![]()
लुधियाना जिले की जगराओं नगर कौंसिल के कार्यकारी प्रधान कवरपाल की अध्यक्षता में हुई पहली बैठक सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखे टकराव का शिकार हो गई। बैठक में पेश किए गए 20 प्रस्तावों में से 16 पर सहमति बन गई, लेकिन चार महत्वपूर्ण प्रस्तावों पर सदन में भारी विरोध देखने को मिला। बैठक की शुरुआत में पूर्व कौंसिल प्रधान की मां और एक पार्षद के निधन पर दो मिनट का मौन रखा गया।इसके तुरंत बाद ही राजनीतिक गरमाहट बढ़ गई। पहले ही प्रस्ताव पर कांग्रेस पार्षदों ने मोर्चा खोल दिया। यह प्रस्ताव 30 जुलाई 2025 को रद्द हो चुकी रिक्विजिशन मीटिंग को 19 जनवरी 2026 की बैठक में “पुष्टि” करने से संबंधित था। कांग्रेस पार्षद रमेश कुमार मेषी सहोता और अमन कपूर ने इस पर आपत्ति जताते हुए कहा कि जब उनकी पार्टी का कोई भी पार्षद उस बैठक में मौजूद नहीं था और न ही किसी ने हस्ताक्षर किए थे, तो इसकी पुष्टि क्यों की जाए। 13 प्रस्ताव पर माहौल गरम 13वें प्रस्ताव पर माहौल और अधिक विस्फोटक हो गया। यह प्रस्ताव कुत्तों की नसबंदी पर 9 लाख रुपये खर्च करने से संबंधित था। पार्षद कविता कक्कड़ ने इसे जनता के पैसे की खुली बर्बादी बताया। उन्होंने तर्क दिया कि नसबंदी से न तो कुत्तों के हमले रुके हैं और न ही पहले पारित प्रस्ताव कभी लागू हुए हैं। पार्षद कविता कक्कड़ ने सवाल उठाया कि जब आज तक किसी ने ठेका नहीं लिया, तो बार-बार वही प्रस्ताव किसके फायदे के लिए लाए जा रहे हैं। उन्होंने पहले कुत्तों के लिए शेल्टर बनाने की मांग की। बैठक का सबसे बड़ा टकराव 20वें प्रस्ताव पर सामने आया, जिसमें शहीद भगत सिंह कम्युनिटी हॉल को इनडोर स्टेडियम में बदलने का प्रस्ताव रखा गया था। अमीरों के लिए खेल स्टेडियम में नहीं बदलेगा पार्षद मेषी सहोता, जरनैल सिंह लोहट सहित कई पार्षदों ने इसे गरीब विरोधी कदम बताते हुए सिरे से खारिज कर दिया। पार्षदों ने स्पष्ट कहा कि यह हॉल गरीब परिवारों के विवाह, भोग और सामाजिक कार्यक्रमों का मुख्य सहारा है और इसे किसी भी कीमत पर अमीरों के लिए खेल स्टेडियम में नहीं बदला जाएगा। इसी दौरान पार्षद हिमांशू मलिक ने नगर कौंसिल की नाकामी गिनाते हुए कहा कि पूरा जगराओं अंधेरे में डूबा हुआ है और कौंसिल के पास एक बल्ब तक मौजूद नहीं है। इस पर कार्यकारी प्रधान कवरपाल को सफाई देते हुए कहना पड़ा कि जल्द ही सामान खरीदा जाएगा और शहर को जगमगाया जाएगा। कूड़े के मुद्दे पर भी उन्होंने एक महीने में समाधान का दावा किया, हालांकि विपक्ष ने इसे खोखला आश्वासन करार दिया। वहीं पार्षद कविता कक्कड़ और डिपल गोयल ने सरकार की 10 लाख रुपये वाली सेहत योजना को लेकर सवाल उठाते हुए मांग की कि इसके कार्ड नगर कौंसिल से ही बनाए जाएं, ताकि आम लोगों को दफ्तरों के चक्कर न काटने पड़ें।
बैठक में गैरहाजिरी भी बनी चर्चा का विषय
नगर कौंसिल की इस बेहद अहम बैठक से पूर्व प्रधान जतिंदरपाल राना समेत कई पार्षद नदारद रहे। गैरहाज़िर पार्षदों में रविंदरपाल राजू, दर्शाना रानी और सुधा भारद्वाज शामिल रहे, जबकि रंजीत कौर विदेश में होने के कारण बैठक में शामिल नहीं हो सकीं। सदन में यह सवाल भी उठा कि शहर के अहम मुद्दों पर होने वाली पहली बैठक में ही इतने पार्षदों की गैरहाज़िरी आखिर किस बात का संकेत है।