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होशियारपुर से जर्मनी गईं महिला ने अपनी 2 बेटियों को रेस्टोरेंट, स्टोर में काम कर पढ़ाकर जर्मनी की संसद तक पहुंचा दिया। टांडा के गांव रड़ा में बयाही मनदीप कौर 2012 में 8 और 5 साल की बेटी को लेकर पहले पुर्तगाल और फिर जर्मनी में गईं।
यहां दोनों बहनों ने पढ़ाई कर डच सीखी। बड़ी बहन हरप्रीत कौर (23) ने 2022 में पहली बार जर्मनी में औसलैंडर (बाहरी लोग) की यूनियन का चुनाव जीता और वालंटियर बनीं। अब उसने 2026 में सिटी काउंसिल का भी चुनाव जीत लिया है। इसमें उसे डच लोगों के 5 हजार वोट मिले।
राजनीति में वालंटियर के तौर पर सेवा करने के भाव से छोटी बहन कोमलप्रीत कौर ने भी 2026 में ओसलैंडर चुनाव में भाग लिया और उसे भी लोगों ने भारी बहुमत से चुना। अब दोनों बहनें जर्मन की संसद में भारतीय लोगों सहित जर्मन में आए बाहरी लोगों के मुद्दे उठा रही हैं।
हरप्रीत कौर ने जीता दूसरा इलेक्शन
हरप्रीत कौर ने औसलैंडर और सिटी काउंसिल सहित ये दूसरा इलेक्शन जीता है। हरप्रीत की मां मनदीप कौर ने बताया कि जर्मनी आकर उनको सबसे बड़ी प्राब्लम डच सीखने की आई। बड़ी बेटी हरप्रीत कौर ने पहले सोशल सर्विस प्रोजैक्ट को लेकर औसलेंडर का चुनाव जीता। मनदीप कौर ने बताया कि जर्मनी में बाहरी लोगों को औसलेंडर कहा जाता है। औसलैंडर के चुनाव में जर्मनी के स्थानीय लोग वोटिंग नहीं करते। ये वालंटियर के तौर पर राजनीति में प्रवेश होता है। औसलैंडर चुनाव जीतने के बाद 2 बार संसद जाकर बाहरी लोगों की प्राब्लम को उठाया जा सकता है। औसलेंडर के तौर पर बेटी का काम पसंद आने पर उसे सिटी काउंसिल का चुनाव लड़ने का मौका मिला और वो यहां के हैसल शहर में 5 हजार वोट ले पाई। 37 कैंडिडेट थे, UKB पार्टी से लड़ा चुनाव
मां मनदीप कौर ने बताया कि बड़ी बेटी हरप्रीत कौर ने यहां की लोकल पार्टी UKB (उकाबे) से चुनाव लड़ा। मार्च 2026 में सिटी काउंसिल के चुनाव में पार्टी ने उसे खड़ा होने के लिए कहा। उनकी पार्टी के इलेक्शन में 37 कैंडिडेट थे जिनमें से 18 को जीत मिली। इसमें एक उनकी बेटी हरप्रीत कौर थीं। हरप्रीत को 5 हजार वोट मिले। यूकेबी पार्टी के मुकाबले में राष्ट्रीय पार्टियों सीयूडी और एसपीडी के कैंडिडेट थे। सबसे ज्यादा मैंबर सीयूडी के जीते।
मास्टर इन साइंस एंड पॉलिटिकल साइंस कर रहीं हरप्रीत कौर
मां ने बताया कि हरप्रीत कौर पढ़ाई में होशियार है। यहां वो मास्टर इन साइंस एंड पॉलिटिकल साइंस कर रही है। बेटी का सपना टीचर बनता है। भास्कर के साथ बातचीत में मां मनदीप कौर ने बताया कि यहां पर राजनेता को नौकरी करना जरूरी होती है। नौकरी यहां पर प्राइमरी है और राजनीति सेवा के लिए। राजनीति छोड़नी भी पड़े तो नौकरी चलती रहती है। यहां राजनेताओं के पास नौकरी होने से राजनीति में करप्शन नहीं है।
छोटो बेटी को सवाल चुभा तो इलेक्शन लड़ लिया
मां मनदीप कौर ने बताया कि छोटी बेटी ने भी ग्रेजुएशन पूरा किया गया तो एक इंटरव्यू में उससे सवाल किया गया कि तुमने पढ़ाई तो पूरी कर ली लेकिन ये बताओ कि लोगों के लिए क्या किया। मां ने बताया कि जर्मनी में नौकरी पाने के लिए समाजसेवा के क्षेत्र में प्रोजैक्ट करना जरूरी होता है। इसलिए छोटी बेटी ने बड़ी से सलाह लेकर औसलेंडर के चुनाव लड़ने का फैसला किया। बड़ी बहन ने इसमें उसकी मदद की और वह भी चुनाव जीत गई।
चुनाव से पहले डरी, बोली-मां किसी को मत बताना, हार गई तो बेइज्जती होगी
मां ने छोटी बेटी का दिलचस्प किस्सा शेयर करते हुए बताया कि उसका राजनीति में बहुत इंट्रस्ट नहीं है। समाजसेवा के प्रौजेक्ट के लिए ही उसने चुनाव में हिस्सा लिया। क्योंकि औसलेंडर का चुनाव जीतने के बाद सरकार से असानी से समाजसेवा के प्रौजेक्ट मिल जाते हैं। इनको पूरा करने पर सर्टिफिकेट भी मिलता है। जब छोटी बेटी चुनाव में खड़ी हुई तो कहने लगी की मां मुझे डर लग रहा है। किसी को बताना मत कि मैं चुनाव में खड़ी हूं। कहीं हार गई तो बेइज्जती होगी लेकिन वो जीत गई।
होशियारपुर की सगी बहनें जर्मनी में जीतीं इलेक्शन:जर्मनी की संसद पहुंचीं, मां ने काम कर करवाई स्टडी, पढ़ाई के साथ कर रहीं राजनीति
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