Malegaon Blast Case; ATS Mehboob Mujawar | RSS Mohan Bhagwat | मालेगांव ब्लास्ट- पूर्व ATS इंस्पेक्टर का दावा: RSS चीफ भागवत की गिरफ्तारी के आदेश थे; भगवा आतंकवाद साबित करने का दबाव था

Actionpunjab
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नई दिल्ली14 घंटे पहले

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महाराष्ट्र के मालेगांव ब्लास्ट केस के सभी 7 आरोपियों को NIA स्पेशल कोर्ट ने 31 जुलाई को बरी कर दिया। मामले की जांच महाराष्ट्र की एंटी टेररिस्ट स्क्वायड (ATS) ने की थी। अब महाराष्ट्र ATS के पूर्व इंस्पेक्टर महबूब मुजावर ने बड़ा दावा किया है।

उन्होंने कहा- मुझे राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) प्रमुख मोहन भागवत को गिरफ्तार करने का आदेश दिया गया था। भगवा आतंकवाद स्थापित करने के लिए भागवत की गिरफ्तारी का दबाव बनाया गया था। मेरे पास इस दावे के दस्तावेज मौजूद हैं।

उन्होंने कहा कि कोई भगवा आतंकवाद नहीं था। सब कुछ फर्जी था। मैं किसे के पीछे नहीं गया, क्योंकि मुझे वास्तविकता पता थी। मोहन भागवत जैसे व्यक्ति को पकड़ना मेरी क्षमता से बाहर था। अब इस मामले में सातों आरोपियों को बरी किया गया है। इससे ATS के फर्जी कामों का पर्दाफाश हो गया।

मुजावर के दावे पर भाजपा सांसद संबित पात्रा ने कहा- सबकुछ गांधी परिवार के कहने पर हो रहा था। मोहन भागवत को झूठे केस में फंसाने की साजिश थी। उन्होंने कहा कि भगवा आतंकवाद का नरेटिव रचा गया।

मुजावर ने कहा-

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इस फैसले ने एक फर्जी अधिकारी की फर्जी जांच को उजागर कर दिया है। मैं यह नहीं कह सकता कि ATS ने तब क्या जांच की और क्यों, लेकिन मुझे राम कलसांगरा, संदीप डांगे, दिलीप पाटीदार और RSS प्रमुख मोहन भागवत जैसी हस्तियों के बारे में कुछ गोपनीय आदेश दिए गए थे। ये सभी आदेश ऐसे नहीं थे कि कोई उनका पालन कर सके।

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नोट- कोर्ट को बताया गया था कि ब्लास्ट में 101 लोग घायल हुए थे। कोर्ट ने फैसला सुनाते हुए कहा 101 नहीं, 95 लोग घायल हुए थे।

नोट- कोर्ट को बताया गया था कि ब्लास्ट में 101 लोग घायल हुए थे। कोर्ट ने फैसला सुनाते हुए कहा 101 नहीं, 95 लोग घायल हुए थे।

मालेगांव ब्लास्ट में 6 लोगों की मौत हुई थी

महाराष्ट्र के मालेगांव में 29 सितंबर 2008 को धमाका हुआ था। इसमें 6 लोग मारे गए थे और करीब 100 लोग घायल हुए थे। मालेगांव ब्लास्ट केस की शुरुआती जांच महाराष्ट्र ATS ने की थी। 2011 में केस NIA को सौंप दिया गया था।

पूर्व भाजपा सांसद सांसद साध्वी प्रज्ञा आरोपी में शामिल थीं

मालेगांव ब्लास्ट केस में नेशनल इन्वेस्टिगेशन एजेंसी (NIA) ने 2016 में चार्जशीट दाखिल की थी। केस में 3 जांच एजेंसियां और 4 जज बदले। NIA की स्पेशल कोर्ट का मालेगांव ब्लास्ट केस में 8 मई 2025 को फैसले आने वाला था, लेकिन इसे सुरक्षित रखा गया था।

31 जुलाई को जज एके लाहोटी ने पूर्व भाजपा सांसद साध्वी प्रज्ञा समेत सभी 7 आरोपी लेफ्टिनेंट कर्नल श्रीकांत प्रसाद पुरोहित, रमेश उपाध्याय, अजय राहिरकर, सुधाकर चतुर्वेदी, समीर कुलकर्णी और सुधाकर धर द्विवेदी को बरी किया।

करीब 17 साल बाद आए फैसले में कोर्ट ने कहा- जांच एजेंसी आरोप साबित नहीं कर पाई है, ऐसे में आरोपियों को संदेह का लाभ मिलना चाहिए। धमाका हुआ था, लेकिन यह साबित नहीं हुआ कि बम मोटरसाइकिल में रखा था।

कोर्ट ने कहा कि यह भी साबित नहीं हुआ कि मोटरसाइकिल साध्वी प्रज्ञा के नाम थी। यह भी साबित नहीं हो सका कि लेफ्टिनेंट कर्नल श्रीकांत प्रसाद पुरोहित ने बम बनाया।

पीड़ित के वकील बोले- जांच एजेंसियां और सरकार फेल हुई

कोर्ट के फैसले पर पीड़ितों के वकील शाहिद नवीन अंसारी ने कहा- हम NIA कोर्ट के फैसले के खिलाफ हाईकोर्ट में अपील करेंगे। इस मामले में जांच एजेंसियां और सरकार फेल हुई है।

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महाराष्ट्र के मालेगांव में रहने वाले सैयद निसार का बेटा अजहर नमाज पढ़ने निकला था। शाम को लौटते वक्त वह भीकू चौक पहुंचा। अजहर एक बाइक के बगल से गुजर रहा था, तभी ब्लास्ट हो गया। 19 साल के अजहर के अलावा 5 और लोग मारे गए। जवान बेटे की मौत पर सैयद उस दिन खूब रोए। उस दिन तारीख थी 29 सितंबर 2008.., पूरी खबर पढ़ें…

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