बुक्स में 'अमर नमन कर', 'राधा चटाई बिछा' ही क्यों?:इग्नू वर्कशॉप में डायरेक्टर ने की जेंडर भेद पर चोट, शिक्षा में लैंगिक समानता पर जोर

Actionpunjab
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जोधपुर की मौलाना आजाद मुस्लिम बी एड कॅालेज में गुरुवार को इंदिरा गांधी राष्ट्रीय मुक्त विश्वविद्यालय (इग्नू) की बी.एड. द्वितीय वर्ष की 12 दिवसीय कार्यशाला का समापन हुआ। यह समारोह केवल औपचारिकता तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यह शिक्षा व्यवस्था में गहरे पैठ जमा चुके लैंगिक भेदभाव पर चिंतन का मंच भी बना। समारोह के मुख्य अतिथि और इग्नू के रीजनल डायरेक्टर सचिन श्रीधर ने अपने संबोधन में टीचर्स से चर्चा करते हुए बुक्स के उदाहरणों के जरिए सवाल पूछे। उन्होंने कहा कि बचपन से ही हम अनजाने में शिक्षा को ‘जेंडर’ भेद बना रहे हैं। ‘अमर नमन करेगा, राधा चटाई बिछाएगी?’ सचिन श्रीधर ने अपने संबोधन में सब्जेक्ट बुक्स के वाक्यों का उदाहरण देते हुए कहा, “किताबों में पढ़ाया जाता है- ‘अमर नमन कर’, जो कि एक सम्मानजनक कार्य है। लेकिन जब ‘ई’ की मात्रा पढ़ाने की बारी आती है तो वाक्य होता है- ‘राधा चटाई बिछा’। यह क्या बात हुई? अमर नमन करेगा और राधा चटाई बिछाएगी?” उन्होंने शिक्षकों से सवाल किया कि आखिर हम बच्चों को बचपन से क्या सिखा रहे हैं? उन्होंने सरकारी दफ्तरों का उदाहरण देते हुए कहा कि हेल्प डेस्क पर अक्सर लिखा होता है- ‘मैं आपकी क्या मदद कर सकता हूं?’ इसमें ‘सकता हूं’ का इस्तेमाल यह मानकर किया जाता है कि वहां बैठने वाला व्यक्ति पुरुष ही होगा। उन्होंने भावी शिक्षकों से आह्वान किया कि ऐसी पुरानी सोच को बदलने की जिम्मेदारी आप पर है। ‘तेरा सहारा’ यानी ‘शिक्षा का सहारा’ समारोह की शुरुआत में हुई प्रार्थना ‘आसरा इस जहां का मिले ना मिले, मुझे तेरा सहारा जरूर चाहिए’ का जिक्र करते हुए श्रीधर ने इसे एक नया दृष्टिकोण दिया। उन्होंने कहा, “इस प्रार्थना में ‘तेरा’ शब्द बहुत सेक्युलर है। एक शिक्षक के रूप में मैंने उस ‘तेरा’ को ‘शिक्षा’ के रूप में देखा। हमें जीवन में अपनी शिक्षा और आत्मसात किए गए ज्ञान के सहारे की ही सबसे ज्यादा जरूरत होती है, क्योंकि यही हमें सोचने की शक्ति देती है।” इग्नू पर गर्व: नैक की A++ ग्रेड वाला एकमात्र संस्थान श्रीधर ने इग्नू की उपलब्धियों पर गर्व जताते हुए कहा कि यह भारत का एकमात्र संस्थान है, जिसे डिस्टेंस लर्निंग में NAAC द्वारा A++ ग्रेड मिला है और एनआईआरएफ रैंकिंग में भी इसे शीर्ष स्थान प्राप्त है। उन्होंने प्रशिक्षणार्थियों से कहा, “आज का यह समापन समारोह आपके लिए अंत नहीं, बल्कि एक नई शुरुआत है। यह वर्कशॉप आपके करियर में एक नया मोल्ड लाएगी, जो आपको निदेशक जैसे ऊंचे पदों तक ले जा सकती है।” अनुशासन और सहभागिता की सराहना कार्यशाला में विद्यार्थियों ने शिक्षण-अधिगम प्रक्रिया, पाठ योजना और कक्षा प्रबंधन की बारीकियां सीखीं। समारोह के अंत में मौलाना आजाद मुस्लिम बी.एड. कॉलेज की प्राचार्य डॉ. सपना सिंह राठौड़ और महिला पीजी महाविद्यालय की प्राचार्य डॉ. श्वेता अरोड़ा ने सभी अतिथियों का आभार जताया और स्टूडेंट्स के अनुशासित रवैये की सराहना की।

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