Lucknow Bank Fraud | Shiva Rao Reddy 12 Years

Actionpunjab
14 Min Read


लखनऊ में शकुंतला मिश्रा विश्वविद्यालय स्थित बैंक ऑफ बड़ौदा शाखा में हुए करोड़ों के घोटाले में बैंक अधिकारियों और कर्मचारियों की भूमिका पर सवाल उठ रहा है। पीड़ितों का कहना है कि करीब 12 साल से बैंक मित्र शिवा राव रेड्डी खुद को बैंक कर्मी बताकर काम करता

.

बैंक के अधिकारी और कर्मचारी पैसा जमा करने से लेकर निकालने तक में उसकी मदद लेने के लिए कहते थे। यदि वह बैंक कर्मी नहीं था, तो अधिकारी किसी भी काम के लिए उसके पास क्यों भेजते थे‌? इससे साफ है कि उसने बैंक अधिकारियों और कर्मचारियों के साथ मिलकर ठगी की है। उन पर भी सख्त कार्रवाई होनी चाहिए।

बैंक शाखा में हुई करोड़ों की ठगी के बाद दैनिक भास्कर टीम ने घटना की पड़ताल की। बैंक अधिकारियों-कर्मचारियों, पीड़ितों और स्थानीय लोगों से बातचीत की। पता चला कि बैंक मित्र ने करोड़ों की ठगी करके राजाजीपुरम की कॉलोनी में आलीशान घर खरीदा है। कॉलोनी में वह किसी से कोई मतलब नहीं रखता था।

पढ़िए पूरी ग्राउंड रिपोर्ट…

शिवा राव रेड्डी ने करीब 1 साल पहले राजाजीपुरम में यह आलीशान घर खरीदा था। पीड़ितों का आरोप है कि उसने ठगी के पैसों से घर खरीदा है।

शिवा राव रेड्डी ने करीब 1 साल पहले राजाजीपुरम में यह आलीशान घर खरीदा था। पीड़ितों का आरोप है कि उसने ठगी के पैसों से घर खरीदा है।

पहले बैंक मित्र के बारे में और उसके पड़ोसी क्या कह रहे हैं पढ़िए…

12 साल पहले बैंक ऑफ बड़ौदा से जुड़ा

पीड़ितों ने बताया कि शिवा राव रेड्डी बीते करीब 12 वर्षों से बैंक ऑफ बड़ौदा की शकुंतला मिश्रा शाखा से जुड़ था। वह खुद को बैंक कर्मचारी बताता था। हकीकत में वह सिर्फ बैंक मित्र था। बैंक अधिकारी और कर्मचारी ग्राहकों से कहते थे कि जो भी काम हो शिवा से करवा लो।

खाते खुलवाने से लेकर एफडी, पैसे जमा कराने और निकालने तक हर काम उसके जरिए होता था। इस दौरान उसने लोगों से एटीएम कार्ड, पासबुक और खाते की पूरी जानकारी हासिल कर ली थी।

गिरफ्तारी के बाद शिवा के घर के बाहर पसरा सन्नाटा

भास्कर की टीम बैंक मित्र शिवा राव रेड्डी के राजाजीपुरम स्थित घर पहुंची। वहां अजीब सा सन्नाटा पसरा था। गेट पर खड़ी महिलाएं भास्कर टीम को देखते ही अंदर चली गईं। दरवाजा बंद कर लिया। आसपास के लोगों ने बताया कि कुछ दिन पहले ही उन्हें जानकारी मिली कि शिवा राव रेड्डी को जेल भेज दिया गया है।

उसके घर में एसी और सीसीटीवी कैमरे लगे थे। पड़ोसियों के मुताबिक, गिरफ्तारी की खबर फैलने के बाद शिवा के घरवालों ने बाहर रखे कुछ सामान भी हटा लिए हैं।

जैसे ही दैनिक भास्कर की टीम शिवा राय रेड्डी के घर पहुंची। घर के गेट पर खड़ी उसकी मां दरवाजा बंद कर करके अंदर चली गई।

जैसे ही दैनिक भास्कर की टीम शिवा राय रेड्डी के घर पहुंची। घर के गेट पर खड़ी उसकी मां दरवाजा बंद कर करके अंदर चली गई।

किसी से ज्यादा बातचीत नहीं करता था

पड़ोसियों ने बताया कि शिवा राव रेड्डी ने करीब 1 साल पहले यह मकान खरीदा था। वह रोज सुबह घर से निकल जाता था। बैंक के आसपास ही नजर आता था। बैंक के बाहर बनी कैंटीन में बैठकर वह ग्राहकों के फार्म भरने से लेकर अन्य बैंक संबंधित काम करते दिखता था।

लोग उसे बैंक का ही हिस्सा मानते थे। मोहल्ले वालों का कहना है कि वह बेहद शांत और सीधा-साधा दिखता था। न ज्यादा किसी से बातचीत, न किसी से झगड़ा। परिवार भी मोहल्ले में ज्यादा घुलता-मिलता नहीं था। किसी को अंदाजा तक नहीं था कि यही शख्स दर्जनों परिवारों की आर्थिक रीढ़ तोड़ देगा।

मोहल्ले की महिलाओं ने बताया कि वह लोग घरों के बाहर धूप लेने बैठती हैं। शिवा के घरवाले बातचीत नहीं करते हैं।

मोहल्ले की महिलाओं ने बताया कि वह लोग घरों के बाहर धूप लेने बैठती हैं। शिवा के घरवाले बातचीत नहीं करते हैं।

मोहल्ले वाले बोलेविश्वास नहीं होता कि ऐसा कर सकता है

मोहल्ले में रहने वाली करीब 65 वर्षीय बुजुर्ग महिला ने बताया कि शिवा राव रेड्डी तेलंगाना का रहने वाला बताया जाता है। उसके परिवार में पत्नी, माता-पिता और एक बेटा है। वह सुबह चुपचाप निकलता और शाम को लौट आता था। गिरफ्तारी के बाद जब लोगों को उसकी सच्चाई पता चली, तो किसी को यकीन ही नहीं हुआ कि वह इतने बड़े स्तर पर ठगी कर सकता है।

बैंक के बाहर झोपड़ी में कैंटीन चलती थी। शिवा इसी में बैठकर लोगों को ठगता था।

बैंक के बाहर झोपड़ी में कैंटीन चलती थी। शिवा इसी में बैठकर लोगों को ठगता था।

पढ़िए ठगी के शिकार लोगों का दर्द-

विश्वास में ठगी का शिकार हुए लाेग

पीड़ित हरिशंकर बताते हैं कि वह पढ़े-लिखे नहीं हैं। सबसे पहले मुझे ही जानकारी हुई थी कि बैंक में ऐसा हुआ है। तब मैंने अपने भाई को बुलाया। उसने जानकारी की तो पता चला कि वह ठगी के शिकार हुए हैं। उसके बाद एक-एक करके बड़ी संख्या में पीड़ित सामने आए।

जब लोग बैंक पहुंचे, तो उनसे कहा गया कि उनकी एफडी के कागज फर्जी हैं। कई पीड़ित महिलाओं ने बताया कि बैंक ने खाते से पैसे निकालने की कॉपी तक देने से इनकार कर दिया। अब हालत यह है कि कई परिवारों के पास खाने तक के पैसे नहीं बचे हैं।

हरिशंकर को सबसे पहले पता चला कि बैंक में ठगी हो रही है।

हरिशंकर को सबसे पहले पता चला कि बैंक में ठगी हो रही है।

शांति देवी ने कहा-30 लाख रुपए निकाल लिए

पीड़िता शांति देवी ने रोते हुए बताया- सात साल से उनका पैसा एफडी (फिक्स्ड डिपॉजिट) में जमा था। उनके पति के जीवित रहते ही, उनकी मौत से एक साल पहले एफडी कराई थी। लेकिन अचानक उन्हें जानकारी मिली कि न तो उनका कोई पैसा बैंक में जमा है और न ही कोई एफडी है।

बैंक कर्मचारियों का कहना है कि उन्हें भी इसकी कोई जानकारी नहीं है कि पैसा कैसे नहीं है। शांति देवी कहती हैं कि उनके जीवन की सारी जमा-पूंजी खत्म हो चुकी है। अब उनके पास कोई सहारा नहीं बचा है।

शांति देवी कहती हैं कि उनके जीवन की सारी जमा-पूंजी खत्म हो चुकी है।

शांति देवी कहती हैं कि उनके जीवन की सारी जमा-पूंजी खत्म हो चुकी है।

जानकी देवी ने कहा- खाते में 35 लाख थे, 46 हजार बचे

जानकी देवी ने कहा- पिता ने खाते में करीब 35 लाख रुपए रखे थे। इसमें से 10 लाख रुपए सेविंग अकाउंट में थे। बाकी रकम एफी में लगाई गई थी। मकर संक्रांति के दिन जब वे 6 हजार रुपए निकालने बैंक पहुंचीं तो पैसा निकल गया, लेकिन जब खाते की जानकारी ली तो बताया गया कि अब खाते में केवल 46 हजार रुपए ही बचे हैं। उनके 30 लाख रुपए कहां गए, किन खातों में ट्रांसफर हुए, इसकी जानकारी बैंक नहीं दे रहा है।

फातिमा ने कहा- शिवा ने एटीएम कार्ड ले लिया

बुजुर्ग फातिमा बताती हैं कि जब उन्होंने पैसा निकालने की बात कही तो शिवा ने कहा- बैंक में आग लग गई है। एटीएम कार्ड, पासबुक और जरूरी कागजात मुझे दे दीजिए। बाद में पैसा निकाल कर दे दूंगा। इसके बाद उसने एटीएम कार्ड ले लिया, बच्चियों के खातों की डिटेल ले ली और सारा पैसा निकाल लिया।

बुजुर्ग फातिमा बताती हैं कि जब उन्होंने पैसा निकालने की बात कही तो शिवा ने कहा- बैंक में आग लग गई है।

बुजुर्ग फातिमा बताती हैं कि जब उन्होंने पैसा निकालने की बात कही तो शिवा ने कहा- बैंक में आग लग गई है।

बेगम बानो ने कहा- बीमे का एक लाख गया

70 साल की बेगम बानो ने बताया- उनके घर में एक्सीडेंट हो गया था, मुआवजे का एक लाख रुपए उनके खाते में आए थे, वह भी चला गया। अब न कोई कमाने वाला है, न कोई सहारा। बहू-बेटा अलग रहते हैं। उनकी कोई सुध नहीं लेता। बैंक वाले कहते हैं कल मिलेगा, परसों मिलेगा, लेकिन कब मिलेगा या मिलेगा भी या नहीं, कुछ नहीं बताया जा रहा।

गुड़िया बोलीं-एटीएम कार्ड, पासबुक लिए

गुड़िया ने बताया- उनका 8 लाख 82 हजार रुपए चला गया है। कई बार इसी बैंक में एफडी तुड़वाई थी, लेकिन अब जो कागज उनके पास हैं, उन्हें फर्जी बताया जा रहा है। बैंक मैनेजर कह रहे हैं कि यह कागज पूरी तरह फर्जी है। शिवा ने उन्हें भी कहा था कि बैंक में आग लग गई है। इसके बाद एटीएम कार्ड, पासबुक और कागजात लिए थे।

गुड़िया ने बताया- उनका 8 लाख 82 हजार रुपए चला गया है।

गुड़िया ने बताया- उनका 8 लाख 82 हजार रुपए चला गया है।

रंजना ने कहा- 2 लाख रुपए की एफडी कराई

रंजना राजपूत ने कहा- उनका ढाई लाख रुपए चला गया। एक-एक लाख रुपए की एफडी कराई गई थी। जब वीडियो वायरल हुआ तब वे बैंक पहुंचीं, जहां बताया गया कि उनकी एफडी फर्जी है। बैंक अधिकारियों ने कहा- यहां कभी ऐसी प्रिंटिंग मशीन चली ही नहीं, जिससे यह कागज बने हों।

रंजना कहती हैं कि तीन साल से वे इसी बैंक में लेनदेन कर रही थीं। अब अचानक बताया जा रहा है कि उनकी एफडी फर्जी है, जबकि शिवा पिछले 12 साल से यहां काम कर रहा था और किसी को पता नहीं चला कि वह प्राइवेट व्यक्ति है।

रंजना राजपूत ने कहा- उनका ढाई लाख रुपए चला गया। एक-एक लाख रुपए की एफडी कराई थी।

रंजना राजपूत ने कहा- उनका ढाई लाख रुपए चला गया। एक-एक लाख रुपए की एफडी कराई थी।

बैंक अफसरों और कर्मचारियों ने झाड़ा पल्ला

दैनिक भास्कर की टीम जब बैंक के अंदर पहुंची और अफसरों व स्टाफ से बातचीत करने की कोशिश की, तो सभी ने साफ इनकार कर दिया। उन्होंने कहा कि उन्हें मीडिया को कोई बयान देने का अधिकार नहीं है। बैंक में पूरा स्टाफ बदल चुका है, जो जानकारी चाहिए, वह पुलिस से ही लें।

किसी भी कर्मचारी ने यह नहीं बताया कि शिवा राव रेड्डी बैंक के भीतर किस स्तर तक काम करता था या उसे किसकी शह मिली हुई थी।

जांच में बढ़ सकती है पीड़ितों की संख्या

शुरुआती जांच में करीब 100 लोगों के ठगे जाने की शिकायत सामने आई है, लेकिन पुलिस और जांच एजेंसियों का मानना है कि यह संख्या इससे कहीं ज्यादा हो सकती है। जांच में यह भी सामने आया है कि कई खातों में बड़ी रकम ट्रांसफर की गई, जिनमें मोहन राव रेड्डी, विकास और एक मुस्लिम महिला नाजिया के खाते शामिल हैं।

फिलहाल आरोपी शिवा रेड्‌डी समेत दो लोगों को जेल भेजा गया है, जबकि बैंक प्रबंधन की भूमिका और पूरे नेटवर्क की जांच जारी है।

पुलिस ने बैंक मित्र शिवा राव रेड्डी और उसके सहयोगी दीपक कुमार को गिरफ्तार किया।

पुलिस ने बैंक मित्र शिवा राव रेड्डी और उसके सहयोगी दीपक कुमार को गिरफ्तार किया।

अब पढ़िए क्या है पूरा मामला…

शकुंतला विश्वविद्यालय परिसर में बैंक ऑफ बड़ौदा की शाखा है। यहां पारा, बुद्धेश्वर और काकोरी सहित आसपास के तमाम लोगों के खाते खुले हैं। आरोप है यहां पर तैनात बैंक मित्र शिवा ने बैंक कर्मियों के साथ मिलकर 100 से ज्यादा खाता धारकों के खाते से पैसा गायब कर दिए। ये रकम करीब 5 करोड रुपए आंकी जा रही है।

दो आरोपियों की हो चुकी है गिरफ्तारी

करोड़ों रुपए की ठगी के मामले में पारा पुलिस ने बैंक मित्र शिवा राव और उसके सहयोगी रहे पूर्व सिक्योरिटी गार्ड को गिरफ्तार किया है। आरोपी के पास से 2.38 लाख रुपए और बैंक से जुड़े कई महत्वपूर्ण दस्तावेज बरामद किए गए हैं।

सहयोगी दिलीप कुमार दुबग्गा के दौलतखेड़ा का रहने वाला है। पहले इसी बैंक परिसर के एटीएम बूथ में सिक्योरिटी गार्ड था। वर्ष 2019 में नौकरी से हटाए जाने के बाद भी दिलीप बैंक परिसर में चाय पिलाने और बैंक खोलने बंद करने का काम करता था।

—————-

संबंधित खबर भी पढ़िए…

लखनऊ में 100 से ज्यादा खातों से लाखों रुपए गायब:बेटियों की शादी की डेट कैंसिल, बैंक मित्र ने आलीशान घर बनवाया

‘ भैया क्या बताएं… तीन बेटियां हैं। उनकी शादी के लिए एक-एक रुपया जोड़कर 2 साल पहले 7 लाख 80 हजार रुपए की एफडी कराई थी। सोचा था ये पैसा बेटियों की शादी में काम आएगा। पिछले साल नवंबर में जैसे-तैसे करके एक बेटी की शादी की थी। दूसरी की 18 फरवरी को शादी होनी है। पूरी खबर पढ़ें

Share This Article
Leave a comment

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *