए हैं।

जयपुर में जाट छात्रावास के कार्यक्रम में पहुंचे थे धर्मेंद्र।
राजनीति में आने के लिए मनाया
विजय पूनिया ने दावा किया कि धर्मेन्द्र कभी राजनीति में नहीं आना चाहते थे, मेरे मनाने पर वे राजनीति में आए और राजस्थान में चुनाव लड़ा। पूनिया ने बताया- वसुंधरा राजे चाहती थीं कि धर्मेंद्र बीकानेर से चुनाव लड़े, क्योंकि यह सीट बीजेपी के लिए चुनौती की तरह थी। मैंने जब धर्मेंद्र से चुनाव के लिए बात की तो उन्होंने दो बार तो मना कर दिया था। फिर मैंने इतनी रिक्वेस्ट की तो वे माने और राजस्थान से चुनाव लड़ने का मन बनाया। वे हमेशा कहते थे कि मैं इसमें फिट नहीं हूं, लेकिन तू राजनीति में लाया है। आज मैं सिर्फ इतना कह सकता हूं कि मैं उनके परिवार के साथ खड़ा हूं। वे मुझे छोटे भाई की तरह प्यार देते थे। यह प्यार सनी के लिए बरकरार रहेगा।
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दिग्गज अभिनेता धर्मेंद्र का निधन हो गया। 89 साल के एक्टर ने सोमवार को घर पर ही अंतिम सांस ली। धर्मेंद्र 14वीं लोकसभा में साल 2004 से 2009 तक बीकानेर से सांसद रहे थे। सांसद रहते हुए वे काफी विवादों में रहे थे। (पूरी खबर पढ़ें)