पोस्टल असिस्टेंट विशाल सिंह युवक से रजिस्ट्री को लेकर बात करते हुए।
महाराष्ट्र में मराठी के बाद अब पंजाब के अमृतसर में डाकघर में तैनात पोस्टल असिस्टेंट को पंजाबी पढ़ने-बोलने के लिए मजबूर किया गया। पोस्टल असिस्टेंट मूल रूप से दिल्ली के रहने वाले हैं। यहां एक पंजाबी युवक काम कराने आया और कहा कि पंजाब में हो तो पंजाबी आन
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अब इस मामले में पोस्टल असिस्टेंट पहली बार सामने आए। उन्होंने कहा कि मैं 4 साल से अमृतसर पोस्ट ऑफिस में हूं। मुझे हिंदी और अंग्रेजी पूरी आती है। मगर, मुझ पर पंजाबी बोलने-पढ़ने का दबाव बनाया गया।
उन्होंने इस मामले में युवक पर कार्रवाई की मांग की। डाकघर के पोस्टमास्टर ने भी कहा कि मेरे कर्मचारी को डराया-धमकाया गया, हम कार्रवाई करेंगे।

पोस्टल असिस्टेंट और युवक में होती नोकझोंक।
डाकघर में हुई नोंकझोंक पढ़ें…
पोस्टल असिस्टेंट: क्या करना है, मुझे बता दीजिये। युवक: क्या करना है मैंने तो इसे पोस्ट करवाना है.. मैं आपसे हिंदी में बात कर रहा हूं.. आपका बनता है मेरे से पंजाबी में बात करना… मेरा नहीं बनता।
पोस्टल असिस्टेंट (अपने सीनियर से) : सर, बताइए मैं क्या करूं, मेरे को पंजाबी आती नहीं है। मैं बोल रहा हूं कि पढ़ कर बता दीजिए. मगर इनकों बताने में भी तकलीफ हो रही हैं। युवक : हमें बताने में तकलीफ नहीं है.. हमें बड़ा खेद है कि आप पंजाब में पंजाब के ऑफिस में यहां पर आकर बैठे हो, चाहे सेंट्रल गवर्नमेंट का है.. मगर आपको पंजाबी तो आनी चाहिए ना।
पोस्टल असिस्टेंट: रजिस्ट्री वाले लिफाफे पर दोबारा नजर मारते हैं। युवक : सारे यहां पर पंजाबी लोग आ रहे हैं तो आपको पंजाबी आनी चाहिए। आप जॉब कर रहे हो, मुझे उससे दिक्कत नहीं है, आपकी जो क्वालिफिकेशन है, उस पर भी कोई दिक्कत नहीं है।
पोस्टल असिस्टेंट : मेरे बगल में जो बैठे है, ये आपका पंजाबी में कर देंगे… युवक: ऐ थोड़ी गल ए.. तुसी बैठें जे ते पंजाबी ते आउणी चाहिदी तुहानू ( ये बात थोड़े ही है, तुम बैठे हो तो पंजाबी तो आनी चाहिए)।
युवक (किस और व्यक्ति से बात करते हुए): नहीं भाजी, नहीं मैडम, एत्थे अस्सी पंजाब च हां। (यहां हम पंजाब में है..) युवक : एत्थे, जिन्ने बोर्ड लगे, किते वी पंजाबी नहीं। अमृतसर विच डाकखाना वड्डा, पंजाबी एहना नें किते वी नीं लिखी, सब इंग्लिश च जा हिंदी च हन, कोई किते पंजाबी दा नामोनिशान हैगा, तुसी मैनू दस्सो। ( यहां जितने भी बोर्ड लगे, उनमें कहीं भी पंजाबी में नहीं लिखा है, सब इंग्लिश और हिंदी में लगे है, पंजाबी का कहीं नामोनिशान नहीं है।)

विवाद होने पर अपने सीनियर से रजिस्ट्री के बारे में पूछते पोस्टल असिस्टेंट।
पोस्टल असिस्टेंट ने इस भाषाई विवाद पर कही 3 बातें…
- डाक कर्मचारियों की पोस्टिंग देश के किसी भी हिस्से में हो सकती है : विशाल सिंह के अनुसार, उन्होंने स्पष्ट किया था कि उन्हें पंजाबी भाषा नहीं आती और डाक विभाग में आधिकारिक तौर पर हिंदी और अंग्रेजी का ही प्रयोग किया जाता है। उन्होंने बताया कि डाक विभाग केंद्र सरकार के अधीन आता है और कर्मचारियों की पोस्टिंग देश के किसी भी हिस्से में हो सकती है।
- हर राज्य की भाषा सीखना व्यावहारिक नहीं: विशाल सिंह ने आगे कहा कि देश के किसी भी हिस्से में यदि किसी डाक कर्मचारी की पोस्टिंग होती है, ऐसे में वहां उस राज्य की भाषा सीखना व्यावहारिक नहीं है। उन्होंने कहा कि यदि भविष्य में उनकी ड्यूटी बंगाल या तमिलनाडु में लगती है, तो क्या वहां की भाषा सीखना अनिवार्य होगा।
- डाकघर में वीडियो बनाना निजता का गंभीर उल्लंघन : विशाल सिंह ने आरोप लगाया कि संबंधित व्यक्ति ने जबरदस्ती उनकी वीडियो बनाई और उनके साथ अभद्र भाषा का इस्तेमाल किया। उन्होंने मांग की कि इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए और वीडियो बनाने वाले व्यक्ति के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि डाकघर में लोगों की निजी डाक, दस्तावेज और एफडी से जुड़ा पैसा रहता है, ऐसे में वीडियो बनाना निजता का गंभीर उल्लंघन है।

डाकघर के डिप्टी पोस्टमास्टर गुरशरणजीत सिंह ने कहा कि युवक पर कार्रवाई की जाएगी।
DC से सरकारी दफ्तरों में पंजाबी अनिवार्य करने की मांग
मामले में अकाली दल वारिस पंजाब से जुड़े शमशेर सिंह पद्धरी की अगुवाई में एक प्रतिनिधिमंडल ने डीसी अमृतसर को ज्ञापन सौंपकर सरकारी दफ्तरों में पंजाबी भाषा अनिवार्य करने की मांग की।शमशेर सिंह पद्धरी ने कहा कि पंजाब, खासकर अमृतसर के कई केंद्रीय व राज्य सरकारी दफ्तरों में हिंदी-अंग्रेजी का अधिक इस्तेमाल हो रहा है और पंजाबी को नजरअंदाज किया जा रहा है।
उन्होंने बताया कि हाल ही में वायरल हुआ डाकघर का वीडियो उन्होंने ही बनाया था, जहां बोर्ड केवल अंग्रेजी में लगे थे। उन्होंने मांग की कि सभी सरकारी दफ्तरों में बोर्ड सबसे पहले पंजाबी, फिर हिंदी और अंग्रेजी में हों तथा कर्मचारियों को पंजाबी पढ़ने-लिखने और बोलने का ज्ञान अनिवार्य किया जाए। पद्धरी ने कहा कि अनुच्छेद 29 व 350-ए के तहत पंजाबी मातृभाषा की रक्षा हमारा संवैधानिक अधिकार है ।
सुपरवाइजर बोले- उनके कर्मचारी को डराया-धमकाया गया वहीं, डाकघर के डिप्टी पोस्टमास्टर गुरशरणजीत सिंह ने कहा कि यह मामला उनके संज्ञान में आया है और वह भी वीडियो बनाने वाले व्यक्ति के खिलाफ सख्त कार्रवाई के पक्ष में हैं। उन्होंने कहा कि उनके कर्मचारी को डराया-धमकाया गया और विभाग की छवि खराब करने की कोशिश की गई है, जिसे बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।