Geeta Jayanti on 1st December, significance of gita jayanti in hindi, Mokshda ekadashi puja vidhi in hindi | 1 दिसंबर को गीता जयंती: मोक्षदा एकादशी पर भगवान विष्णु का पूजन और गीता का करें पाठ, जानिए व्रत से जुड़ी मान्यताएं

Actionpunjab
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23 घंटे पहले

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सोमवार, 1 दिसंबर को मार्गशीर्ष शुक्ल एकादशी है, इसे मोक्षदा एकादशी कहते हैं। मान्यता है कि द्वापर युग में इसी तिथि पर भगवान श्रीकृष्ण ने अर्जुन को गीता का उपदेश दिया था। इस दिन भगवान विष्णु के लिए व्रत-उपवास, पूजा और गीता का पाठ करने की परंपरा है।

उज्जैन के ज्योतिषाचार्य पं. मनीष शर्मा के मुताबिक, गीता का जन्म स्वयं श्रीभगवान के मुख से हुआ है, इसी वजह से इस ग्रंथ का महत्व काफी अधिक है और इसी कारण गीता की जयंती भी मनाई जाती है। मोक्षदा एकादशी का शाब्दिक अर्थ है मोक्ष प्रदान करने वाली एकादशी। इस दिन किए गए व्रत से भक्त को भगवान विष्णु की कृपा मिलती है और उसे मोक्ष की प्राप्ति होती है। मोक्ष यानी मृत्यु के बाद आत्मा को फिर से जन्म नहीं होता है, आत्मा भगवान में विलीन हो जाती है।

मान्यता है कि मोक्षदा एकादशी व्रत से जाने-अनजाने में किए गए सभी पापों का नाश होता है। ये व्रत घर-परिवार के पितर देवताओं को भी मोक्ष देने वाला माना जाता है। इस दिन व्रत करके इसका पुण्य पितरों को अर्पित करने से उन्हें नरक से मुक्ति मिल सकती है। इस तिथि पर गीता का पाठ और श्रवण करने से ज्ञान, शांति और मार्गदर्शन मिलता है।

ऐसे कर सकते हैं भगवान विष्णु की पूजा

  • मोक्षदा एकादशी पर भगवान विष्णु, श्रीकृष्ण और श्रीमद्भगवद्गीता का पूजन करने का विधान है। इस दिन ब्रह्म मुहूर्त (सूर्य उदय से पहले) में उठकर स्नान करना चाहिए।
  • स्नान के बाद उगते सूर्य को जल चढ़ाएं। घर के मंदिर में बैठकर हाथ में जल और फूल लेकर व्रत-पूजन करने का संकल्प लें।
  • एक चौकी पर पीला-लाल वस्त्र बिछाकर भगवान विष्णु और महालक्ष्मी की मूर्ति या तस्वीर स्थापित करें। आप चाहें तो इनके साथ ही श्रीकृष्ण की मूर्ति और श्रीमद्भगवद्गीता भी रख सकते हैं।
  • भगवान की प्रतिमाओं का जल-दूध, पंचामृत से अभिषेक करें। तस्वीर हो तो भगवान को थोड़ा सा जल-दूध चढ़ाएं। जल-दूध चढ़ाने के बाद चंदन से तिलक लगाएं। गीता जी को भी तिलक लगाएं।
  • पीले फूल, माला और तुलसी दल अर्पित करें। घी का दीपक जलाएं और धूप करें। फल, मिठाई, पंचामृत (दूध, दही, घी, शहद और मिश्री) और तुलसी के साथ भगवान को चढ़ाएं।
  • पूजा में ऊँ नमो भगवते वासुदेवाय, कृं कृष्णाय नम: मंत्र का जप करें। धूप-दीप जलाकर आरती करें।
  • जो भक्त एकादशी व्रत कर रहे हैं, उन्हें पूजा के बाद दिनभर निराहार रहना चाहिए। जो भक्त भूखे नहीं रह पाते हैं, उन्हें एक समय फलाहार करना चाहिए। दूध और फलों के रस का सेवन कर सकते हैं।

पूजा-पाठ, व्रत-उपवास के साथ करें गीता का पाठ

इस तिथि पर श्रीमद्भगवद्गीता का पाठ करने का विशेष महत्व है। इस दिन अपने समय के अनुसार गीता के कुछ अध्यायों का या कुछ प्रसंगों का पाठ कर सकते हैं। भगवान श्रीकृष्ण की छोटी-छोटी कथाएं पढ़-सुन सकते हैं। कथाओं की सीख को जीवन में उतारने का संकल्प लेना चाहिए।

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