BKU Chief Gurnam Singh Chadhuni Accuses Government Over Delay in Sugar Mills, Raises Paddy Scam Issue in Gohana | सोनीपत के गोहाना पहुंचे भाकियू अध्यक्ष गुरनाम चढूनी: शुगर मिलों के देरी से शुरू होने पर उठाए सवाल; बोले-सरकार की मनमर्जी – Gohana News

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गोहाना में भाकियू अध्यक्ष गुरनाम सिंह चढूनी व अन्य।

सोनीपत जिले के गोहाना में भारतीय किसान यूनियन (चढूनी) के अध्यक्ष गुरनाम सिंह चढूनी ने शुगर मिलों के देरी से शुरू होने पर सरकार और प्रशासन पर तीखे सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि कोऑपरेटिव मिलों को जानबूझकर देर से शुरू किया जा रहा है ताकि प्राइवेट म

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चढूनी ने चेतावनी भरे लहजे में कहा कि अगर प्रशासन ने कार्रवाई नहीं की, तो किसान अपनी गन्ने से भरी ट्रालियां मिल पर लेकर पहुंचेंगे।

मिल किसानों की, मर्जी सरकार की

गोहाना में पहुंचे BKU अध्यक्ष गुरनाम सिंह चढूनी ने कहा कि यह किसानों की बदकिस्मती है कि मिल तो किसानों की है, लेकिन मर्जी सरकार और प्रशासन की चल रही है। उन्होंने कहा कि सभी शुगर मिल शुरू हो चुकी हैं, लेकिन कोऑपरेटिव मिलों को जानबूझकर देर से चालू किया जाता है। चढूनी ने आरोप लगाया कि प्राइवेट मिलों को फायदा पहुंचाने के लिए कोऑपरेटिव मिलों को लेट किया जाता है।

एक सप्ताह पहले शुगर मिल शुरू हो जानी चाहिए थी।

गुरनाम सिंह चढूनी का स्वागत करते भाकियू सदस्य।

गुरनाम सिंह चढूनी का स्वागत करते भाकियू सदस्य।

फसलों की बिजाई हो रही लेट

गुरनाम सिंह ने कहा कि गन्ने की छिलाई के दौरान सैकड़ों एकड़ जमीन खाली हो जाती है। समय पर छिलाई हो तो किसान गेहूं की बिजाई कर लेते हैं, लेकिन जब छिलाई और मिल चलाना लेट होता है, तो बिजाई भी लेट होती है और किसान को भारी नुकसान झेलना पड़ता है। उन्होंने कहा कि शुगर मिल को एक सप्ताह पहले ही शुरू हो जाना चाहिए था।

प्रशासन को चेतावनी- गन्ना ले लो या फिर डंडा ले लो

गुरनाम सिंह ने कहा कि प्रशासन को शुगर मिल तुरंत चालू करवानी चाहिए। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि हमारी टीम पूरी तरह अलर्ट है या तो गन्ना ले लो या फिर डंडा ले लो। उन्होंने चेतावनी दी, कि किसान कल अपने खेतों से गन्ना लेकर ट्रालियों सहित शुगर मिल पर पहुंचेंगे। उन्होंने कहा “या तो शुगर मिल चला लो, या फिर कहीं रखो, यह प्रशासन को देखना है। अगर प्रशासन को लफडा करवाना है, तो उसके लिए भी तैयार हैं।”

निचले स्तर से बड़े अधिकारियों तक शामिल

गुरनाम सिंह चढूनी ने धान घोटाले पर भी सरकार पर जमकर हमला बोला। उन्होंने कहा कि निचले स्तर से लेकर बड़े कर्मचारी तक धान घोटाले में शामिल हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि एफसीआई ने दो साल पुराना चावल, जिसे गरीबों को बांटना था, उसे नहीं बांटा गया। उसे केमिकल से धोकर नया चावल बनाया गया और फिर दोबारा एफसीआई को दिया गया।

15 हजार रिश्वत देकर ट्रक पास होता है

चढूनी ने आरोप लगाया कि एक 290 क्विंटल के ट्रक की रिश्वत 15 हजार रुपए होती है। उन्होंने कहा कि यह घोटाला हमने उजागर कर दिया है। उन्होंने बताया कि हरियाणा में 6 जिले ऐसे हैं, जहां एक भी क्विंटल धान खरीदा नहीं गया, लेकिन वहां 64 हजार एकड़ का पोर्टल कर दिया गया। उन्होंने पूछा अगर धान था, तो खरीदा क्यों नहीं गया और अगर धान नहीं था, तो पोर्टल कैसे हो गया।

28 लाख किसानों ने पोर्टल पर रजिस्ट्रेशन कराया

चढूनी ने कहा कि पूरे हरियाणा के 28 लाख किसानों ने पोर्टल पर रजिस्ट्रेशन कराया, लेकिन वेरिफिकेशन की प्रक्रिया उल्टी कर दी गई। उन्होंने कहा कि आमतौर पर वेरिफिकेशन में कम मिलता है, लेकिन यहां तो उल्टा ही हो गया। उन्होंने आरोप लगाया कि फिजिकल वेरिफिकेशन उन्हीं लोगों की होती है जो घोटाले में शामिल होते हैं।

घोटाले की जांच और किसान मुआवजे की मांग

गुरनाम सिंह चढूनी ने घोटाले में शामिल लोगों पर कार्रवाई और जांच की मांग की। उन्होंने कहा कि सरकार ने किसानों को मुआवजा भी नहीं दिया है, जबकि नुकसान की भरपाई की जानी चाहिए।

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