11 घंटे पहले
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अभी ज्येष्ठ मास चल रहा है। इस बार ज्येष्ठ में अधिक मास (पुरुषोत्तम मास) रहेगा यानी ज्येष्ठ एक नहीं, बल्कि दो महीनों तक रहेगा। 16 मई तक ज्येष्ठ कृष्ण पक्ष रहेगा, इसके बाद 17 मई से अधिकमास मास शुरू होगा, जो कि 15 जून तक चलेगा। इसके बाद ज्येष्ठ शुक्ल पक्ष शुरू हो जाएगा, जो कि 29 जून तक रहेगा। अधिक मास में विवाह, गृह प्रवेश, मुंडन, जनेऊ संस्कार जैसे मांगलिक कार्यों के लिए मुहूर्त नहीं रहते हैं।
उज्जैन के ज्योतिषाचार्य पं. मनीष शर्मा के मुताबिक, अधिक मास में भगवान विष्णु और उनके अवतारों की पूजा खासतौर पर की जाती है। इस महीने को विष्णु जी के ही एक नाम पुरुषोत्तम से भी जाना जाता है। इन दिनों में तीर्थ स्नान, मंदिरों में दर्शन-पूजन, सत्संग, मंत्र जप, दान-पुण्य, पूजन आदि शुभ काम किए जाते हैं। अंग्रेजी कैलेंडर में लीप ईयर होता है और हिन्दी पंचांग में अधिक मास। लीप ईयर में सिर्फ एक दिन बढ़ता है, जबकि अधिक मास से हिन्दी वर्ष में पूरा एक महीना बढ़ जाता है। दरअसल, ये सौर वर्ष और चंद्र वर्ष में अंतर की वजह से होता है।
लीप ईयर में बढ़ता है एक दिन
अंग्रेजी कैलेंडर पृथ्वी की सूर्य की परिक्रमा के आधार पर चलता है। एक अंग्रेजी साल में 365 दिन होते है और लीप ईयर में 366 दिन होते हैं। इसकी वजह ये है कि पृथ्वी को सूर्य की पूरी परिक्रमा लगाने में 365 दिन और करीब 6 घंटे का समय लगता है।
हर चार साल में ये अतिरिक्त 6 घंटे एक दिन के बराबर हो जाते हैं। इस एक दिन को कैलेंडर में एडजस्ट करने के लिए कैलेंडर में एक दिन बढ़ाया जाता है। इस कारण सामान्य साल में 365 दिन और लीप ईयर में 366 दिन होते हैं।
लीप ईयर मालूम करने का तरीका ये है कि जिस वर्ष को अंक 4 से विभाजित किया जा सकता है, वह लीप ईयर होता है। जैसे 2016, 2020, 2024, 2028. लीप ईयर में फरवरी 29 दिनों का होता है।
अधिक मास की वजह से 13 महीनों का होगा इस वर्ष का संवत् 2083
अधिक मास हिन्दी पंचांग के एक अतिरिक्त महीने को कहते हैं। ये हर तीन साल में एक बार आता है। जिस संवत् में अधिक मास होता है, वह संवत् 13 महीनों का होता है। हिन्दी पंचांग में काल गणना सूर्य और चंद्र के आधार पर की जाती है। जब चंद्र 12 राशियों का एक पूरा चक्कर लगा लेता है, तब एक चंद्र माह होता है। चंद्र को 12 राशियों का चक्कर लगाने में करीब 28-29 दिन लगते हैं। इस कारण हिन्दी पंचांग का एक चंद्र वर्ष 354.36 दिन का होता है।
सूर्य एक राशि में करीब 30.44 दिन रहता है। ये ग्रह 12 राशियों का एक चक्कर 30.44 x 12 = 365.28 दिन लगता है। इसे सौर वर्ष कहते हैं। सौर वर्ष और चंद्र वर्ष में 10.92 दिन (365.28 – 354.36) का अंतर हर साल आ जाता है। इस अंतर को एडजस्ट करने के लिए हिन्दी पंचांग में हर 32 महीने और 14-15 दिन के बाद अधिक मास रहता है।
अधिक मास में करें ये शुभ काम
अधिक मास में भगवान विष्णु की विशेष पूजा करनी चाहिए। विष्णु पुराण, श्रीमद् भागवत पुराण, रामायण जैसे ग्रंथों का पाठ करना चाहिए। साधु-संतों के प्रवचन सुनना चाहिए। अपने इष्टदेव के मंत्रों का जप करें।
इन दिनों में गंगा, यमुना, नर्मदा, शिप्रा जैसी पवित्र नदियों में स्नान करें। नदी स्नान करना संभव न हो, तो घर पर ही पानी में गंगाजल मिलाकर स्नान कर सकते हैं।
भगवान शिव का विशेष अभिषेक करें। शिवलिंग पर चंदन का लेप करें। बिल्व पत्र, धतुरा, आंकड़े के फूल, दही, पंचामृत, शहद आदि चीजें अर्पित करें। धूप-दीप जलाकर भगवान की आरती करें। ऊँ नम: शिवाय मंत्र का जप करें।
घर में विराजित बाल गोपाल का अभिषेक करें। भगवान को माखन-मिश्री और तुलसी चढ़ाएं। कृं कृष्णाय नम: मंत्र का जप करें।
इन दिनों में जूते-चप्पल, कपड़े, अनाज, खाना, तिल, गुड़, तेल, धन का दान करना चाहिए। किसी गोशाला में गायों की देखभाल के लिए धन का दान करें। गायों को हरी घास खिलाएं।
