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- Mohini Ekadashi Vrat 2026: Puja Vidhi & Lord Vishnu Mohini Avatar Story In Hindi, Significance Of Mohini Ekadashi
16 घंटे पहले
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आज (27 अप्रैल) मोहिनी एकादशी है। वैशाख मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि पर मोहिनी एकादशी व्रत किया जाता है। इस दिन भगवान विष्णु के मोहिनी स्वरूप की पूजा-अर्चना की जाती है। मान्यता है कि इसी तिथि पर भगवान विष्णु ने मोहिनी रूप धारण किया था, इसलिए इस एकादशी का नाम मोहिनी एकादशी पड़ा।
- मोहिनी अवतार की पौराणिक कथा
पौराणिक कथा है कि समुद्र मंथन के समय जब अमृत प्राप्त हुआ तो देवताओं और असुरों के बीच उसे पीने के लिए युद्ध होने लगा। बल के आधार पर देवता असुरों से जीत नहीं पा रहे थे।
ऐसे में भगवान विष्णु ने मोहिनी रूप धारण किया और असुरों को अपने मोह में बांध लिया। मोहिनी अवतार ने अमृत देवताओं को पिलाया, जिससे देवताओं को अमरत्व प्राप्त हुआ। ये घटना वैशाख शुक्ल एकादशी तिथि पर घटित हुई थी, इसलिए इसे मोहिनी एकादशी कहा जाता है।
- व्रत और पूजा विधि
एकादशी पर स्नान के बाद भगवान विष्णु की प्रतिमा के सामने घी का दीपक जलाकर व्रत और पूजा करने का संकल्प लें।
एक कलश पर लाल वस्त्र बांधकर उसकी पूजा करें। भगवान विष्णु की प्रतिमा स्थापित करें।
प्रतिमा को स्नान कराकर हार-फूल और नए वस्त्रों से श्रृंगार करें।
भगवान विष्णु को पीले फूल, तुलसी पत्र और पंचामृत अर्पित करें।
धूप-दीप से जलाएं। फल और मिष्ठान का भोग लगाएं।
रात में जागरण करते हुए भगवान के मंत्रों का जप करें, भजन-कीर्तन करें। इस व्रत में केवल फलाहार किया जाता है।
अगले दिन यानी द्वादशी तिथि पर सुबह जल्दी उठें और स्नान के बाद भगवान की पूजा करें। पूजा के बाद जरूरतमंद लोगों को अनाज, जूते-चप्पल, कपड़े, पानी, मटका, धन का दान करें। भोजन कराएं। इसके बाद स्वयं भोजन करें। इस तरह ये व्रत पूरा होता है।
- मोहिनी एकादशी व्रत से जुड़ी मान्यताएं
मान्यता है कि इस व्रत से मन और शरीर में संतुलन बना रहता है। परेशानियों से लड़ने की शक्ति मिलती है। यह व्रत यश और कीर्ति बढ़ाने वाला माना गया है। कहा जाता है कि इस व्रत से भय-संशय खत्म हो जाते हैं। भक्त सभी तरह के मोह से दूर होता है, इसलिए इसे मोहिनी एकादशी कहा गया है। इस व्रत से व्यक्ति के पापों का क्षय होता है। भक्त को समाज में मान-सम्मान मिलता है और अटके कामों में सफलता मिलती है।
