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राज्यसभा में विपक्ष के उपनेता प्रमोद तिवारी ने ईरान, इजराइल और अमेरिका के बीच हुए सीजफायर को दुनिया के लिए राहत भरा कदम बताया है। उन्होंने इसे स्थायी शांति में बदलने के लिए संधि वार्ता पर जोर दिया और भारत की विदेश नीति पर सवाल उठाए। प्रतापगढ़ के लालगंज में प्रतिनिधियों से बातचीत के दौरान तिवारी ने कहा कि सभी पक्षों को आत्मसंयम बरतते हुए सीजफायर को पूर्ण युद्धविराम में बदलने का प्रयास करना चाहिए। उन्होंने इस कदम को वैश्विक तनाव कम करने के लिए आवश्यक बताया। प्रमोद तिवारी ने प्रस्तावित संधि वार्ता के लिए पाकिस्तान के इस्लामाबाद को केंद्र बनाए जाने पर आपत्ति व्यक्त की। उन्होंने इसे भारत की विदेश नीति की अपरिपक्वता बताते हुए कहा कि अमेरिका और इजराइल के प्रति अत्यधिक झुकाव के कारण भारत की भूमिका कमजोर हुई है। उन्होंने चीन की भूमिका का भी उल्लेख किया और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर टिप्पणी करते हुए कहा कि कमजोर कूटनीति के चलते भारत वैश्विक मंच पर अलग-थलग पड़ता दिख रहा है। तिवारी ने इसे मोदी सरकार की विदेश नीति के लिए एक बड़ा आघात बताया। प्रमोद तिवारी ने यह भी कहा कि दो सप्ताह का सीजफायर देश में ईंधन और ऊर्जा संकट से राहत दिलाने में सहायक साबित हो सकता है। उन्होंने पूर्व केंद्रीय मंत्री मोहसिना किदवई के निधन पर दुख व्यक्त किया। प्रतापगढ़ दौरे के दौरान, उन्होंने लालगंज कैंप कार्यालय में कार्यकर्ताओं से मुलाकात कर जनसमस्याएं सुनीं और उनके समाधान का आश्वासन दिया। संगम चौराहे पर स्थानीय जनप्रतिनिधियों और कार्यकर्ताओं ने उनका स्वागत किया। इसके अतिरिक्त, उन्होंने बाबा घुइसरनाथ धाम में दर्शन-पूजन किया और वहां चल रहे पर्यटन विकास कार्यों की सराहना की।
प्रमोद तिवारी ने ईरान-इजराइल सीजफायर को बताया राहत भरा कदम:पूर्ण युद्धविराम की वकालत की, भारत की विदेश नीति पर उठाए सवाल
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