नई दिल्ली2 मिनट पहले
- कॉपी लिंक

केंद्र सरकार ने दर्द और बुखार में इस्तेमाल होने वाली निमेसुलाइड (Nimesulide) दवा को लेकर बड़ा फैसला लिया है। 100 मिलीग्राम से अधिक डोज वाली निमेसुलाइड की सभी ओरल (खाने वाली) दवाओं की मैन्यूफैक्चरिंग और बिक्री पर तत्काल रोक लगा दी गई है।
स्वास्थ्य मंत्रालय के मुताबिक निमेसुलाइड एक नॉन-स्टेरॉइडल एंटी-इंफ्लेमेटरी दवा है। जो दर्द तो कम करती है लेकिन इसकी ज्यादा डोज से लिवर खराब होने का खतरा रहता है।
यह प्रतिबंध केवल अधिक डोज (100 मिलीग्राम) वाली निमेसुलाइड पर लागू होगा। जबकि कम डोज की दवाएं मिलती रहेंगी। निमेसुलाइड ब्रांड बेचने वाली दवा कंपनियों को अब ज्यादा डोज वाली दवाओं का प्रोडक्शन बंद करना होगा। जो दवाईयां पहले से बाजार में मौजूद हैं उन्हें वापस मंगाना होगा।
दवा बैन से क्या असर पड़ेगा, सवाल-जवाब में जानें…
सवाल: निमेसुलाइड पर सरकार ने क्या बैन लगाया है? जवाब: सरकार ने 100 mg से ज्यादा निमेसुलाइड वाली सभी खाने की दवाओं की मैन्यूफैक्चरिंग और बिक्री पर रोक लगा दी है। यह नियम 29 दिसंबर से लागू होगा।
सवाल: यह फैसला क्यों लिया गया? जवाब: ज्यादा डोज से लिवर को नुकसान पहुंचने का खतरा रहता है और इसके सुरक्षित विकल्प बाजार में मौजूद हैं।
सवाल: क्या पूरी निमेसुलाइड दवा बैन हो गई है? जवाब: नहीं। सिर्फ 100 mg से ज्यादा डोज वाली ओरल दवाएं बैन हुई हैं। 100 mg तक की दवाएं डॉक्टर की सलाह पर दी जा सकती हैं।
सवाल: आम मरीजों पर इसका क्या असर पड़ेगा? जवाब: कुछ बड़ी कंपनियों (जैसे-सिप्ला) की दर्द की दवाएं दवा दुकानों से हट सकती हैं। मरीजों को अब वैकल्पिक पेनकिलर दी जाएगी। बिना डॉक्टर की सलाह दवा लेना और मुश्किल होगा।
सवाल: क्या पहले से खरीदी गई दवा का इस्तेमाल कर सकते हैं? जवाब: अगर दवा 100 mg से ज्यादा की है, तो डॉक्टर से सलाह लिए बिना इस्तेमाल न करें। बेहतर है कि वैकल्पिक दवा लें।
सवाल: दर्द और बुखार के लिए अब क्या मिलेगा? जवाब: डॉक्टर जरूरत के हिसाब से, पैरासिटामोल, आइबुप्रोफेन या अन्य कोई दवा लिख सकते हैं।
सवाल: बच्चों पर इसका क्या असर होगा? जवाब: बच्चों के लिए निमेसुलाइड पहले से ही बैन थी। इसलिए ज्यादा फर्क नहीं पड़ेगा।
सवाल: मेडिकल स्टोर और दवा कंपनियों पर असर? जवाब: दवा दुकानों को स्टॉक हटाना पड़ेगा। कंपनियों को प्रोडक्शन बंद करना होगा। उल्लंघन पर कानूनी कार्रवाई हो सकती है।