हरियाणा के 6 जिलों में आज ओलावृष्टि की संभावना:50 KM/H की रफ्तार से तेज हवाएं चलेंगी, 9 जिलों में बारिश का अलर्ट

Actionpunjab
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हरियाणा में 4 अप्रैल को मौसम पूरी तरह बदला रहा। भारतीय मौसम विभाग के अनुसार राज्य के कई जिलों में आंधी, बारिश और ओलावृष्टि की गतिविधियां देखने को मिलीं। 50 से 60 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चलने और गरज-चमक के साथ बारिश का असर रहा। मौसम विभाग ने 4 अप्रैल के लिए प्रदेश के दक्षिण और पूर्वी हिस्सों में ऑरेंज अलर्ट जारी किया, जबकि अधिकांश अन्य जिलों में येलो अलर्ट लागू रहा। ऑरेंज अलर्ट वाले जिलों में गुरुग्राम, फरीदाबाद, पलवल, नूंह (मेवात), महेंद्रगढ़ और रेवाड़ी शामिल रहे, जहां तेज आंधी, बिजली गिरने और ओलावृष्टि की आशंका जताई गई। वहीं हिसार, भिवानी, रोहतक, सोनीपत, पानीपत, करनाल, कुरुक्षेत्र, अंबाला, यमुनानगर समेत बाकी जिलों में येलो अलर्ट जारी रहा। इस दौरान कई जगहों पर बादल छाए रहे और रुक-रुक कर हल्की से मध्यम बारिश हुई।
कल बारिश-ओलों से हालात बिगड़े
इससे एक दिन पहले 3 अप्रैल को प्रदेश के कई जिलों में तेज बारिश और ओलावृष्टि ने असर दिखाया। भिवानी, हिसार, सिरसा, पानीपत, नूंह और फतेहाबाद में तेज बारिश दर्ज की गई। नूंह, पानीपत और फरीदाबाद में ओले गिरे। नूंह में सड़कों पर ओलों की सफेद चादर बिछ गई। सिरसा में बिजली गिरने से एक मकान क्षतिग्रस्त हुआ और एक युवती घायल हो गई। लगातार बदलते मौसम के कारण किसानों और आमजन को परेशानियों का सामना करना पड़ा। अधिकतम तापमान में गिरावट
प्रदेश में बारिश और बादलों के कारण तापमान में गिरावट दर्ज की गई। औसत अधिकतम तापमान में करीब 3.6 डिग्री सेल्सियस की कमी आई, जिससे मौसम सामान्य से ठंडा महसूस हुआ। कई जिलों में तापमान सामान्य से नीचे रहा। नूंह में सबसे अधिक 34.8 डिग्री सेल्सियस तापमान दर्ज किया गया, जबकि चंडीगढ़, रोहतक और करनाल समेत कई जगहों पर तापमान 30 से 33 डिग्री के बीच रहा। दिन के तापमान में गिरावट के साथ रात का तापमान सामान्य के आसपास बना रहा। आने वाले दिनों में भी 2 से 3 डिग्री तक और गिरावट संभव है, जिससे मौसम सुहावना बना रह सकता है। किसानों के लिए एडवाइजरी
मौसम में बदलाव को देखते हुए किसानों को सावधानी बरतने की सलाह दी गई है। आगामी 3–4 दिनों तक गेहूं और सरसों की कटाई, मड़ाई व सिंचाई कार्य रोकने को कहा गया है, ताकि बारिश और तेज हवा से फसल को नुकसान न हो। तैयार सरसों की फसल को खेत में बांधकर सुरक्षित रखने की सलाह है। सब्जियों व दलहनी फसलों की बुवाई फिलहाल टालने को कहा गया है। फलदार पेड़ों में सिंचाई संतुलित रखें और कीट-रोग पर नजर बनाए रखें। पशुओं को खुले में न छोड़कर शेड में रखें तथा पोल्ट्री फार्म में उचित वेंटिलेशन बनाए रखने के निर्देश दिए गए हैं।

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