बसंत पंचमी से शुरू होगा ब्रज में होली का उत्साह:बांके बिहारी मंदिर में उड़ेगा अबीर गुलाल, 45 दिनों तक चलेगी ब्रज में होली

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जन जन के आराध्य भगवान बाँके बिहारी जी महाराज 23 जनवरी को बसंत पंचमी से होली खेलना शुरू कर देंगे। बसंत पंचमी पर्व पर मंदिर में सुगंधित अबीर – ग़ुलाल उड़ाकर ब्रज की विश्व विख्यात 45 दिवसीय मदनोत्सव (फागोत्सव) का शुभारंभ किया जाएगा। होली आगमन महोत्सव स्वरूप में मनाए जाने वाले इस उत्सव के प्रथम दिवस के आयोजन के साथ ही सर्वत्र विभिन्न रंगीले – रसीले समारोहों की धूम शुरू हो जायेगी, जो लगभग सवा माह तक लगातार चलेगी। 27 फरवरी रंगीली एकादशी से 2 मार्च चतुर्दशी तक बिहारी जी मंदिर में सरस रंगीली होली का आयोजन होगा। होली पर रहेगा चंद्र ग्रहण बांके बिहारी जी की सेवा परम्परा के जानकार इतिहासकार आचार्य प्रहलाद बल्लभ गोस्वामी ने बताया कि इस बार 3 मार्च पूर्णिमा को चंद्र ग्रहण पड़ेगा, जिसके चलते बिहारी जी मंदिर में रंगीली होली का समापन एवं होलिका दहन 2 मार्च को चतुर्दशी तिथि की रात्रि में ही हो जाएगा। होलिका दहन के अगले दिन धुलैंडी पर्व मनाए जाने की पुरातन परम्परा का पालन करते हुए मंदिर में डोलोत्सव का आयोजन किया जाएगा। उन्होंने बताया कि डोलोत्सव में ठाकुरजी गुलाबी पोषाक व बेशकीमती रत्न जड़ित स्वर्ण आभूषण धारण कर महाराजा स्वरूप में दिव्यदर्शन प्रदान करेंगे। लेकिन 3 मार्च को चंद्रग्रहण होने की वजह से डोल महोत्सव के दर्शन सुबह 9 बजकर 5 मिनट पर सूतक काल आरम्भ होने से पहले तक तथा शाम को ग्रहण के मोक्षकाल के उपरांत सीमित समय तक ही प्राप्त हो पाएंगे। इसके बाद चैत्र कृष्णा द्वितीया 5 मार्च से बाँके बिहारी मंदिर में दर्शन वेला की ग्रीष्मकालीन समयसारिणी लागू हो जाएगी, जिससे आराध्य के दर्शन – भोगराग व शयन सेवा का क्रम भी परिवर्तित हो जाएगा। बसंत पंचमी से शुरू होगा बसंतोत्सव इतिहासकार आचार्य प्रहलाद बल्लभ गोस्वामी के अनुसार सरस्वती जी के जन्मोत्सव माघ शुक्ला पंचमी, जिसे बसन्त पंचमी कहा जाता है, से समस्त मंदिर – देवालयों में भगवान का बसंतोत्सव प्रारंभ हो जाएगा। पौराणिक मान्यतानुसार बसन्त पंचमी को कामदेव का जन्मदिवस भी माना जाता है तथा इसी समय नव फसल तैयार होती है। इस कारण भारतवासियों ने नवीन फसल के स्वागतार्थ समन्वय स्वरूप माघ शुक्ला पंचमी से, चैत्र कृष्णा द्वितीया तक एक उत्सव मनाना आरंभ किया। जिसे पूर्व में मदनोत्सव, फागोत्सव अथवा बसंतोत्सव कहा जाता था तथा वर्तमान में होली आगमन महोत्सव कहा जाता है। फागोत्सव का ब्रज में शुभारंभ प्रहलाद बल्लभ गोस्वामी ने बताया कि 23 जनवरी बसंतोत्सव से आरम्भ हुए इस बहुरंगी समारोह के अंतर्गत यूं तो अनेक स्थानों पर विविध प्रकार के मनोहारी कार्यक्रम होंगे। किन्तु सर्वाधिक आकर्षण का केंद्र रहेगा जग प्रसिद्ध बाँके बिहारी मंदिर। यहाँ विराजित भगवान बाँके बिहारी जी महाराज ही सर्वप्रथम बसंत पंचमी के दिन मदनोत्सव अथवा फागोत्सव के नाम से विश्वविख्यात इस महा महोत्सव का शुभारंभ सुगंधित अबीर – गुलाल उड़ाकर करेंगे। गोस्वामी सुनाएंगे होली के पद सेवायत प्रह्लाद बल्लभ गोस्वामी ने बताया कि पर्व पर भगवान का बसंती पोशाक व अलंकारों से श्रृंगार होगा। भगवान के कोमल कपोलों (गालों) पर लाल गुलाल के कुमकुम लगाये जाएंगे और सरसों के फूलों की गुथी हुई माला (गुंजा) चढाई जाएंगी। केसरिया छैना की खीर, अधूटा, मोहनभोग, बादाम – मूंगदाल और सूजी के हलुआ का विशेष भोग धराया जाएगा। इस दिन से ठाकुर जी के समक्ष गोस्वामी होली पदों का गायन प्रारम्भ करेंगे। इसके बाद ब्रजमंडल में आयोजित होने वाली रससिक्त रंगीली होली के विभिन्न मनोहारी सरस समारोह शुरू हो जायेंगे, जो 12 मार्च को रंगनाथ प्रभु के होली खेलने के साथ सम्पन्न होंगे। ब्रज की होली को लालायित रहते हैं भक्त इतिहासकार कहते हैं कि परस्पर प्रेम, अलौकिक आनन्द एवं इष्ट भक्ति के संगम स्वरूप में प्रतिष्ठापित रंगों का महापर्व होली, वैसे तो सर्वत्र अपने – अपने अंदाज में मनाया जाता है, परन्तु ब्रज में इसका जो स्वरूप विद्यमान है, वह निराला ही है। इस तीर्थ क्षेत्र को जहाँ पूर्व में लीला पुरुषोत्तम श्रीकृष्ण व आल्हादिनी शक्ति श्रीराधा द्वारा खेली गई रंगों की होली के दर्शन करने का सौभाग्य प्राप्त है, वहीं वर्तमान में जन – जन के आराध्य भगवान बाँके बिहारी जी महाराज की सरस रंगीली होली आयोजनों की निरंतर अग्रसारित हो रही विकास यात्रा का साक्षी बनने का गौरव भी हासिल है। ब्रजधाम के आंगन में आयोजित रंगीले रसीले छबीले होली समारोहों के अनोखे आयोजनों के दर्शन हेतु मनुष्य ही नहीं, अपितु देवी – देवता भी लालायित रहते हैं।

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