SIT आज देगी सीएम को रिपोर्ट, 100 लोगों के बयान:सभी एजेंसियों को कटघरे में किया खड़ा, सबसे बड़ा सवाल: दो घंटे तक क्यों नहीं निकला युवक?

Actionpunjab
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युवराज मेहता की कार डूबने से हुई मौत अब एक हादसा नहीं, बल्कि प्रशासनिक लापरवाही, रेस्क्यू सिस्टम की विफलता और अधिकारियों की गैर-जिम्मेदारी का मामला बनकर सामने आ रही है। जांच कर रही विशेष जांच टीम ने SDRF, पुलिस, कंट्रोल रूम और रेस्क्यू ऑपरेशन, प्राधिकरण में शामिल 100 से ज्यादा लोगों के फाइनल बयान दर्ज किए। इन बयानों के बाद एसआईटी का मानना है कि समय रहते सही फैसले नहीं लिए गए, जिसका खामियाजा युवराज को अपनी जान देकर चुकाना पड़ा। हालांकि फाइनल रिपोर्ट आज सीएम को भेजी जाएगी। दो घंटे तक क्यों नहीं निकला युवक? एसआईटी का सबसे बड़ा सवाल
SIT जांच का सबसे बड़ा सवाल यही है कि घटना की सूचना मिलने के बावजूद करीब दो घंटे तक युवराज मेहता को बाहर क्यों नहीं निकाला गया। जांच में सामने आया है कि मौके पर मौजूद पुलिस और प्रशासन हालात की गंभीरता को समझने में पूरी तरह नाकाम रहे। समय रहते न तो पर्याप्त रेस्क्यू संसाधन जुटाए गए और न ही उच्च अधिकारियों ने मौके की कमान संभाली। अधिकारियों से सीधे तौर पर पूछा है कि सूचना मिलने के बाद तत्काल रेस्क्यू क्यों शुरू नहीं हुआ ? रेस्क्यू एजेंसियों में तालमेल की कमी उजागर
बयानों में यह भी सामने आया है कि एडीआरएफ, पुलिस और स्थानीय प्रशासन के बीच आपसी समन्वय बेहद कमजोर रहा। SIT के सामने दिए गए बयानों में अलग-अलग एजेंसियों ने जिम्मेदारी एक-दूसरे पर डालने की कोशिश की है। कोई उपकरणों की कमी का हवाला दे रहा है तो कोई मौसम और दृश्यता को कारण बता रहा है। एसआईटी अब इन बयानों का मिलान कर यह तय कर रही है कि वास्तविक चूक कहां हुई। कंट्रोल रूम और वॉर रूम की भूमिका पर सवाल
SIT ने कंट्रोल रूम की कार्यप्रणाली को भी कटघरे में खड़ा किया है। जांच में यह सामने आया है कि घटना की सूचना समय पर मिलने के बावजूद वार रूम को देर से एक्टिव किया गया। यह भी स्पष्ट नहीं है कि रेस्क्यू ऑपरेशन का नेतृत्व किस अधिकारी के पास था और फील्ड में निर्णय लेने की जिम्मेदारी किसने निभाई। सभी को बारी-बारी से बोर्ड रूम में बुलाकर बयान रिकार्ड किए गए। CDR और लॉग बुक से खुलेगा सच
एसआईटी ने कॉल डिटेल रिकॉर्ड , कंट्रोल रूम की लॉग बुक, वायरलेस मैसेज और फील्ड यूनिट्स की मूवमेंट रिपोर्ट को जांच का आधार बनाया है। इन रिकॉर्ड्स से यह पता लगाया जा रहा है कि किस समय किस अधिकारी को सूचना मिली और किस स्तर पर लापरवाही या टालमटोल हुई। खतरनाक गड्ढे और लापरवाह प्रशासन
जांच में यह तथ्य भी सामने आया है कि जिस स्थान पर हादसा हुआ, वहां पहले से जलभराव और गहरे गड्ढे की स्थिति बनी हुई थी। इसके बावजूद न तो पर्याप्त बैरिकेडिंग की गई और न ही चेतावनी बोर्ड लगाए गए। एसआईटी ने इस लापरवाही के लिए संबंधित विभागों के एक-एक अधिकारी और कर्मचारी को बुलाकर उनके बयान दर्ज किए। रिपोर्ट में तय होगी जिम्मेदारी, कार्रवाई तय मानी जा रही
SIT की रिपोर्ट में साफ तौर पर जिम्मेदारी तय की जाएगी। इसमें अधिकारियों की भूमिका, निर्णय में हुई देरी और सिस्टम फेल्योर को प्रमुखता से दर्ज किया जाएगा। रिपोर्ट में निलंबन, विभागीय कार्रवाई और सख्त अनुशासनात्मक कदमों की सिफारिश की संभावना जताई जा रही है। सीएम स्तर पर होगा फैसला, दांव पर प्राधिकरण की साख
SIT की रिपोर्ट मुख्यमंत्री को सौंपे जाने के बाद इस मामले में अंतिम निर्णय लिया जाएगा। युवराज मेहता की मौत ने न केवल रेस्क्यू सिस्टम बल्कि पूरे प्रशासनिक ढांचे पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। अब यह देखना अहम होगा कि सरकार इस मामले में सिर्फ रिपोर्ट तक सीमित रहती है या दोषी अधिकारियों पर वास्तविक कार्रवाई करती है।

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