Pakistan PM Shehbaz Gatecrashes Putin–Erdogan Meeting After Long Wait at Turkmenistan Forum | पुतिन की मीटिंग में जबरन घुसे पाकिस्तानी PM, VIDEO: रूसी राष्ट्रपति ने 40 मिनट इंतजार कराया था; पत्रकार को देख पुतिन ने आंख मारी

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मॉस्को19 मिनट पहले

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तुर्कमेनिस्तान में 40 मिनट तक इंतजार करने के बाद शहबाज सीधा पुतिन के मीटिंग रूम में घुस गए। सोर्स- रशिया टुडे - Dainik Bhaskar

तुर्कमेनिस्तान में 40 मिनट तक इंतजार करने के बाद शहबाज सीधा पुतिन के मीटिंग रूम में घुस गए। सोर्स- रशिया टुडे

पाकिस्तानी पीएम शहबाज शरीफ शुक्रवार को रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की मीटिंग में जबरन घुस गए। उस वक्त पुतिन तुर्किये के राष्ट्रपति रेसेप तैयप एर्दोगन के साथ मीटिंग कर रहे थे।

यह मामला तुर्कमेनिस्तान का है। यहां इंटरनेशनल पीस एंड ट्रस्ट फोरम की मीटिंग हो रही थी। इस दौरान पुतिन और शहबाज के बीच मीटिंग होनी थी। लेकिन शहबाज को 40 मिनट तक इंतजार कराने के बाद भी पुतिन उनसे मिलने नहीं पहुंचे।

इसी के बाद पाकिस्तानी पीएम जबरन मीटिंग हॉल में घुस गए। हालांकि वे 10 मिनट बाद निकल आए। कुछ देर बाद पुतिन मीटिंग हॉल से निकले और पत्रकारों को देखकर आंखों से इशारा किया।

इस पूरे मामले का वीडियो रशिया टुडे (आरटी न्यूज) ने इसे सोशल मीडिया पर शेयर किया है।

इस घटना को 4 तस्वीरों में देखिए…

पाकिस्तान पीएम पुतिन से मीटिंग के लिए इंतजार करते हुए। (सोर्स- रसिया टुडे)

पाकिस्तान पीएम पुतिन से मीटिंग के लिए इंतजार करते हुए। (सोर्स- रसिया टुडे)

40 मिनट तक इंतजार करने के बाद पीएम शहबाज खुद उनसे मिलने निकल गए। (सोर्स- रसिया टुडे)

40 मिनट तक इंतजार करने के बाद पीएम शहबाज खुद उनसे मिलने निकल गए। (सोर्स- रसिया टुडे)

10 मिनट बाद शहबाज शरीफ कमरे से निकल गए। (सोर्स- रसिया टुडे)

10 मिनट बाद शहबाज शरीफ कमरे से निकल गए। (सोर्स- रसिया टुडे)

पत्रकार के सवाल पर पुतिन ने उसे आंख मार दी। (सोर्स- रसिया टुडे)

पत्रकार के सवाल पर पुतिन ने उसे आंख मार दी। (सोर्स- रसिया टुडे)

पुतिन के सामने ईयरफोन नहीं लगा पाए थे शहबाज

यह पहली बार नहीं है जब पुतिन और शहबाज की मुलाकात यूं अजीब तरीके से चर्चा में रही है। जब-जब दोनों नेता मिले हैं, तब-तब ऐसा ही कुछ देखने को मिला है।

इससे पहले पुतिन और शहबाज की चीन में SCO समिट के दौरान बीजिंग में मुलाकात हुई थी। तब पुतिन से बात करते वक्त शरीफ अपना इयरफोन ठीक से नहीं लगा पाए थे।

इसके बाद पुतिन ने शरीफ को ईयरफोन पहनने का तरीका समझाने की कोशिश की। इस दौरान वे मुस्कुराते भी नजर आए।

शहबाज शरीफ को इयरफोन लगाने में दिक्कत होते देख पुतिन ने उन्हें इसे ठीक से पहनना सिखाया। यह घटना 2 सितंबर 2025 की है।

शहबाज शरीफ को इयरफोन लगाने में दिक्कत होते देख पुतिन ने उन्हें इसे ठीक से पहनना सिखाया। यह घटना 2 सितंबर 2025 की है।

इससे जुड़े वीडियो में दिख रहा है कि शहबाज शरीफ के कानों से ट्रांसलेशन इयरफोन बार-बार फिसल रहा है, वह उनसे लग नहीं पा रहा। इसके बाद, पुतिन अपना हेडसेट उठाकर उन्हें पहनने का तरीका दिखाने की कोशिश करते हैं।

2022 समिट में भी ऐसा हुआ था

ठीक 3 साल पहले भी शंघाई कोऑपरेशन ऑर्गेनाइजेशन (SCO) समिट के दौरान ही ऐसा हुआ था।

साल 2022 में उज्बेकिस्तान में SCO समिट से इतर रूसी राष्ट्रपति पुतिन के साथ शरीफ द्विपक्षीय बैठक कर रहे थे। इस दौरान उन्हें अपने इयरफोन को एडजस्ट करने में दिक्कत आ रही थी। जब चर्चा शुरू हुई तो उनका हेडफोन बार-बार फिसल रहा था।

हालांकि, इसे ठीक करने की कोशिश की गई लेकिन ये समस्या कुछ समय तक बनी रही, शहबाज के साथ दिक्कतों को देखकर पुतिन को हंसी आ गई थी।

2022 में उज्बेकिस्तान में SCO समिट के दौरान भी शहबाज ठीक से इयरफोन नहीं पहन पाए थे।

2022 में उज्बेकिस्तान में SCO समिट के दौरान भी शहबाज ठीक से इयरफोन नहीं पहन पाए थे।

पुतिन से हाथ मिलाने को बेताब थे शहबाज

इसी साल तियानजिन में हुई SCO समिट शरीफ, पुतिन का ध्यान आकर्षित करने और उनसे हाथ मिलाने के लिए भी आतुर देखे गए थे।

31 अगस्त को SCO समिट की औपचारिक फोटो सेशन के बाद पुतिन और जिनपिंग साथ-साथ बाहर निकले।

तभी पीछे से अचानक पाकिस्तान के PM शहबाज शरीफ आगे आए और पुतिन की ओर हाथ बढ़ा दिया।

जिनपिंग ने इसे इग्नोर कर दिया, लेकिन फिर पुतिन वापस लौट कर शरीफ से हाथ मिलाया।

पुतिन, शी जिनपिंग से बातचीत करते हुए जा रहे थे। इस दौरान शहबाज ने उन्हें टोका लेकिन पुतिन ने इसे अनसुना कर दिया था।

पुतिन, शी जिनपिंग से बातचीत करते हुए जा रहे थे। इस दौरान शहबाज ने उन्हें टोका लेकिन पुतिन ने इसे अनसुना कर दिया था।

इंटरनेशनल पीस एंड ट्रस्ट फोरम के बारे में जानिए जहां पुतिन, एर्दोगन और शहबाज पहुंचे

इंटरनेशनल पीस एंड ट्रस्ट फोरम एक ऐसा अंतरराष्ट्रीय मंच है जहां दुनिया के अलग-अलग देशों के नेता, मंत्री, अधिकारी, विशेषज्ञ, शांति से जुड़े संगठन और संयुक्त राष्ट्र के प्रतिनिधि एक साथ बैठकर यह चर्चा करते हैं कि दुनिया में शांति और देशों के बीच भरोसा कैसे बढ़ाया जाए। इसका मुख्य मकसद यह होता है कि देशों के बीच तनाव कम हो, बातचीत बढ़े और लोगों के बीच सौहार्द पैदा हो।

यह फोरम आम तौर पर तब आयोजित किया जाता है जब संयुक्त राष्ट्र किसी साल को शांति और भरोसे के लिए समर्पित करता है। 2025 को संयुक्त राष्ट्र ने इंटरनेशनल ईयर ऑफ पीस एंड ट्रस्ट घोषित किया था, और उसी के हिस्से के रूप में तुर्कमेनिस्तान की राजधानी अशगाबात में यह फोरम आयोजित किया गया। इसमें कई देशों के राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री और उच्च स्तरीय प्रतिनिधि शामिल हुए।

द्विपक्षीय बैठक से पहले शहबाज ने पुतिन, एर्दोआन और तुर्कमेनिस्तान के राष्ट्रपति के साथ अनौपचारिक मुलाकात की थी।

द्विपक्षीय बैठक से पहले शहबाज ने पुतिन, एर्दोआन और तुर्कमेनिस्तान के राष्ट्रपति के साथ अनौपचारिक मुलाकात की थी।

इस फोरम में दुनिया के सामने मौजूद संघर्ष, विवाद, युद्ध, क्षेत्रीय तनाव, सांस्कृतिक मतभेद और संवाद की कमी जैसे मुद्दों पर खुलकर विचार विमर्श होता है। इसका मकसद यह भी है कि युवा पीढ़ी में शांति को लेकर जागरूकता बढ़े और समाज में भरोसा कायम रहे। कई अंतरराष्ट्रीय संगठन इसमें भाग लेते हैं ताकि एक साझा समझ विकसित हो सके कि वैश्विक शांति के लिए किन कदमों की जरूरत है।

इस मंच का फायदा यह है कि देशों को बिना किसी राजनीतिक दबाव के या आधिकारिक बातचीत के जटिल ढांचे के बाहर आकर एक हल्के माहौल में संवाद करने का मौका मिलता है। इससे रिश्तों में नरमी आती है और आपसी विश्वास बढ़ता है। यह फोरम विवादों को हल करने का सीधा स्थान नहीं है, लेकिन यह माहौल बनाता है जिससे आगे समाधान की दिशा मजबूत हो सकती है।

इसे हर साल नहीं किया जाता, लेकिन जब भी किसी देश या संयुक्त राष्ट्र द्वारा शांति और भरोसे पर विशेष जोर दिया जाता है, तब यह फोरम आयोजित किया जाता है। इसका उद्देश्य दुनिया को अधिक स्थिर, सुरक्षित और सहयोगशील बनाना है।

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पुतिन से जुड़ी यह खबर भी पढ़ें…

मोदी ने रूसी सेना में भर्ती भारतीयों का मुद्दा उठाया:कहा- उनकी सुरक्षित वापसी हो; मोदी-पुतिन 24 घंटे में 3 बार मिले, डिफेंस डील नहीं

प्रधानमंत्री मोदी ने राष्ट्रपति व्लादिमिर पुतिन के साथ मुलाकात के दौरान रूसी सेना में शामिल भारतीयों का मुद्दा उठाया। उन्होंने पुतिन से भारतीयों की सुरक्षित वापसी की मांग की। विदेश मंत्रालय के मुताबिक कम से कम 44 भारतीय रूसी सेना में फंसे हुए हैं।

भारत दौरे पर आए पुतिन और मोदी ने करीब 24 घंटे में 3 बार मुलाकात की। दोनों नेताओं ने साथ में प्राइवेट डिनर, द्विपक्षीय बातचीत, जॉइंट प्रेस कॉन्फ्रेंस और इंडिया-रूस बिजनेस फोरम की बैठक को संबोधित किया।

हालांकि इस दौरान दोनों देशों के बीच भी किसी बड़े डिफेंस डील का ऐलान नहीं किया गया। इससे पहले कई रिपोर्ट्स में भारत-रूस के बीच किसी लड़ाकू विमान या बड़े रक्षा सौदा होने की बात कही जा रही थी। पूरी खबर यहां पढ़ें…

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