Varuthini ekadashi puja vidhi dan vishnu mahalaxmi tips, significance of varuthini ekadashi vrat

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2 दिन पहले

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सोमवार, 13 अप्रैल को वैशाख माह के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि पड़ रही है, इसे वरुथिनी एकादशी के नाम से जाना जाता है। यह व्रत भगवान विष्णु की कृपा पाने और घर-परिवार में सुख-समृद्धि बनाए रखने की कामना से किया जाता है। मान्यताओं है कि इस दिन विधि-विधान से पूजा करने और व्रत रखने से अक्षय पुण्य मिलता है, ऐसा पुण्य जिसका असर जीवनभर बना रहता है।

उज्जैन के ज्योतिषाचार्य पं. मनीष शर्मा के मुताबिक, स्कंद पुराण के वैष्णव खंड में एकादशी महात्म्य नाम का अध्याय है, इसमें साल भर की सभी एकादशियों के बारे में बताया गया है। पौराणिक कथा है कि भगवान श्रीकृष्ण ने पांडवों को एकादशियों का महत्व बताया था। यह व्रत भक्तों की मनोकामनाएं पूरी करने वाला माना जाता है। वरुथिनी एकादशी की पूजा में भगवान विष्णु और महालक्ष्मी का दक्षिणावर्ती शंख से विशेष अभिषेक करना चाहिए। अभिषेक के लिए केसर मिश्रित का इस्तेमाल करेंगे, तो बहुत शुभ रहेगा।

एकादशी की पूजा में भगवान को लाल-पीले चमकीले वस्त्र अर्पित करना चाहिए। विष्णु-लक्ष्मी को चंदन या हल्दी से तिलक लगाएं। पूजा में धूप और दीप जलाकर भगवान की आरती करें। पीले फूल और फूलों की माला अर्पित करें। भोग में केला, गुड़ और मिठाई तुलसी के पत्तों के साथ चढ़ाएं। मान्यता है कि तुलसी के बिना भगवान विष्णु भोग स्वीकार नहीं करते हैं। पूजा में ऊँ नमो भगवते वासुदेवाय मंत्र का जप करना चाहिए।

ऐसे कर सकते हैं एकादशी व्रत

एकदाशी व्रत की शुरुआत दशमी (12 अप्रैल) की शाम से हो जाती है। दशमी की शाम को सात्विक खाना खाएं। शाम को भगवान की पूजा करें। अगले दिन यानी एकादशी (13 अप्रैल) की सुबह सूर्योदय से पहले जागें, उगते सूर्य को जल चढ़ाएं। इसके बाद घर के मंदिर में भगवान के सामने पूजा और एकादशी व्रत करने का संकल्प लें। भगवान की पूजा करें और पूजा के बाद पूरे दिन निराहार रहें यानी अन्न नहीं खाना है। जो लोग भूखे नहीं रह पाते हैं, फलाहार ले सकते हैं, दूध-फलों का रस पी सकते हैं। शाम को भी भगवान की पूजा करें। अगले दिन यानी द्वादशी (14 अप्रैल) तिथि पर भी सुबह पूजा करनी चाहिए। जरूरतमंद लोगों को खाना खिलाएं। इसके बाद खुद खाना खाएं। इस तरह एकादशी व्रत पूरा होता है।

एकादशी पर करें इन चीजों का दान

शास्त्रों में एकादशी व्रत को आत्मशुद्धि का माध्यम बताया गया है। इस दिन व्रत रखने से भक्त के मन, वचन और कर्म की शुद्धि होती है, जिससे जीवन में सकारात्मकता आती है। नकारात्मक विचार दूर होते हैं। इस दिन दान-पुण्य करने का विशेष महत्व है। व्रत-पूजा करने के साथ ही तिल, अन्न, भोजन, जूते-चप्पल, छाता, मटका, पानी, धन और हल्दी का दान कर सकते हैं।

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