दिल्ली यूनिवर्सिटी में साइंस ऑफ हैप्पीनेस कोर्स बना पहली पसंद:दो साल में 2 हजार से ज्यादा छात्रों ने अपनाया जीवन जीने का नया नजरिया

Actionpunjab
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नई दिल्ली। दिल्ली विश्वविद्यालय में विद्यार्थियों के मानसिक स्वास्थ्य, सकारात्मक सोच और जीवन कौशल को मजबूत करने के उद्देश्य से शुरू किया गया साइंस ऑफ हैप्पीनेस, कोर्स लगातार लोकप्रिय हो रहा है। पिछले दो वर्षों में 2 हजार से अधिक छात्र-छात्राएं इस वैल्यू एडिशन कोर्स से जुड़ चुके हैं। फिलहाल विश्वविद्यालय के 17 कॉलेजों और मनोविज्ञान विभाग में यह पाठ्यक्रम संचालित हो रहा है। बुधवार को कुलपति प्रोफेसर योगेश सिंह की अध्यक्षता में आयोजित समीक्षा बैठक में विभिन्न कॉलेजों के प्राचार्यों ने कोर्स के सकारात्मक परिणाम साझा किए। कुलपति बोले- अच्छा करेंगे तो अच्छा ही होगा कुलपति ने कहा कि आज के प्रतिस्पर्धी दौर में केवल अकादमिक उत्कृष्टता पर्याप्त नहीं है, बल्कि मानसिक संतुलन और सकारात्मक दृष्टिकोण भी उतना ही जरूरी है। उन्होंने कहा, वर्ल्ड इज ए वंडरफुल प्लेस। अच्छा करेंगे तो अच्छा ही होगा। बैठक में नशामुक्त परिसर अभियान पर भी चर्चा हुई। कुलपति ने कहा कि नशा व्यक्ति ही नहीं, पूरे परिवार की खुशियां छीन लेता है। ऐसे में विश्वविद्यालय के ड्रग-फ्री कैंपस अभियान को और प्रभावी ढंग से आगे बढ़ाने की आवश्यकता है। विद्यार्थियों के लिए उपयोगी साबित हो रही माइंड लैब मिरांडा हाउस और दौलत राम कॉलेज ने बताया कि उनके यहां स्थापित माइंड लैब, विद्यार्थियों की काउंसिलिंग, अध्ययन और शोध गतिविधियों में उपयोगी साबित हो रही हैं। अन्य कॉलेज भी इसी तरह की सुविधाएं विकसित करने की तैयारी कर रहे हैं। डीन अकादमिक अफेयर्स प्रो के रत्नाबली ने बताया मार्च 2024 में रेखी फाउंडेशन फॉर हैप्पीनेस के सहयोग से शुरू किया गया यह एक सेमेस्टर का कोर्स फिलहाल स्नातक स्तर पर पढ़ाया जा रहा है। भविष्य में इसे स्नातकोत्तर स्तर के स्किल-आधारित पाठ्यक्रमों से जोड़ने पर भी विचार किया जा रहा है।

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