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साइबर पुलिस थाना जयपुर ने शुक्रवार को भंडारी हॉस्पिटल से जुड़े वित्तीय गड़बड़ी और साइबर धोखाधड़ी के मामले में कार्रवाई करते हुए मनीष कुमार सोनी को गिरफ्तार किया है। पुलिस के अनुसार आरोपी मनीष कुमार सोनी, पुत्र राजेन्द्र कुमार सोनी, भंडारी हॉस्पिटल में कार्यकारी सहायक के पद पर कार्यरत था। जांच में सामने आया कि उसने मरीजों से प्राप्त लगभग 80 से 90 लाख रुपये की राशि अस्पताल के खातों में जमा कराने के बजाय अपने निजी बैंक खातों में ट्रांसफर कर ली। आरोप है कि आरोपी ने refrens.com वेबसाइट पर अस्पताल का फर्जी अकाउंट बनाकर डॉ. चिराग भंडारी के नाम का दुरुपयोग किया और मरीजों से अवैध रूप से शुल्क वसूला। पुलिस ने मामले में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की विभिन्न धाराओं और आईटी एक्ट की धारा 66D के तहत अपराध दर्ज किया है। पुलिस अधिकारियों के मुताबिक आरोपी को शनिवार को अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट क्रम संख्या-16, जयपुर मेट्रो प्रथम के समक्ष पेश किया जाएगा। मामले में डिजिटल साक्ष्यों की बरामदगी और वित्तीय लेनदेन की जांच जारी है। बता दें कि मामले से जुड़े एक अन्य घटनाक्रम में सेंट्रल ड्रग्स स्टैंडर्ड कंट्रोल ऑर्गेनाइजेशन (CDSCO) और राजस्थान ड्रग कंट्रोल विभाग की टीम ने गोपालपुरा बाइपास स्थित भंडारी हॉस्पिटल पर छापा मारा था। विभाग को शिकायत मिली थी कि “ट्राइमेक्स” नाम से बिना अनुमोदन वाला इंजेक्शन ऑनलाइन बेचा जा रहा है। राजस्थान के ड्रग कंट्रोलर अजय फाटक ने बताया कि “ट्राइमेक्स” नाम का कोई इंजेक्शन विभाग में पंजीकृत नहीं है। जांच में सामने आया कि यह इंजेक्शन ‘पौपावेरिन’, ‘एल्प्रोस्टैडिल’ और ‘क्लोरप्रोमाजिन’ दवाओं के मिश्रण से तैयार किया जा रहा था। विभाग ने अस्पताल से संबंधित दस्तावेज जब्त कर जांच शुरू कर दी है। वहीं अस्पताल प्रशासन ने सफाई देते हुए कहा कि पूरा फर्जीवाड़ा मनीष कुमार सोनी ने “ओमेन फार्मेसी” कंपनी के नाम से किया और डॉक्टर के फर्जी हस्ताक्षर कर मरीजों से पैसे अपने खातों में जमा करवाए।
भंडारी हॉस्पिटल में 90 लाख की साइबर-ठगी में कर्मचारी गिरफ्तार:आरोपी मनीष ने मरीजों के पैसे निजी खातों में किए ट्रांसफर; ‘ट्राइमेक्स’ इंजेक्शन की बिक्री से जुड़ा मामला
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