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पाली शहर में शनिवार को शनि जयंती पर भगवान शनिदेव के मंदिरों में दिनभर धार्मिक आयोजन हुए। शनि जयंती और अमावस्या के विशेष संयोग पर शहर के खेतावास के निकट स्थित शनि धाम, राणा प्रताप चौक शनि धाम मंदिर सहित पानी दरवाजा स्थित शनिदेव के मंदिरों में श्रद्धालुओं की भीड़ रही। शनिदेव को तेल चढ़ाकर श्रद्धालुओं ने खुशहाली की कामना की।
श्रद्धालुओं ने शनि जयंती पर काले तिल, काली उड़द, सरसों का तेल, लोहे की वस्तुएं, काले कपड़े, जूते-चप्पल, छाता आदि गरीबों और जरूरतमंदों को दान किए। नवग्रहों में माने जाते हैं प्रमुख
संत मदन राजस्थानी ने बताया कि सनातन धर्म में शनि जयंती का विशेष महत्व है। यह दिन न्याय, कर्मफल और दंड के अधिपति भगवान शनिदेव के जन्मोत्सव के रूप में श्रद्धा और आस्था के साथ मनाया जाता है। सच्चे भक्तों को फल देते हैं शनि
शनि देव को कठोर और क्रूर ग्रह के रूप में देखा जाता है, लेकिन वे न्यायप्रिय हैं और सच्चे भक्तों को सदैव उनका फल देते हैं। शनि की साढ़ेसाती, ढैया और शनि दोष जैसी स्थितियों से लोग भयभीत रहते हैं, लेकिन इस दिन विधिवत पूजा और उपासना से इन सभी दोषों से मुक्ति मिल सकती है।
विश्वकर्मा समाजबंधुओं ने खिलाया गायों को चारा
शनि अमावस्या पर भगवान विश्वकर्मा की प्रतिमा का विशेष श्रृंगार और महा आरती वीडी नगर स्थित समाज के मंदिर में की गई। साथ ही गौशाला जाकर गायों को चारा खिलाया गया।
श्री विश्वकर्मा जांगिड़ समाज सेवा समिति पाली के तत्वावधान में श्री जांगिड़ ब्राह्मण नवयुवक मंडल की ओर से गर्मी को देखते हुए पक्षियों के लिए 201 परिंडे लगाने गए। मंदिर में शाम को विश्वकर्मा महिला मंडल ने भजन कीर्तन किए। इस दौरान रामचंद्र पीड़वा, तुलसीराम, पारसमल, गंगाराम, लक्ष्मण, डायाराम, सूर्यप्रकाश, दिलीप, अमरचंद सहित कई समाजबंधु मौजूद रहे।
पाली में शनिदेव का किया 5001 किलो तेल से महाभिषेक:दुर्लभ संयोग के साथ आई शनि जयंती, मंदिरों में रही श्रद्धालुओं की भीड़
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