शिमला में मीडिया से बात करते हुए मुस्लिम वेलफेयर सोसायटी के अध्यक्ष।
हिमाचल की राजधानी शिमला में संजौली मस्जिद विवाद फिर तूल पकड़ रहा है। मस्जिद को संरक्षित रखने के लिए ऑल हिमाचल मुस्लिम वेलफेयर सोसायटी आगे आई है। इस सोसायटी के अध्यक्ष नजाकत अली हाशमी ने शिमला में प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा- नए सिरे से नगर निगम (MC) कमिश
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नजाकत अली ने रेवेन्यू रिकॉर्ड दिखाते हुए कहा- 1915 में खसरा नंबर 107 पर मस्जिद थी। इसके बाद 1997-1998 के रिकॉर्ड में भी संजौली में मस्जिद थी। इसलिए मस्जिद अवैध नहीं है। रेवेन्यू रिकार्ड में गैर मुमकिन मस्जिद एंटर है। साल 2013 में मस्जिद कमेटी ने MC को मस्जिद का नक्शा पास कराने को दिया।
मगर उन्होंने कहीं भी कोई ऑब्जेक्शन नहीं लगाया। MC एक्ट के अनुसार, अगर 90 दिन के भीतर कोई ऑब्जेक्शन नहीं लगता तो नक्शा डीम्ड अप्रूव माना जाता है।

मस्जिद अवैध नहीं: हाशमी
हाशमी ने कहा- यह बात सही है कि नक्शा पास हुए बगैर यहां पांच मंजिला मस्जिद बना दी गई थी। मगर अब ऊपर की दो मंजिल तोड़ी जा चुकी है। उन्होंने कहा- मुस्लिम समुदाय नियमों के तहत मस्जिद को मॉडिफाई करने को तैयार है। मस्जिद के बचे हुए स्ट्रक्चर में कोई भी चीज अवैध नहीं है। इसलिए दोबारा एप्लिकेशन डालकर नियमों के तहत नक्शा पास कराने की अनुमति मांगी जाएगी।
कोर्ट में मालिकाना हक साबित नहीं कर पाई मुस्लिम वेलफेयर सोसायटी
बेशक, ऑल हिमाचल मुस्लिम वेलफेयर सोसायटी ने मस्जिद पर मालिकाना हक का दावा कर रहा है। मगर मुस्लिम वेलफेयर सोसायटी इसे नगर निगम आयुक्त कोर्ट और जिला अदालत में साबित नहीं कर पाया। यही वजह है कि पहले निगम कमिश्नर कोर्ट ने पूरी मस्जिद को हटाने के आदेश दिए। फिर जिला अदालत ने भी कमिश्नर कोर्ट के आदेशों को सही ठहराया।
अब हाईकोर्ट पहुंच चुका मामला
अब मामला हाईकोर्ट पहुंच गया है। मगर हाईकोर्ट भी ऊपर की तीन मंजिल हटाने के आदेश दे चुका है। मगर निचली दो मंजिल को लेकर यथास्थिति बनाए रखने को कहा है।
अब सिलसिलेवार पढ़े, संजौली मस्जिद का पूरा विवाद…
- शिमला में दो गुटों में लड़ाई से सुर्खियों में आया मामला: बीते साल 31 अगस्त को शिमला के मैहली में 2 गुटों में लड़ाई के बाद सुर्खियों में आया। इसके बाद, पूरे प्रदेश में बवाल मचा। मारपीट करने वाले एक समुदाय के लोग संजौली मस्जिद में छिप गए। इससे गुस्साए लोगों ने 1 सितंबर को मस्जिद के बाहर प्रदर्शन किया। इसके बाद शिमला के अन्य स्थानों पर भी हिंदू संगठनों ने प्रदर्शन किया। शिमला के बाद प्रदेश के अलग- अलग क्षेत्रों में भी लोग सड़कों पर उतरे।
- संजौली में उग्र प्रदर्शन के बाद पूरे प्रदेश में जगह-जगह प्रदर्शन: 11 सितंबर 2024 को शिमला के संजौली में फिर उग्र प्रदर्शन हुआ। जिससे माहौल तनावपूर्ण हो गया। पुलिस ने बल प्रयोग और पानी की बौछार की। इससे हिंदू संगठन भड़क गए। संजौली में मस्जिद तोड़ने की मांग उठने लगी। इस बीच 12 सितंबर को संजौली मस्जिद कमेटी खुद निगम कमिश्नर कोर्ट पहुंची और अवैध हिस्सा तोड़ने की पेशकश की। इसके बाद मामला शांत हुआ।
- निगम आयुक्त ने पहले तीन मंजिल तोड़ने के आदेश दिए: बीते साल 5 अक्टूबर को निगम आयुक्त ने मस्जिद की ऊपर की तीन मंजिल तोड़ने के आदेश दिए। इसके बाद, मस्जिद को तोड़ने का काम शुरू हुआ। ऊपर की दो मंजिल तोड़ दी गई।
- इस साल 3 मई को पूरी मस्जिद गिराने के आदेश: 3 मई 2025 को निगम आयुक्त ने पूरी मस्जिद को अवैध करार देते हुए पूरा ढांचा तोड़ने के आदेश दिए। 17 मई 2025 को वक्फ बोर्ड और संजौली मस्जिद कमेटी ने मस्जिद तोड़ने के नगर निगम आयुक्त के आदेशों को जिला अदालत में चुनौती दी।
- जिला अदालत ने निगम आयुक्त कोर्ट का फैसला सही ठहराया: 30 अक्टूबर को जिला अदालत ने वक्फ बोर्ड और संजौली मस्जिद कमेटी की याचिका को खारिज किया और नगर निगम आयुक्त के आदेशों को सही ठहराया और 30 दिसंबर तक अवैध ढांचे को गिराने के आदेश दिए। वक्फ बोर्ड और संजौली मस्जिद कमेटी ने जिला अदालत के बाद हाईकोर्ट का रुख किया। हाईकोर्ट में आज 3 दिसंबर को सुनवाई हुई। कोर्ट ने तीन मंजिल तोड़ने के आदेश दिए।
- 1 दिसंबर को हाईकोर्ट के आदेश: इस मामले में वक्फ बोर्ड की याचिका पर हाईकोर्ट में बीते 1 दिसंबर को सुनवाई हुई। कोर्ट ने अगली सुनवाई तक ऊपर की तीन मंजिल हटाने के आदेश दिए, जबकि निचली दो मंजिल को लेकर अभी यथास्थिति बनाए रखने के आदेश दिए।
