मथुरा की श्रीकृष्ण जन्मभूमि में हर महीने 1 करोड़ चढ़ावा आ रहा है। मंदिर ट्रस्ट का दावा है कि श्रीकृष्ण के लिए आने वाला चढ़ावा पूरी तरह से सुरक्षित है। काउंटिंग से लेकर बैंक में डिपॉजिट करने तक एक-एक रुपए की निगरानी हो सके, इसलिए हर दिन सिर्फ 1 दानपात्र
.
ट्रस्ट का ये दावा ऐसे वक्त आया है, जब अयोध्या के श्रीराम जन्मभूमि मंदिर में करोड़ों रुपए का चढ़ावा चोरी हो गया। SIT ने जांच रिपोर्ट 23 जून, 2026 को ACS (गृह) संजय प्रसाद को सौंप दी है।
सपा सांसद डिंपल यादव कह चुकी हैं, ’सरकार मंदिरों में कॉरिडोर (मथुरा-वृंदावन) बनवा रही है। कहीं वहां पर भी घोटाले तो नहीं हो रहे हैं। अयोध्या में सरकार साजिशन चोरी छिपाती रही।’
वहीं, श्रीकृष्ण जन्मभूमि संघर्ष न्यास के अध्यक्ष दिनेश शर्मा ‘फलाहारी’ ने मंदिर के चढ़ावे में गड़बड़ी के आरोप लगाए। इसके 24 घंटे के अंदर ‘श्रीकृष्ण जन्मस्थान सेवा संस्थान’ ने फलाहारी बाबा पर FIR करवा दी। श्रीकृष्ण जन्मस्थान का चढ़ावा कितना सुरक्षित है? यह हमने मथुरा में श्रीकृष्ण जन्मभूमि की व्यवस्था देखने वाले सेवा संस्थान ट्रस्ट के पदाधिकारियों से ही समझा…

सेवा संस्थान के जनसंपर्क अधिकारी विजय बहादुर सिंह ने कहा कि एक-एक पैसे की ऑडिट रिपोर्ट दे सकते हैं।
हर महीने ₹1 करोड़ का चढ़ावा, 3 तरीके से लेता है मंदिर
संस्थान के जनसंपर्क अधिकारी विजय बहादुर सिंह ने बताया- मंदिर में हर महीने औसतन 1 करोड़ रुपए का चढ़ावा आता है। इसे मंदिर के रखरखाव, सजावट, कर्मचारियों के वेतन आदि पर खर्च किया जाता है। मंदिर में 3 तरीके से दान आता है-
दानपात्र- परिसर में अलग-अलग जगहों पर करीब 20 दानपात्र रखे गए हैं। भक्त यहां पैसा और जेवर चढ़ाते हैं।
कार्यालय- श्रद्धालु सीधे मंदिर कार्यालय में आकर रसीद कटवाते हैं। कर्मचारियों को दान देते हैं।
ऑनलाइन- पिछले करीब 2 साल से ट्रस्ट के अकाउंट में ऑनलाइन दान भी लिया जा रहा है।

बिना जेब के कपड़े, 7 कैमरों से पैसों की गिनती की वीडियोग्राफी
मंदिर प्रशासन के मुताबिक, दान के एक-एक रुपए का हिसाब रखने के लिए कड़े नियम बनाए गए हैं-
- रोज खुलते हैं दानपात्र- मंदिर परिसर में लगे दानपात्रों की चाबियां मंदिर कार्यालय में रहती हैं। गणना प्रभारी, सेवक और गार्ड हर दिन कोई न कोई एक दानपात्र खोलते हैं। इसकी CCTV रिकॉर्डिंग होती है।
- बोरों में बंद होकर आता है कैश- दानपात्र से निकली रकम को बोरों में भरकर 15×15 फीट के एक विशेष काउंटिंग रूम में लाया जाता है। गिनती के वक्त संस्थान के सीनियर पदाधिकारी मौजूद रहते हैं। दानपात्र से निकलने वाले नोटों की गड्डियां बनाकर बक्से में रखकर सील कर देते हैं। इसके बाद बक्से को मंदिर परिसर में बनी ट्रेजरी में रख दिया जाता है। ट्रेजरी 7 CCTV की निगरानी में रहती है। दूसरे दिन स्टेट बैंक की मुख्य शाखा के कर्मचारी मंदिर आते हैं। संस्थान पदाधिकारियों की उपस्थिति में बक्सों की सील खोली जाती है। कर्मचारी मशीनों से चढ़ावे की गिनती करते हैं। धनराशि की रजिस्टर में एंट्री करने के बाद बैंक कर्मचारी उसे अपनी गाड़ियों से ले जाते हैं और संस्थान के खाते में जमा कर देते हैं। पूरी प्रक्रिया बिल्कुल पारदर्शी है।
- कर्मचारी पहनते हैं खास ड्रेस- काउंटिंग में बैठने वाले कर्मचारियों को संस्थान की तरफ से बिना जेब वाले निक्कर और शर्ट दिए जाते हैं, जिससे कोई पैसा न छिपा सके। अगर कोई कर्मचारी गिनती के दौरान बाहर जाता है, तो उसकी पूरी चेकिंग होती है।

श्रीकृष्ण जन्मभूमि की 13.37 एकड़ जमीन में से 2.5 एकड़ पर शाही ईदगाह मस्जिद और बाकी पर मंदिर परिसर है।
सोना-चांदी का साल में 4 बार ऑडिट
नोट और सिक्कों को अलग करके एक स्टेटमेंट बनाया जाता है। इसकी 3 कॉपियां तैयार की जाती हैं। दान की प्रक्रिया में पारदर्शिता बनी रहे, इसके लिए साल में 4 बार (हर 3 महीने में) ऑडिट कराया जाता है।
दान में मिली धातुओं का मूल्यांकन- दानपात्र से निकलने वाले सोने-चांदी या अन्य धातुओं को अलग रजिस्टर में दर्ज कर सील कर दिया जाता है। साल में एक बार विशेषज्ञ की मदद से उन धातुओं की शुद्धता और कीमत का मूल्यांकन किया जाता है।
2 संस्थाएं करती हैं मंदिर की देख-रेख
श्रीकृष्ण जन्मभूमि ट्रस्ट- यह संस्था श्रीकृष्ण जन्मभूमि की पूरी 13.37 एकड़ जमीन की कानूनी मालिक है। इसकी 2.5 एकड़ जमीन पर शाही ईदगाह मस्जिद और बाकी मंदिर के कब्जे में है। ट्रस्ट की स्थापना उद्योगपति सेठ जुगल किशोर बिड़ला ने 21 फरवरी, 1951में की थी। इसका मुख्य उद्देश्य श्रीकृष्ण जन्मस्थान पर भव्य मंदिर का निर्माण और पूरी जमीन का संरक्षण करना था। अब ट्रस्ट और ईदगाह के बीच 10.9 एकड़ जमीन को लेकर केस चल रहा है।
श्रीकृष्ण जन्मस्थान सेवा संस्थान- यह संस्था मंदिर के रोजमर्रा के प्रबंधन, देख-रेख और संचालन का काम संभालती है। श्रीकृष्ण जन्मभूमि ट्रस्ट ने मंदिर व्यवस्था को ठीक से चलाने के लिए इसका गठन किया था। इसकी स्थापना 1 मई, 1958 को ‘श्रीकृष्ण जन्मस्थान सेवा संघ’ के नाम से एक सोसाइटी के रूप में हुई थी। इसका नाम 1977 में बदलकर ‘सेवा संस्थान’ कर दिया गया था। इसके अध्यक्ष महंत नृत्य गोपाल दास, सचिव कपिल शर्मा और वरिष्ठ सदस्य गोपेश्वर नाथ चतुर्वेदी हैं। इनके अलावा जॉइंट मैनेजिंग ट्रस्टी अनुराग डालमिया समेत 15 अन्य लोग हैं।
अब जानिए फलहारी बाबा ने क्या आरोप लगाए
‘श्रीकृष्ण जन्मभूमि संघर्ष न्यास’ के अध्यक्ष दिनेश शर्मा उर्फ फलाहारी बाबा ने मथुरा मंदिर के चढ़ावे को लेकर गंभीर आरोप लगाए हैं। 19 जून को लिखे लेटर में उन्होंने कहा था- दानपात्र खोलते समय CCTV बंद कर दिए जाते हैं। दान में आए रुपए, सोना-चांदी और गहने आपस में बांट लिए जाते हैं।
उन्होंने अपने खून से पत्र लिखकर पूरे मामले की CBI जांच की मांग की है। दावा किया कि मंदिर की मैनेजिंग कमेटी के सदस्य पहले स्कूटर पर चलते थे। आज करोड़ों की गाड़ियों, आलीशान कोठियों के मालिक बन गए हैं।

सेवा संस्थान ने इन सभी आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए इसे बेबुनियाद करार दिया है। संस्थान के उपप्रबंधक अनुराग पाठक ने पुलिस में शिकायत देकर फलाहारी बाबा पर 20 लाख की रंगदारी मांगने का आरोप लगाया है।
————————-
ये खबरें भी पढ़ें –
दावा- सोने-चांदी की 1250 श्रीराम शिलाएं गायब, सबसे महंगी शिला मॉरीशस से आई थी; मुंबई के व्यापारी ने हीरे जड़ी शिला दान दी थी

अयोध्या के श्रीराम मंदिर में चढ़ावे की चोरी कोई नई नहीं है। धर्मसेना के संस्थापक संतोष दुबे का दावा है कि 1989 में गांव-गांव, शहर-शहर और देश-विदेश से पूजित होकर अयोध्या आईं सोने-चांदी, हीरे-माणिक्य और अष्टधातु की 1250 शिलाएं अब ‘गायब’ हो चुकी हैं। ये शिलाएं 2002 तक कारसेवकपुरम में रहीं। पढ़िए पूरी खबर…
ऑटो ड्राइवर ने राम मंदिर मैनेजमेंट में कैसे ली एंट्री, टिन्नू यादव पर चढ़ावे की चोरी के आरोप

अयोध्या के श्रीराम मंदिर में चढ़ावे की चोरी के बाद देशभर में टिन्नू यादव सुर्खियों में है। कहने को टिन्नू ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय के खास सहयोगी है, लेकिन श्रीराम मंदिर ट्रस्ट में वह बहुत पावरफुल बताया जाता है। चाहे सिक्योरिटी का मैनेजमेंट हो या चढ़ावे को बैंक में डिपॉजिट कराना हो, टिन्नू ही सब कुछ मैनेज करता आया है। पढ़िए पूरी खबर…