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नई दिल्ली21 मिनट पहले
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वॉट्सएप का वेब वर्जन अभी कई दिन तक लॉगइन रहता था, अब ऐसा नहीं हो सकेगा- फोटो AI जनरेटेड है।
केंद्र सरकार ने शनिवार को मैसेजिंग प्लेटफॉर्म्स को लेकर नया आदेश जारी किया है। वॉट्सएप, टेलीग्राम, सिग्नल, स्नैपचैट, शेयरचैट, जियोचैट, अराटाई और जोश जैसे मैसेजिंग प्लेटफॉर्म्स मोबाइल में एक्टिव सिम कार्ड के बिना नहीं चल पाएंगे। सरकार का दावा है कि इससे साइबर धोखेबाजों का पता लगाने में मदद मिलेगी।
दूरसंचार विभाग के आदेश में कहा गया है कि मैसेजिंग प्लेटफॉर्म्स यह सुनिश्चित करें कि एप तभी चलेगा, जब यूजर की रजिस्टर्ड सिम उस मोबाइल में एक्टिव होगी। इतना ही नहीं ‘सिम बाइंडिंग’ के तहत अगर मोबाइल से सिम निकाल ली जाती है तो वॉट्सएप और बाकी दूसरे मैसेजिंग एप बंद हो जाएंगे।
वेब ब्राउजर के जरिए लॉगइन करने वाले यूजर के लिए भी बड़ा बदलाव किया गया है। अब मैसेजिंग प्लेटफॉर्म को हर छह घंटे में यूजर को लॉगआउट करना होगा। इसके बाद क्यूआर कोड के जरिए ही लॉगइन हो सकेगा।
फीचर से बढ़ रहा साइबर फ्रॉड, इसलिए सख्ती की
कई सर्विस प्रोवाइडर यूजर के मोबाइल नंबर को केवल एक बार (इंस्टॉलेशन के समय) वैरिफाई करती हैं। इसके बाद सिम कार्ड हटा देने पर भी मैसेजिंग एप काम करता रहता है। यह फीचर टेलीकॉम साइबर सिक्योरिटी के लिए चुनौती बन रहा है क्योंकि देश के बाहर से साइबर-फ्रॉड करने के लिए इसका गलत इस्तेमाल किया जा रहा है।
केंद्र के नए निर्देश का मतलब है कि ये मैसेजिंग सर्विस तभी काम करेंगी जब यूजर के फोन में SIM मौजूद और एक्टिव होगी। विभाग ने कहा है कि यह आदेश तत्काल प्रभाव से लागू कर दिया गया है।
सभी ओवर-द-टॉप (ओटीटी) संचार प्लेटफॉर्म को 90 दिन में सिम-टू-डिवाइस बाइंडिंग नियम मानना होगा। 120 दिनों के भीतर इसकी रिपोर्ट देनी होगी।
नियमों का पालन न करने पर टेलीकम्युनिकेशन एक्ट 2023, टेलीकॉम साइबर सिक्योरिटी रूल्स और दूसरे लागू कानूनों के तहत कार्रवाई की जाएगी।
SIM-बाइंडिंग नियम क्या है
सिम बाइंडिंग का मतलब है कि सिम एक फोन से बाइंड यानी जुड़ जाती है। फोन बदलते ही सिस्टम पहचान लेता है कि यह नया डिवाइस है। सिम बाइंडिंग नियम के मुताबिक सिम कार्ड सिर्फ उसी फोन में पूरी तरह काम करेगा, जिसमें उसे पहली बार इस्तेमाल किया गया था।
अगर सिम को निकालकर दूसरे फोन में डाला जाता है, तो कुछ सर्विस अपने-आप बंद हो जाएंगी। इन सर्विस में UPI, बैंकिंग ऐप, मोबाइल वॉलेट, KYC, OTP बेस्ड लॉगिन शामिल हैं।
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