2017 कस्टोडियल डेथ केस में बड़ा मोड़:CBI कोर्ट ने 2 पूर्व पुलिसकर्मियों पर ट्रायल के दिए आदेश,1 मई को पेश होने का समन

Actionpunjab
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लुधियाना के थाना दुगरी में साल 2017 में कस्टोडियल डेथ केस में अहम बड़ा मोड़ आया है। स्पेशल सीबीआई कोर्ट मोहाली ने दो रिटायर्ड पंजाब पुलिस अधिकारियों के खिलाफ गंभीर धाराओं में संज्ञान लेते हुए ट्रायल चलाने का आदेश दिया है। अदालत ने पूर्व SHO दुगरी दलवीर सिंह और रिटायर्ड ASI मनजीत सिंह को 1 मई 2026 को कोर्ट में पेश होने के लिए समन जारी किया है। दोनों पर आपराधिक साजिश, सबूतों से छेड़छाड़, अवैध हिरासत और IPC की अन्य धाराओं में केस चलेगा। क्या है पूरा मामला
यह केस अगस्त 2017 में रमनदीप कौर की कथित कस्टोडियल मौत से जुड़ा है। मामले ने तूल पकड़ने के बाद पंजाब एंड हरियाणा हाई कोर्ट ने जांच सेंट्रल ब्यूरो आफ इनवेस्टिगेशन (CBI) को सौंप दी थी। CBI की रिपोर्ट में कई चौंकाने वाले खुलासे हुए। महिला और उसके साथी को अवैध रूप से हिरासत में रखा गया। गिरफ्तारी और तलाशी के दस्तावेज फर्जी पाए गए। कई दस्तावेज मौत के बाद तैयार किए गए है। रिकॉर्ड में जाली हस्ताक्षर किए गए है। मालखाना रजिस्टर में एंट्री गायब मिली है। दस्तावेजों में भारी गड़बड़ी और छेड़छाड़ के संकेत कोर्ट ने क्या कहा
अदालत ने रिकॉर्ड पर मौजूद साक्ष्यों को पर्याप्त मानते हुए कहा कि आरोपियों के खिलाफ ट्रायल चलाने के लिए प्राइमा फेसिया ( Prima Facie) केस बनता है। इसके बाद औपचारिक रूप से संज्ञान लेकर ट्रायल शुरू करने का आदेश दिया गया। यह है शिकायतकर्ता के आरोप
शिकायतकर्ता मुकुल गर्ग के मुताबिक 3 अगस्त 2017 को दुगरी पुलिस ने उन्हें और उनकी मंगेतर को गिरफ्तार किया। दोनों पर साइबर क्राइम और अवैध निकासी का आरोप लगाया था। 4-5 अगस्त की रात पूछताछ के दौरान प्रताड़ना से रमनदीप की मौत हुई है। शिकायत देने के बाद पुलिस ने रिकॉर्ड में हेरफेर किया। SIT ने क्या कहा था
2019 में हाईकोर्ट के निर्देश पर बनी SIT ने मेडिकल रिपोर्ट के आधार पर मौत को आत्महत्या बताया था, न कि गला घोंटना। हालांकि, चार पुलिसकर्मियों पर लापरवाही से मौत का केस दर्ज किया गया था। CBI ने जांच में कुछ वरिष्ठ अधिकारियों के नाम भी लिए थे, लेकिन उनके खिलाफ अभियोजन की मंजूरी नहीं मिली। पंजाब सरकार के तत्कालीन गृह विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव ने कहा कि उनके खिलाफ पर्याप्त सबूत नहीं हैं। शिकायतकर्ता ने इस फैसले को हाईकोर्ट में चुनौती दी है।

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