नई दिल्लीकुछ ही क्षण पहले
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दिल्ली के लाल किला के पास कार ब्लास्ट मामले की NIA जांच में बड़ा खुलासा हुआ है। एजेंसी की चार्जशीट के मुताबिक, अल-कायदा से जुड़े आतंकियों ने टेरर इंजीनियरिंग के लिए ChatGPT और YouTube जैसे डिजिटल प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल किया था।
आतंकियों ने ‘रॉकेट कैसे बनाएं और मिक्सचर किस रेशियो में होना चाहिए’ जैसे सवाल सर्च किए। जांच में रॉकेट IED, ड्रोन और विस्फोटक तैयार करने की साजिश का भी खुलासा हुआ है। NIA ने 14 मई को स्पेशल कोर्ट में 7500 पन्नों की चार्जशीट दाखिल की।
रविवार को इससे जुड़ी जानकारी सामने आई। इसमें बताया गया कि 10 नवंबर 2025 को दिल्ली में कार ब्लास्ट के पीछे AQIS (Al-Qaida in the Indian Subcontinent) से जुड़े मॉड्यूल का हाथ था। धमाके में 11 लोगों की मौत हुई थी और कई घायल हुए थे।
मामले में 8 आतंकी गिरफ्तार किए गए, जिनमें 5 पेशे से डॉक्टर हैं। चार्जशीट में मुख्य आरोपी पुलवामा निवासी डॉ. उमर-उन-नबी का भी नाम है, जिसकी मौत हो चुकी है। वह हरियाणा के फरीदाबाद स्थित अल-फलाह यूनिवर्सिटी में असिस्टेंट प्रोफेसर रह चुका था।

1. अल-कायदा से जुड़े मॉड्यूल का खुलासा
NIA जांच में सामने आया कि जसिर बिलाल वानी अल-कायदा इन इंडियन सबकॉन्टिनेंट (AQIS) से जुड़े आतंकी संगठन अंसार गजवत-उल-हिंद (AGuH) मॉड्यूल का “इन-हाउस इंजीनियर” था। AQIS और उसके सभी सहयोगी संगठनों को गृह मंत्रालय आतंकी संगठन घोषित कर चुका है। चार्जशीट के मुताबिक, जसिर 2024-25 के दौरान हरियाणा के फरीदाबाद स्थित अल फalah यूनिवर्सिटी कैंपस में दो-तीन बार “तकनीकी सहायता” देने के लिए रुका था।
2. डॉक्टरों ने IED बनाने में की मदद
जांच में पता चला कि जसिर की मुलाकात मुख्य आरोपी डॉ. उमर-उन-नबी से डॉ. आदिल अहमद राथर ने कराई थी। डॉ. उमर विस्फोटकों से भरी कार चला रहा था। डॉ. आदिल ने जसिर को IED बनाने के लिए पिसी चीनी और पोटैशियम नाइट्रेट (NPK खाद) जैसी सामग्री दी, जबकि डॉ. उमर ने रॉकेट IED पर रिसर्च कर उसे मार्गदर्शन दिया।
3. YouTube और ChatGPT से सीखा बम बनाना
चार्जशीट के अनुसार, जसिर ने YouTube और ChatGPT पर “रॉकेट कैसे बनाएं” और “मिश्रण किस अनुपात में होना चाहिए” जैसे सवाल सर्च किए। इसके बाद उसने डॉ. उमर, डॉ. मुजम्मिल शकील और अन्य आरोपियों के साथ मिलकर रॉकेट IED तैयार किए और जम्मू-कश्मीर के काजीगुंड जंगल में उनका परीक्षण किया। NIA टीमों ने बाद में जंगल से इन उपकरणों के अवशेष बरामद किए।
4. ड्रोन अटैक और ऑनलाइन खरीदे गए पार्ट्स
जांच में सामने आया कि डॉ. उमर ने जसिर को दो ड्रोन दिए थे और उनकी उड़ान रेंज व विस्फोटक ले जाने की क्षमता बढ़ाने को कहा था। इन ड्रोन में विस्फोटक लगाकर कश्मीर और देश के दूसरे हिस्सों में सुरक्षा प्रतिष्ठानों पर हमले की योजना थी। इसके अलावा, जसिर ने फ्लिपकार्ट से सेंसर, हीट गन, RF ट्रांसमीटर-रिसीवर, सोल्डरिंग किट और दूसरे इलेक्ट्रॉनिक उपकरण मंगाए। इनका इस्तेमाल IED के ट्रिगर सिस्टम को बनाने में किया गया।
5. रेड फोर्ट ब्लास्ट में इस्तेमाल हुआ TATP विस्फोटक
चार्जशीट के मुताबिक, डॉ. उमर ने जसिर द्वारा तैयार ट्रिगर मैकेनिज्म का इस्तेमाल कर वाहन आधारित IED में विस्फोट किया, जिससे रेड फोर्ट इलाके में धमाका हुआ। NIA ने पाया कि आरोपियों ने कई तरह के IED बनाए और उनका परीक्षण किया था। धमाके में TATP नाम का खतरनाक विस्फोटक इस्तेमाल हुआ था, जिसे कई प्रयोगों के बाद तैयार किया गया। जांच में “डॉक्टर” या “व्हाइट कॉलर” आतंकी मॉड्यूल का भी खुलासा हुआ, जिसमें कट्टरपंथी बनाए गए मेडिकल प्रोफेशनल शामिल थे।
