The first full moon of 2026 will be on January 2 and 3, significance of paush purnima in hindi, kalpwas and magh mela at prayagraj sangam | 2026 की पहली पूर्णिमा 2 और 3 जनवरी को: पौष पूर्णिमा पर प्रयागराज के संगम पर स्नान करने की परंपरा, इस दिन से शुरू होता है माघ मेला और कल्पवास

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13 घंटे पहले

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2026 की शुरुआत पौष पूर्णिमा से हो रही है। तिथियों की गड़बड़ की वजह से ये पर्व दो दिन 2 और 3 जनवरी को रहेगा। पौष पूर्णिमा 2 जनवरी शाम 6.53 बजे शुरू होगी और 3 जनवरी की दोपहर 3.32 बजे तक रहेगी। इस तिथि पर प्रयागराज के संगम पर स्नान करने की परंपरा है और इस दिन से यहां माघ मेला और कल्पवास की शुरुआत होती है।

शास्त्रों के अनुसार, पर्व मनाने के दो मुख्य आधार हैं- पहला चंद्रोदय व्यापिनी तिथि और दूसरा है उदयातिथि। उज्जैन के ज्योतिषाचार्य पं. मनीष शर्मा के मुताबिक, जो लोग पूर्णिमा पर व्रत रखते हैं और रात में चंद्रमा को अर्घ्य देते हैं, उनके लिए 2 जनवरी को पौष पूर्णिमा ज्यादा शुभ है, क्योंकि 2 जनवरी की रात को चंद्रमा पूर्ण रूप से पूर्णिमा तिथि में उदय होगा। शास्त्रों में स्नान और दान के लिए उदयातिथि (सूर्योदय के समय की तिथि) को महत्पूर्ण माना जाता है, चूंकि 3 जनवरी को सूर्योदय के समय पूर्णिमा रहेगी, इसलिए नदी स्नान, दान और सत्यनारायण भगवान की पूजा के 3 जनवरी का दिन ज्यादा शुभ है। हालांकि, अधिकतर पंचांगों में 3 जनवरी को पौष पूर्णिमा बताई गई है।

सूर्य को जल चढ़ाकर करें दिन की शुरुआत

पौष मास में सूर्य की पूजा करने की परंपरा है। पूर्णिमा इस महीने की अंतिम तिथि है। इस दिन की शुरुआत सूर्य को जल चढ़ाकर करना चाहिए। तांबे के लोटे में पानी भरें, उसमें कुमकुम, चावल, फूल डाल लें। इसके बाद ऊँ सूर्याय नम: बोलते हुए सूर्य को जल चढ़ाएं।

मान्यता है कि इस दिन प्रयागराज के संगम पर स्नान करने से मोक्ष मिलता है। इस तिथि से यहां माघ मेला और कल्पवास की शुरुआत होती है। पौष पूर्णिमा पर देवी शाकंभरी की जयंती भी मनाई जाती है, जो वनस्पति और अन्न की देवी हैं।

जानिए पौष पूर्णिमा पर कौन-कौन से शुभ काम करें

  • पूर्णिमा पर सूर्योदय से पूर्व किसी पवित्र नदी (गंगा, यमुना, नर्मदा, शिप्रा, गोदावर) में स्नान करने की परंपरा है। यदि आप नदी में स्नान नहीं जा सकते, तो घर पर ही नहाने के पानी में गंगाजल मिलाकर स्नान कर सकते हैं। ऐसा करने से से भी तीर्थ स्नान के समान पुण्य मिल सकता है।
  • सुबह स्नान के बाद सूर्य को अर्घ्य दें। इसके बाद घर के आसपास जरूरतमंद लोगों को भोजन, अन्न, धन, जूते-चप्पल, ऊनी वस्त्र, तिल, गुड़, कंबल जैसी चीजें दान कर सकते हैं।
  • पौष पूर्णिमा पर भगवान विष्णु के सत्यनारायण स्वरूप की पूजा विशेष रूप से की जाती है। इस दिन घर को साफ करके चौकी पर पीला कपड़ा बिछाएं, भगवान की प्रतिमा स्थापित करें। फल-फूल, पंचामृत और पंजीरी चढ़ाएं। सत्यनारायण भगवान की कथा पढ़ें-सुनें।
  • पौष पूर्णिमा की रात चंद्रमा को दूध और जल से अर्घ्य देना चाहिए। इससे मानसिक शांति मिलती है और कुंडली के चंद्र ग्रह से जुड़े दोष शांत होते हैं।
  • इस दिन भगवान विष्णु और महालक्ष्मी की विशेष पूजा करनी चाहिए। पूजा में तुलसी के साथ खीर का भोग खासतौर पर लगाएं।
  • पौष पूर्णिमा पर घर में शांति और प्रेम बनाए रखना चाहिए। किसी से ऐसी बातें न कहें, जिनसे किसी के मन को ठेस लग सकती है।
  • पूर्णिमा की शाम घर के मुख्य द्वार पर और तुलसी के पास दीपक जलाएं।

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