first supermoon of 2026 biggest moon of the year rise | देशभर में 2026 का पहला सुपरमून दिखा: चांद सामान्य से 14 गुना बड़ा और 30% ज्यादा चमकीला नजर आया

Actionpunjab
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कोलकाता/लखनऊ/मुंबई19 मिनट पहले

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देशभर में शनिवार की रात सबसे बड़ा चांद यानी सुपरमून दिखाई दे रहा है। यह 2026 का पहला सुपरमून है। इस दौरान चंद्रमा का आकार सामने से करीब 14 गुना बड़ा दिखा। साथ ही 30% ज्यादा चमकीला भी नजर आया।

सुपरमून को बिना किसी उपकरण के भी आसानी से देखा जा सकता है लेकिन अगर कोई दूरबीन या छोटा टेलिस्कोप इस्तेमाल करे, तो चांद की सतह की बनावट ज्यादा साफ नजर आती है। यह सुपरमून अक्टूबर से शुरू हुए चार महीनों के सुपरमून रन का आखिरी था। इसके बाद 2026 के अंत में अगला सुपरमून दिखेगा।

सुपरमून तब होता है, जब पृथ्वी और चंद्रमा के बीच की दूरी सबसे कम हो जाती है। इस वजह से चांद ज्यादा बड़ा और चमकीला दिखाई देता है। सुपरमून को देखने पर ऐसा लगा जैसे यह पृथ्वी के करीब आ रहा है। आमतौर पर चंद्रमा सबसे दूर 4,05,000 किलोमीटर और सबसे करीब 3,63,104 किलोमीटर दूर होता है।

खगोलीय भाषा में इसे सुपर वुल्फ मून कहा जाता है। जनवरी की ठंड में उत्तरी गोलार्ध में पहले भेड़ियों की आवाजें ज्यादा सुनाई देती थीं, इसलिए इस महीने की पूर्णिमा को वुल्फ मून नाम मिला।

देशभर में सुपरमून की 3 तस्वीरें…

भुवनेश्वर में सामान्य दिनों से बड़े आकार का चांद नजर आया।

भुवनेश्वर में सामान्य दिनों से बड़े आकार का चांद नजर आया।

रांची में पूर्णिमा के मौके पर अद्भुत चांद देखने को मिला।

रांची में पूर्णिमा के मौके पर अद्भुत चांद देखने को मिला।

राजस्थान के जयपुर में सुपरमून नजर आया।

राजस्थान के जयपुर में सुपरमून नजर आया।

सुपरमून के बारे में जानें…

सुपरमून एक ऐसी खगोलीय घटना है, जिसमें चांद अपने सामान्य आकार से ज्यादा बड़ा दिखाई देता है। सुपरमून हर साल तीन से चार बार देखा जाता है।

सुपरमून दिखने की वजह भी काफी दिलचस्प है। जब चांद धरती का चक्कर लगाते-लगाते उसकी कक्षा के बेहद करीब आ जाता है। इस स्थिति को पेरिजी (Perigee) कहा जाता है।

वहीं, चांद के धरती से दूर जाने पर उसे अपोजी (Apogee) कहते हैं। एस्ट्रोलॉजर रिचर्ड नोल ने पहली बार 1979 में सुपरमून शब्द का इस्तेमाल किया था।

पूर्णिमा और सुपरमून में क्या रिश्ता है?

हर 27 दिन में चांद पृथ्वी का एक चक्कर पूरा कर लेता है। 29.5 दिन में एक बार पूर्णिमा भी आती है। हर पूर्णिमा को सुपरमून नहीं होता, पर हर सुपरमून पूर्णिमा को ही होता है। चांद पृथ्वी के आसपास अंडाकार रेखा में चक्कर लगाता है, इसलिए पृथ्वी और चांद के बीच की दूरी हर दिन बदलती रहती है।

जुलाई में होता है सुपर बक मून

जुलाई में दिखने वाले सुपरमून को बक (हिरण) मून भी कहते हैं।

जुलाई में दिखने वाले सुपरमून को बक (हिरण) मून भी कहते हैं।

जुलाई में नजर आने वाले सुपरमून को बक मून भी कहा जाता है। हिंदी में बक का मतलब वयस्क नर हिरण होता है। ऐसा साल के उस समय के संदर्भ में कहा जाता है, जब हिरणों के नए सींग उगते हैं। वहीं, कुछ जगहों में जुलाई के सुपरमून को थंडर मून भी कहा जाता है, क्योंकि इस महीने में बादल गरजना और बिजली कड़कना आम बात है।

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