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इलाज के दौरान लापरवाही से जुड़ा एक गंभीर मामला आगरा में सामने आया है। महिला की मौत के बाद उसके पति द्वारा डॉक्टरों और बीमा कंपनियों पर लगाए गए आरोपों की सुनवाई करते हुए जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग ने अहम निर्णय सुनाया है। आयोग ने बीमा कंपनी को
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शमशाबाद रोड निवासी बीरन पंचोरी ने उपभोक्ता अदालत में दायर वाद में बताया कि वर्ष 2012 में उनकी पत्नी को पीठ और कमर में तेज दर्द की शिकायत थी। इस दौरान उन्होंने डॉ. मनोज शर्मा से परामर्श लिया और दवाएं लीं, लेकिन आराम न मिलने पर आगे भी अन्य चिकित्सकों से इलाज कराया गया। इसके बाद अलग-अलग स्थानों पर अल्ट्रासाउंड और अन्य चिकित्सकीय जांचें कराई गईं।
शिकायतकर्ता के अनुसार इलाज, जांच और डॉक्टरों की फीस पर करीब दो लाख रुपये खर्च हो गए, इसके बावजूद पत्नी की हालत में कोई सुधार नहीं हुआ। आरोप है कि समय रहते सही इलाज न मिलने के कारण महिला की तबीयत लगातार बिगड़ती चली गई और अंततः 17 दिसंबर को उसकी मौत हो गई।
महिला की मौत के बाद पीड़ित पति ने संबंधित डॉक्टरों और बीमा कंपनियों के खिलाफ जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग में वाद दायर किया। मामले की सुनवाई के दौरान दोनों पक्षों की दलीलें सुनी गईं। आयोग के अध्यक्ष और सदस्यों ने प्रस्तुत दस्तावेजों और तथ्यों के आधार पर बीमा कंपनी को इलाज में खर्च हुए 1.75 लाख रुपये पीड़ित को देने का आदेश दिया।
हालांकि, आयोग ने पर्याप्त साक्ष्य न मिलने के कारण डॉक्टरों के खिलाफ लगाए गए आरोपों को खारिज कर दिया। आयोग का कहना था कि इलाज में प्रत्यक्ष लापरवाही सिद्ध नहीं हो सकी। फैसले के बाद पीड़ित को राहत मिली है।