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- ‘No PUC, No Fuel’ Rule Enforced In Delhi | BS VI And Below Vehicles Banned In City
नई दिल्ली1 मिनट पहले
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दिल्ली में प्रदूषण से निपटने के लिए 18 दिसंबर से GRAP-4 लागू कर दिया गया है।
दिल्ली में प्रदूषण से निपटने के लिए गुरुवार से कई पाबंदियां लगाई गई हैं। शहर में आज से ग्रेडेड रिस्पॉन्स एक्शन प्लान (GRAP) का चौथा फेज लागू हो गया है। इसके तहत दिल्ली में BS-6 से कम मानक वाले दूसरे राज्यों के निजी वाहनों की एंट्री पर रोक लगा दी गई है।
गाड़ियों की एंट्री रोकने के लिए शहर में 126 चेकपॉइंट्स बनाए गए हैं। परिवहन विभाग की 80 टीमें भी तैनात रहेंगी। 100 नई इलेक्ट्रिक बसें भी चलेंगी। शहर में ‘नो PUC, नो फ्यूल’ नियम भी लागू हो गया है। इसके तहत बिना वैध प्रदूषण प्रमाणपत्र वाले वाहनों को पेट्रोल, डीजल या सीएनजी नहीं मिलेगा।
इसके लिए ऑटोमैटिक नंबर प्लेट रीडर (ANPR) कैमरों, पेट्रोल पंपों पर वॉयस अलर्ट और पुलिस की मदद से नियमों को लागू किया जा रहा है। दिल्ली में अगले 6 दिन तक AQI ‘बहुत खराब’ और ‘गंभीर’ श्रेणी में रहने का पूर्वानुमान है।

CNG, इलेक्ट्रिक वाहन और जरूरी सेवाओं वाले वाहनों को छूट
दिल्ली में GRAP-4 के तहत निर्माण सामग्री ले जाने वाले वाहनों पर पूरी तरह बैन है। CNG, इलेक्ट्रिक वाहन, पब्लिक ट्रांसपोर्ट और जरूरी सेवाओं को छूट दी गई है। ट्रैफिक जाम रोकने के लिए 100 हॉटस्पॉट्स पर गूगल मैप मदद लेगा। नियम तोड़ने पर वाहन जब्ती, जुर्माना और कानूनी कार्रवाई होगी। पर्यावरण अधिनियम 1986 के तहत सजा मिलेगी।
सुप्रीम कोर्ट बोला- प्रदूषण हर साल की समस्या, व्यावहारिक समाधान जरूरी
इसी बीच, सुप्रीम कोर्ट ने भी बुधवार को प्रदूषण पर सख्ती दिखाई। कोर्ट ने नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया (NHAI) और दिल्ली नगर निगम (MCD) को दिल्ली की सीमाओं पर बने 9 टोल प्लाजा अस्थायी रूप से बंद या हटाने को कहा है, ताकि जाम न लगे।
CJI सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली बेंच ने नए नियम और प्रोटोकॉल के बजाय मौजूदा उपायों के प्रभावी अमल पर जोर दिया। बेंच ने कहा कि सिर्फ नियम बनाना काफी नहीं है। जरूरी है कि सरकार प्रैक्टिकल और असरदार समाधान अपनाए और मौजूदा उपायों को सही तरीके से लागू किया जाए।
कोर्ट ने उन पुराने वाहनों पर कार्रवाई की अनुमति दी, जो बीएस-4 उत्सर्जन मानकों के अनुरूप नहीं। कोर्ट ने अपना 12 अगस्त का आदेश बदला है। उसमें 10 साल पुराने डीजल और 15 साल पुराने पेट्रोल वाहनों पर कार्रवाई से रोका गया था।
सुप्रीम कोर्ट के 3 प्रमुख कमेंट्स…
- सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली सरकार से कहा कि प्रदूषण की पाबंदियों से बेरोजगार हुए कंस्ट्रक्शन वर्कर्स की मदद की जाए और उन्हें दूसरा काम देने पर भी विचार किया जाए।
- कोर्ट ने CAQM और NCR सरकारों से कहा कि वे शहरों में ट्रैफिक, मोबिलिटी और किसानों को पराली जलाने से रोकने जैसे मुद्दों पर ध्यान दें। टुकड़ों में उपाय करने से यह संकट हल नहीं होगा।
- सुप्रीम कोर्ट ने नर्सरी से कक्षा 5 तक के स्कूल बंद रखने के दिल्ली सरकार के फैसले में दखल नहीं दिया। कोर्ट ने कहा कि सर्दियों की छुट्टियां नजदीक हैं, इसलिए इसमें बदलाव की जरूरत नहीं है।

दिल्ली में 50% कर्मियों के लिए वर्क फ्रॉम होम अनिवार्य
दिल्ली में जानलेवा प्रदूषण के चलते सरकार ने गुरुवार से सभी सरकारी और प्राइवेट दफ्तरों में 50% कर्मचारियों के लिए वर्क फ्रॉम होम नियम लागू कर दिया है। यानी अब सभी दफ्तरों में सिर्फ आधे कर्मचारी जाएंगे। आधे कर्मचारी घर से काम करेंगे।
दिल्ली सरकार सभी रजिस्टर्ड और वेरिफाइड निर्माण मजदूरों के खातों में मुआवजे के तौर पर ₹10,000 भी ट्रांसफर करेगी। दिल्ली के पर्यावरण मंत्री कपिल मिश्रा ने 17 दिसंबर को बताया कि दिल्ली में 16 दिनों तक ग्रेडेड रिस्पॉन्स एक्शन प्लान का तीसरा फेज, (GRAP-3) लागू रहा। इस दौरान निर्माण कार्य बंद थे। इससे दिहाड़ी मजदूर प्रभावित हुए हैं। पूरी खबर पढ़ें…