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सरकारी तंत्र में जमीनी हकीकत से बेखबरी और प्रशासनिक लेट-लतीफी का बड़ा कारनामा सामने आया है। केंद्र सरकार के जिस नशा मुक्त भारत अभियान को जून के महीने में स्कूलों में चलाकर पूरा करना था, उसके लिए माध्यमिक शिक्षा निदेशालय तब जागा जब अभियान की तय तारीख भी निकल चुकी थी। हैरानी की बात सिर्फ राज्य स्तर पर नहीं, बल्कि केंद्र के स्तर पर भी रही। केंद्रीय मंत्रालय ने यह अभियान उस अवधि (17 से 26 जून) में तय किया, जब देश के अधिकांश राज्यों के स्कूलों में गर्मियों की छुट्टियां चल रही थीं। रही-सही कसर राजस्थान के शिक्षा विभाग ने पूरी कर दी, जिसने अभियान खत्म होने के भी 3 दिन बाद यानी 29 जून की रात को आदेश जारी किए। बड़ा सवाल यह है कि जब स्कूलों में ताले लटके थे और अभियान की मियाद भी बीत गई तो अभियान के तहत रैलियां और प्रतियोगिताएं आखिर किसके बीच प्रस्तावित-आयोजित की जा रही थीं? केंद्रीय मंत्रालय की भी गलती, छुटिट्यों में लिखा पत्र अब साख बचाने के लिए नो-बैग डे का सहारा तय समय पर अभियान चलाने में नाकाम रहने के बाद अब विभाग अपनी साख बचाने की कोशिश में जुट गया है। इस कागजी औपचारिकता को पूरा करने के लिए विभाग ने अब इस आदेश को आगामी शनिवार को होने वाले बस्ता मुक्त दिवस (नो-बैग डे) से जोड़ दिया है। नए निर्देश के तहत अब शनिवार को स्कूलों में नशा मुक्ति विषय पर जागरूकता रैली, शपथ ग्रहण, पोस्टर और निबंध प्रतियोगिताएं आयोजित करने को कहा गया है, ताकि रिकॉर्ड में काम को पूरा दिखाया जा सके।
बंद स्कूलों में नशा मुक्त भारत:अभियान खत्म होने के 3 दिन बाद जागा विभाग, 26 जून को खत्म होना था, निदेशालय ने 29 को जारी किया आदेश
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