धारी देवी समेत चारधाम मंदिरों में मोबाइल फोन बैन:लॉकर और वन-वे सिस्टम के साथ दर्शन होंगे, गैर-हिंदुओं के प्रवेश पर रोक

Actionpunjab
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उत्तराखंड के पौड़ी गढ़वाल में स्थित धारी देवी मंदिर परिसर में फोन पर बैन लगा दिया गया है। धारी देवी मंदिर परिसर की व्यवस्थाओं और श्रद्धालुओं को बेहतर सुविधा देने के उद्देश्य से नगर निगम और मंदिर समिति की संयुक्त बैठक आयोजित की गई। बैठक की अध्यक्षता मेयर आरती भंडारी ने की। बैठक में तय किया गया कि मंदिर परिसर की पवित्रता और अनुशासन बनाए रखने के लिए मंदिर क्षेत्र में मोबाइल फोन पूरी तरह वर्जित रहेगा। श्रद्धालुओं को अपने मोबाइल और अन्य सामान रखने के लिए नगर निगम की ओर से लॉकर की व्यवस्था भी की जाएगी। इसके अलावा मंदिर में पैदल आने और जाने वाले श्रद्धालुओं के लिए वन-वे व्यवस्था लागू करने पर भी सहमति बनी, ताकि दर्शन व्यवस्था अधिक सुचारु और व्यवस्थित हो सके। बैठक में यह भी निर्णय लिया गया कि मंदिर परिसर को अतिक्रमण मुक्त कराया जाएगा। मेयर आरती भंडारी ने कहा कि धारी देवी मंदिर प्रदेश की आस्था का प्रमुख केंद्र है और नगर निगम की प्राथमिकता है कि यहां आने वाले श्रद्धालुओं को बेहतर सुविधाएं मिलें। इसके लिए मोबाइल प्रतिबंध, लॉकर व्यवस्था, वन-वे सिस्टम और अतिक्रमण हटाने जैसे कदम उठाए जा रहे हैं। ‘चारधाम मंदिर परिसरों में मोबाइल फोन और कैमरों पर बैन’ इधर चारधाम यात्रा को लेकर भी बड़े फैसले लिए गए हैं। बद्रीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति (बीकेटीसी) की बजट बैठक में बद्रीनाथ और केदारनाथ धाम सहित उसके अधीन आने वाले 48 मंदिरों में गैर-हिंदुओं के प्रवेश पर रोक लगाने का प्रस्ताव सर्वसम्मति से पारित किया गया है। साथ ही गढ़वाल कमिश्नर विनय शंकर पांडे ने बताया कि चारधाम मंदिर परिसरों में मोबाइल फोन और कैमरों पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगाया जाएगा। श्रद्धालुओं को मंदिर में प्रवेश से पहले अपने मोबाइल और कैमरे जमा करने होंगे। मंदिर से बाहर निकलने के बाद वे मंदिर को बैकग्राउंड में रखकर फोटो और वीडियो ले सकेंगे। मंदिर परिसरों में मोबाइल और कैमरों को सुरक्षित रखने के लिए अलग से व्यवस्था भी की जाएगी। 22 अप्रैल को खुलेंगे केदारनाथ धाम के कपाट केदारनाथ धाम के कपाट 22 अप्रैल 2026 को सुबह 8 बजे श्रद्धालुओं के लिए खोले जाएंगे। यह तिथि महाशिवरात्रि (15 फरवरी 2026) के अवसर पर ऊखीमठ में पारंपरिक पंचांग गणना के बाद घोषित की गई थी। इस साल केदारनाथ यात्रा पिछले साल की तुलना में पहले शुरू हो रही है। 2025 में धाम के कपाट 2 मई को खुले थे, जबकि इस बार 22 अप्रैल को खुलेंगे। यानी श्रद्धालु इस बार 10 दिन पहले बाबा केदार के दर्शन कर सकेंगे। भाई दूज पर बंद हुए थे धाम के कपाट इससे पहले 23 अक्टूबर 2025 को भाई दूज के अवसर पर केदारनाथ धाम के कपाट शीतकाल के लिए बंद किए गए थे। कपाट बंद होने के बाद बाबा की डोली पैदल मार्ग से रवाना होकर लगभग 55 किलोमीटर की यात्रा तय करते हुए 25 अक्टूबर को उखीमठ पहुंची थी, जहां ओंकारेश्वर मंदिर में शीतकालीन प्रवास शुरू हुआ। मंदिर समिति के अनुसार 2025 की यात्रा के दौरान 17,68,795 श्रद्धालुओं ने बाबा केदार के दर्शन किए। 2013 की आपदा के बाद यह दूसरा अवसर था जब इतनी बड़ी संख्या में भक्त धाम पहुंचे। 23 अप्रैल को खुलेंगे बद्रीनाथ धाम के कपाट बद्रीनाथ धाम के कपाट 2026 में 23 अप्रैल को सुबह 6:15 बजे श्रद्धालुओं के लिए खुलेंगे। बसंत पंचमी के मौके पर नरेंद्रनगर राजदरबार में पंचांग गणना के बाद यह तिथि तय की गई थी। चमोली में स्थित बद्रीनाथ धाम के कपाट इस बार पिछले साल के मुकाबले 11 दिन पहले खुलेंगे। वहीं उत्तरकाशी के गंगोत्री धाम और यमुनोत्री धाम के कपाट 19 अप्रैल को अक्षय तृतीया के पावन पर्व पर विधि-विधान से भक्तों के लिए खोले जाएंगे। 2025 में कब बंद हुए थे बद्रीनाथ, गंगोत्री और यमुनोत्री धाम के कपाट 2025 में उत्तरकाशी में स्थित गंगोत्री धाम के कपाट 22 अक्टूबर को विधि-विधान के साथ बंद किए गए। इसके अगले दिन ही दिन 23 अक्टूबर को यमुनोत्री धाम के कपाट विधि विधान से बंद कर दिए गए थे इसके बाद यात्रियों के लिए इन दोनों धामों में नियमित दर्शन बंद हो गए और शीतकालीन पूजा की व्यवस्थाएं शुरू कर दी गईं। वहीं चमोली जिले में स्थित बद्रीनाथ धाम के कपाट 25 नवंबर को दोपहर 2 बजकर 56 मिनट पर शीतकाल के लिए बंद किए गए थे। फिलहाल बद्रीनाथ की शीतकालीन पूजा जोशीमठ के नरसिंह मंदिर में चल रही है। पिछले पांच सालों में श्रद्धालुओं के आंकड़े बद्रीनाथ धाम में अप्रैल 2026 तक काम पूरा करने का लक्ष्य बद्रीनाथ धाम में पीएम नरेंद्र मोदी के ड्रीम प्रोजेक्ट के तहत मास्टर प्लान पूरा होने के बाद धाम साफ और परिसर बड़ा दिख रहा है। ड्रीम प्रोजेक्ट का उद्देश्य अगले 50 सालों की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए बद्रीनाथ को आधुनिक सुविधाओं से लैस करना है। करीब 424 करोड़ रुपए की लागत वाले इस प्रोजेक्ट को अप्रैल 2026 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है, ताकि अगली चारधाम यात्रा से पहले श्रद्धालुओं को बेहतर व्यवस्थाएं मिल सकें। यह मास्टर प्लान 85 एकड़ क्षेत्र में तीन चरणों में लागू किया जा रहा है। फेज-1 में शेषनेत्र और बद्रीश झील का सौंदर्याकरण, अलकनंदा रिवर फ्रंट और वन-वे लूप रोड का काम अंतिम चरण में है। फेज-2 में मंदिर परिसर का विस्तार और अस्पताल का निर्माण शामिल है।

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