आतंकी गोल्डी बराड़ के पेरेंट्स अरेस्ट:पंजाब पुलिस का एक्शन, अमृतसर के होटल से दबोचे, दो साल पुराने केस में हुई कार्रवाई

Actionpunjab
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आतंकी गोल्डी बराड़ के खिलाफ पंजाब पुलिस एक्शन मोड में है। पुलिस थाना सदर, श्री मुक्तसर साहिब की पुलिस ने उन्हें दो साल पुराने मामले में गिरफ्तार किया है। आरोपी अमृतसर में दरबार साहिब (स्वर्ण मंदिर) के पास एक होटल में ठहरे हुए थे। आरोपियों की पहचान शमशेर सिंह और उसकी पत्नी प्रीतपाल के रूप में हुई है, जिन्हें इस मामले में गिरफ्तार किया गया। जिस मामले में गिरफ्तारी हुई, उसकी एफआईआर तीन दिसंबर 2024 को दर्ज की गई थी। यह केस गांव उडेकरन के एक निवासी की शिकायत पर भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 308(4), 351(1) और 351(3) के तहत दर्ज किया गया। उन्हें आज अदालत में पेश किया जाएगा। फोन कर मांगी थी 50 लाख की रंगदारी शिकायतकर्ता ने बताया कि वह पिछले 33 सालों से शिक्षा विभाग में तैनात है। 27 नवंबर 2024 को सुबह के समय वह स्कूल में अपनी ड्यूटी पर था। उस समय सुबह साढ़े दस बजे से 11 बजे के बीच उसे व्हाट्सऐप पर एक विदेशी नंबर से कॉल आई। जब उसने फोन उठाया तो दूसरी तरफ बात कर रहे व्यक्ति ने खुद को बंबीहा गैंग का सदस्य बताया। साथ ही उससे 50 लाख रुपये की रंगदारी मांगी गई और जान से मारने की धमकियां दी गईं। कॉल करने वाले ने उसे धमकाया कि इस कॉल को हल्के में न ले। अगर पैसों का इंतजाम नहीं किया गया तो उसके परिवार के सदस्यों को नुकसान उठाना पड़ेगा और वह उन्हें भी जान से मार देगा। उसने यह भी कहा कि उसे शिकायतकर्ता के परिवार और घर की पूरी जानकारी है। आरोपी की कॉल्स का यह सिलसिला एक बार नहीं, बल्कि उसी दिन कई बार चला, जिससे वह काफी डर गया। हफ्ते बाद दोबारा कॉल तो शिकायत दी इसके बाद छह दिन बीत जाने के बाद, तीन दिसंबर को फिर कॉल आई, जब वह गांव में कहीं जा रहा था। डर के कारण उसने कॉल नहीं उठाई। उसने बताया कि वह पूरे दिन मानसिक रूप से परेशान रहा। आखिरकार उसने यह सारी बात अपने घर में बताई। परिवार की सलाह के बाद वह इस संबंध में पुलिस थाना सदर, श्री मुक्तसर साहिब पहुंचा और उस अज्ञात व्यक्ति के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की मांग की, जो बार-बार जान से मारने की धमकियां दे रहा था और फिरौती मांग रहा था। पुलिस ने केस कर लिया था दर्ज मुक्तसर साहिब पुलिस के मुताबिक, जब इस मामले में एफआईआर दर्ज की गई, उस समय बंबीहा गैंग और गोल्डी बराड़ साथ-साथ काम कर रहे थे। पुलिस जांच में यह भी सामने आया है कि गोल्डी के परिजनों के पास आय का कोई वैध स्रोत नहीं था और वे कथित तौर पर फिरौती से मिली रकम पर ही गुजर-बसर कर रहे थे।

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