चंडीगढ़ में 60 फीसदी से ज्यादा प्रॉपर्टी की फाइलें स्कैन:डीसी ने रिकॉर्ड डिजिटाइजेशन की समीक्षा; 16 लाख पन्नों की स्कैनिंग पूरी

Actionpunjab
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चंडीगढ़ प्रशासन की ओर से प्रॉपर्टी से जुड़े रिकॉर्ड को डिजिटल बनाने का काम सही तरीके से चल रहा है। इसकी जांच के लिए चंडीगढ़ के डीसी निशांत यादव सोमवार को अचानक एस्टेट ऑफिस और सब-रजिस्ट्रार ऑफिस पहुंचे और पूरे कामकाज का निरीक्षण किया। उन्होंने स्कैनिंग और डिजिटाइजेशन कार्य की प्रगति की समीक्षा की। डिप्टी कमिश्नर के साथ असिस्टेंट एस्टेट ऑफिसर और रिकॉर्ड डिजिटाइजेशन का काम कर रही निजी एजेंसी के प्रतिनिधि भी मौजूद रहे। अधिकारियों ने बताया कि रिकॉर्ड स्कैनिंग का काम सितंबर 2025 से शुरू हुआ था और अब तक 60 फीसदी से ज्यादा फाइलें स्कैन हो चुकी हैं। 16 लाख पन्नों की स्कैनिंग पूरी एस्टेट ऑफिस में मौजूद प्रॉपर्टी फाइलों के करीब 20 लाख पन्नों में से अब तक लगभग 16 लाख पन्नों की स्कैनिंग पूरी हो चुकी है। वहीं, सब-रजिस्ट्रार ऑफिस में कुल 26 लाख पन्नों में से करीब 17 लाख पन्ने स्कैन किए जा चुके हैं। चंडीगढ़ प्रशासन की इस बड़ी सुधार योजना के तहत सब-रजिस्ट्रार ऑफिस, एस्टेट ऑफिस और रेवेन्यू ऑफिस के रिकॉर्ड को डिजिटल किया जा रहा है। इससे जमीन, मकान और रजिस्ट्री से जुड़े सभी दस्तावेज एक ही डिजिटल सिस्टम में सुरक्षित रहेंगे। रिकॉर्ड को डिजिटल करने की प्रक्रिया कई चरणों में होती है। पहले कागजी फाइलों को स्कैन किया जाता है, फिर उनकी जांच-पड़ताल और गुणवत्ता परीक्षण किया जाता है। इसके बाद हर दस्तावेज की प्रमाणित ई-फाइल तैयार कर सुरक्षित रखी जाती है, ताकि भविष्य में किसी तरह की गलती न रहे। गलती बर्दाश्त नहीं- डीसी डिप्टी कमिश्नर ने साफ कहा कि डाटा की दोबारा जांच और सत्यापन बेहद जरूरी है, क्योंकि आगे चलकर यही रिकॉर्ड कई विभागों और आम लोगों के काम आएंगे। उन्होंने निर्देश दिए कि किसी भी स्तर पर गलती बर्दाश्त नहीं की जाएगी और गुणवत्ता पर पूरा ध्यान रखा जाए। डिप्टी कमिश्नर ने एजेंसी को निर्देश दिए कि बाकी बचा काम मार्च 2026 तक तय समय सीमा में पूरा किया जाए। उन्होंने कहा कि रिकॉर्ड का डिजिटाइजेशन पारदर्शिता बढ़ाने, कामकाज को आसान बनाने और आम लोगों को तेज सेवाएं देने की दिशा में अहम कदम है।

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